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@dawriter

यही तो इश्क है-३

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nis1985 by  
nis1985

निशा की कलम से.....

【यही तो इश्क है भाग-3】

अब तो मन्दिरी और आनंद के बीच बातो का सिलसिला, शुरू हो चुका था, चूंकि मन्दिरी अभी आनंद के इश्क के समुंदर में डूबने को तैयार नहीं थी, फिर भी न चाहते हुए भी उसे आनंद को समय देना पड़ता था, मन्दिरी की माँ ने सख्ती से जो बोल रखा था। देखो मन्दिरी तुम्हारी और आनंद की अब सगाई हो चुकी है, और शादी को अभी दो महीने का समय है तो बेहतर होगा कि तुम भी आनंद को समझ लो अच्छे से, फ़ोन पे बात करोगी तो तुम आनंद को समझ पाओगी, जिससे बाद में तुम्हे सहजता होगी!

""हम्म्म्म माँ, मन्दिरी ने अनमने ढंग से कहा......

""मन्दिरी की माँ को तो आनन्द अपने दामाद के रूप में पहले से ही स्वीकार हो चुका था, और हो भी क्यों न आनंद इतना हँसमुख और प्यारा था कि किसी का भी दिल जीत ले और किसी के भी दिल मे अपनी जगह बना ले!
पर अब बारी थी आनंद की मन्दिरी के दिल मे जगह बनाने की!

"" अचानक फ़ोन की घण्टी बजी, मन्दिरी पढाई में व्यस्त थी उसने ध्यान ही नहीं दिया।

""माँ ने जोर से आवाज लगाई, मन्दिरी, अरे ओ मन्दिरी कहा हो कब से फोन की घण्टी बज रही है तुम्हे होश भी है कि नहीं।

""मन्दिरी का ध्यान भंग हुआ, अरे हाँ मां आनंद के सिवा और किसका हो सकता है, मन्दिरी ने हँसते हुये कहा!
और अनमने ढंग से फ़ोन की तरफ देखा।

""माँ ने मन्दिरी की ओर घूरते हुए कहा, तुम तो ऐसे कर रही हो जैसे तुम्हे काला पानी की सजा सुना दी गयी हो।

""अरे नहीं माँ, ऐसी कोई बात नहीं है।

""तो कैसी बात है मन्दिरी, माँ ने खीजते हुए पूछा।

""मन्दिरी ने दबी आवाज में कहा, माँ आंनद बहुत अच्छा और सम्पन्न घर का लड़का है, और देखने मे भी बहुत सुंदर, मुझमे उतनी क्षमता ही नहीं कि मैं उसमे कोई कमी निकाल पाऊँ, और देखो न माँ कितना व्यवहार कुशल है आनंद, मुझसे कही सुन्दर लड़की भी उसे मिल जाती जाती पर उसने मुझ जैसे साधारण लड़की को चुना मैं तो कितनी भाग्यशाली हूं न माँ, पर तुम तो जानती हो कि मेरे कुछ सपने भी हैं!!

""ह्म्म्म जानती हूं मन्दिरी,,,,,,माँ ने उसके सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा।

""मन्दिरी मेरी प्यारी और समझदार बेटी तुमसे घर की परिस्थिति तो छुपी नहीं है, बेटा और तुम्हारी छोटी बहन और एक भाई भी है।

""ह्म्म्म मां मैं सब समझ रही हुँ, और मैं आपलोगो से भी बहुत प्यार करती हूं, अपने सपनोे से भी कहि ज्यादा आप सबकी खुशियां मेरे लिए सरवोपरि है।

""मन्दिरी के मुँह से ये बाते सुनते ही मां का कलेजा भर आया,,,रोने लगीं मन्दिरी की माँ फूट-फूट कर।

""अरे माँ ये सब क्या है, अब देखो आपके रोने से आपकी समझदार बेटी कमजोर पड़ जायगी, और हाँ ऐसे ही आप रोती रही न तो देखना ससुराल जाके मैं वापस नहीं आने वाली।

""अरे धत्त पगली कुछ भी बोलती रहती है, मां ने अपने आंसूु पोछते हुए कहा, चेहरे पे थोड़ा सुकून और मुस्कान वापस आ गया माँ के।

""मां ने मन्दिरी को गले से लगा लिया, सच मे मन्दिरी तू बहुत किस्मत वाली है रे की तुझे आनंद जैसा पति मिला है।

मन्दिरी का चेहरा थोड़ा शर्म से लाल हो गया,,
अब माँ ने मन्दिरी के दिल मे आंनद के प्रति इश्क के बीज बोने की एक छोटी सी कोशिश तो कर दी थी, अब क्या मन्दिरी इस इश्क के बीज से अपने प्रेम की बगिया सजा पाएगी???????

जैसे आनंद ने मन्दिरी के प्यार में डूबकर मन्दिरी की सारी आदतों को सहजता से स्वीकार करने की पहल कर दी है, क्या मंदिरी भी आनंद की आदतों और उसकी पसन्द को स्वीकार कर पायेगी???

"क्योंकि यही तो इश्क है"...!!!

"तेरे इश्क़ के एहसास में, अब तो डूब जाना है
समझना क्या, बस अब खुद को भूल जाना है.....!!!!©

【क्रमशः】

निशा रावल
बिलासपुर, छत्तीसगढ़

यही तो इश्क है-१

यही तो इश्क है-२

यही तो इश्क है भाग-४

यही तो इश्क है भाग-५

 



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