17
Share




@dawriter

संसकारी से संस्कारहीन बहू

0 1.35K       

सुनिधि पढ़ी लिखी,शांत स्वभाव की संस्कारी  तथा सर्वगुण सम्पन्न। माता पिता क़ी लाड़ली उनकी हर बात मानने वाली,अपनी बातो से सबका मन मोह लेने वाली लड़की थी।

सुनिधि के माता-पिता ने अच्छा वर और घर देख अपनी लाडली को सब कुछ देकर विदा किया,

सुनिधि ने तन मन से पूरे घर को संभाला और अपने सास ससुर की हर बात मानी।अपनी मेहनत और जिम्मेदारी से उसने अपने पति रवि के दिल में जगह बना ली। रवि भी सुनिधि के घर और सुनिधि की लगातार आफिस की तरक्की से खुश था पर न जाने सुनिधि के इतना करने के बाद भी सुनिधि को सुसराल वाले ताने ही देते उसकी और उसके माता पिता की बुराई करते वो अनसुना कर देती,पर ये सिलसिला कभी खत्म ना होने वाला था।सारा दिन बिना कुछ बोले वो घर का सारा काम करती और उसकी सारी सेलरी  भी सास ले लेती फिर भी घर में शांति बनाए रखने के लिए ससुराल वालों के तानो को चुप रहकर सुनती रहती।अपनी हर कोशिश के बाद भी सुनिधि सांस के मन नहीं भायी।

ऐसे ही सुनिधि को संस्कारो की आड़ में सब कुछ सहते हुए पांच साल हो गए पर उसने चुपी न तोड़ी कभी रवि से शिकायत करती तो हर बार रवि तुम समझदारी दिखाओ चुप ही रहो का उपदेश देता,हर बार फिर रवि की बात सुनकर मन मसोस कर सुनिधि रह जाती।

आज सुनिधि के ससुराल छोटा सा कार्यक्रम रखा है सुनिधि सुबह से बिना कुछ खाए पीए तैयारी  में लगी है साथ ही मेहमानो की आवभगत भी कर रही हैं एकाएक सुनिधि को  जब उसके सास ससुर और  कुछ रिश्तेदारों की हंसने की आवाज़ सुनाई देती है ध्यान देने पर सुनिधि को पता चला कि उसके मां बाप का मजाक उड़ाया जा रहा है। अकेले में तो सुनिधि को हर रोज ताने मिलते थे पर आज सुनिधि को उसकी अंतरात्मा ने झंझोरा उसने एक फैसला लिया,की अब वह संस्कारो के नाम पर और चुप न रहेगी अपने और अपने माता-पिता को अपमानित न होने देगी, इसके लिए सुनिधि ने बड़ों को जबाव देना उचित समझा।

अब सुनिधि आगे बढ़ अपनी सास को सब के सामने अपने माता-पिता का मजाक बनाने से रोक चार बातें ओर सुना दी यह सब देखकर सुनिधि की सांस और ससुराल वाले हैरान हो गए,अब उसके माता पिता के बारे मे कोई भी कुछ भी  बुरा बोलने से पहले हज़ार बार सोचने लगे, अब उनकी हर बात का जवाब था सुनिधि के पास। यह सब कर सुनिधि आज अपनी ससुराल वालों की नजर में संस्कारी से संसकारहीन बन गई पर सुनिधि  बहुत ख़ुश थी कि वह संस्कारी बहु से संस्कारहीन बहु अपने माता-पिता और अपने सम्मान को पाने के लिए बनी।

क्या आप सबको क्या लगता है सुनिधि ने जो किया क्या सही किया क्या उसे अपने ससुराल वालों को जबाव देना चाहिए था। आपकों क्या लगता है अपनी राय जरुर दे। आपके सुझाव का इंतजार रहेगा।

कहानी पढ़ने के लिए धन्यवाद, कहानी अच्छी लगी तो लाइक, कमेंट जरुर करें। धन्यवाद आपका।



Vote Add to library

COMMENT