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@dawriter

रिश्तो के मायने

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आजकल सुषमा जी बहुत व्यस्त हैं, क्योंकि अभी अगले ही हफ्ते उनकी इकलौती बेटी रीमा की शादी है। रीमा को उन्होंने खूब लाड़ प्यार से बड़ा किया पर उन्होंने उसे कभी भी गलत बात पर रोकने से भी गुरेज नहीं किया, उन्होंने उसे इस काबिल भी बनाया कि घर के बाहर भी खुल कर जी सके और आत्मनिर्भर बनी रहे .

वहीं उन्होंने उसे घर के हर काम में भी उतना ही दक्ष बनाया जितना हर सास अपनी बहू से अपेक्षा करती है। ये उन्होंने केवल बेटी को ही नहीं अपने बेटे अक्षय को भी बखूबी सिखाया है कि कैसे उसे एक अच्छा दामाद भी बनना उतना ही जरूरी है जितना एक बहू से अच्छा होने का दम भरा जाता है। आज गाँव से भी लोग आने शुरू हो गए। दरअसल, सुषमा जी की ससुराल गांव में ही थी, पर शादी के कुछ सालों बाद से ही सुषमा जी का परिवार शहर आकर रहने लगा , जिसमें उनके सास ससुर, नन्द और देवर सभी थे, यहाँ शहर में आकर सुषमा जी और उनका परिवार हर शादी ब्याह के मौके पर गांव जरूर जाता था और खासकर सभी लोग सुषमा जी को बहुत मानते थे। क्योंकि सुषमा जी कभी किसी को न ही कुछ अपशब्द कहती न ही कोई ऐसा काम करती जिससे किसी का दिल दुखे, आज तो सुषमा जी के यहां पहला ब्याह था तो सबको आना ही था।

सुषमा जी ने रीमा के गहने निकाल कर चाची जी को दिखाए, " लो चाची देखो तो..... जरा ये रीमा के है सुषमा जी ने उनके हाथ मे गहने दिये " और कहने लगी "अब अम्मा जी के जाने के बाद तो आपको पता है कि आप ही हमारी बड़ी हैं"। चाची ने गहने हाथ में लिए और रीमा को बुलाने को कहा, रीमा को बैठाते हुए बोली " ले ......बिटिया ! जरा पहन के तो दिखा, और देख नई जगह नया माहौल होगा, कहीं कुछ रख के खो न देना। तू ऐसा करियो, ये सब जा कर अपनी सास को दे दियो, आख़िर सास भी तो माँ के ही समान होती है। वहाँ तुझे ये सब रिश्ते नए रूप में मिलेंगे बिटिया, देख ..... माँ जैसी सास, पिता से ससुर, देवर भाई जैसा, नन्द बहन सी, और पति वो तो परमेश्वर ही होवे है।

नहीं चाची ऐसा न कहिये, गहने देना अलग बात है वो इसकी सास होंगी, साथ ही बड़ी भी इसका फ़र्ज़ बनता है उनसे जुड़ा हर काम उनके अनुसार करे, पर ये नए रिश्तो में पुराने रिश्ते खोजना मेरी समझ से बाहर है, ये भी फिर वहाँ जाकर नए रिश्तो में पुराने रिश्ते ढूंढती रह जायेगी फिर न तो नए ही निभा पाएगी न पुराने भुला पाएगी। आप जानती हैं...... चाची ! मनीषा भाभी, आज तक क्यो किसी भी रिश्ते से नही बंध पायी, क्योंकि ! उन्होंने शादी के बाद भी अपने पुराने रिश्तों को ही नए में खोजा।

अगर शादी के पहले ही दिन से उन्होंने हर नया रिश्ता नया ही माना होता तो उन्हें इतनी चिढ़ न महसूस होती और आज भी उनका रिश्ता हम सब के साथ बहुत अच्छा होता। मैने माँ जी मे कभी भी अपनी माँ को नहीं ढूंढा, शायद यही वजह थी कि माँ जी को कभी मुझसे कोई शिकायत नहीं हुई। यही मैंने हर रिश्ते के साथ निभाया, तो न ही मुझे किसी भी नए रिश्ते से कभी कोई उम्मीद थी न ही मैंने कभी किसी के मन मे कोई पुराने रिश्ते को ढूंढने की उम्मीद जगाई, कि मैं भी इस जैसी या उस जैसी हूँ।

शायद यही कारण है कोई भी सास अपनी बहू को उसी रूप में नही स्वीकार कर पाती, जैसी वो है ...... क्योंकि ! उन्हें उसमे अपनी बेटी चाहिए, अब आप ये बताओ .....???? जिस बेटी को आपने 23-24 साल अपनी परवरिश से बड़ा किया, अब नयी 23-24 दिन पुरानी बहू आपकी उसी बेटी जैसी कैसे बन जाएगी ......??? इसके तो दो उपाय है ..... एक तो ये, कि या तो आप उसे उतना ही समय दीजिये, जितना आपने अपनी बेटी की परवरिश में दिया, लेकिन उसके लिए उसके लिए तो ये ज़िन्दगी कम पड़ जाएगी क्योंकि जिस उम्र में सास बनेगी उसके बाद बची हुई सारी उम्र ही इतनी नहीं है, तो इसीलिए उसे आज उसे उसी के रूप में स्वीकार कर लीजिए, सब खुश रहेंगे।

आज कल आप जानती है ..... पति पत्नी में इतनी आपसी समझ क्यों होती है ......???? क्योंकि! वो दोनों कभी भी परमेश्वर और भक्त की तरह नहीं, बल्कि दोस्त बन कर रहते हैं। जिन्हें जिंदगी भर एक दूसरे की भावनाओं को समझना है और साथ ही हर मुश्किल का सामना मिलकर करना है। जो भी घटित होना है, दोनों की ज़िंदगी में ही होना है, अब अगर उसे वो परमेश्वर मान लेगी फिर तो सारी जिंदगी इसी कशमकश में कट जाएगी कि उन्हें ये बुरा न लगे ये वो बुरा न लगे, क्योंकि परमेश्वर को नाराज़ करने से पाप भी तो लगता है न, इसीलिए आप हर चीज की तुलना करें ये जरूरी तो नही।

सुषमा जी की बात सुनकर चाची ने उन्हें गले लगा लिया, तभी कहूँ सुषमा तुझ जैसी बहु न होवे कोई। तूने मुझ बुढ़िया की भी सोच बदल दी...... आज जो तूने कही है ..... न, ये लाख टके की बात है , " जुग जुग जी " !! कहते कहते चाची अपनी बैंत का सहारा लेकर उठ कर बाहर चली गयी।।

© नेहाभारद्वाज

Image Source: teluguone

 



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