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@dawriter

यही तो इश्क है भाग-९

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nis1985 by  
nis1985

निशा की ✍ से--

【यही तो इश्क है भाग-९】

"आनंद मंदिरी से अगले दिन मिलने आने का वादा लेकर आफिस जाने की तैयारियों में लग गया, बहुत खुश है आनंद आज सच मे,उसे मंदिरी को अपनी राजकुमारी के रुप में जो देखना था, बस उसी की कल्पना कर-करके आनंद मंदिरी के खयालो में खोया हुआ था।

सच भी तो है जब हमारी कोई बहुत बड़ी खुशी पूरी होने वाली होती है तो हम खुद में और उन ख़यालो में इतने ज्यादा गुम हो जाते हैं कि हमे होश ही नहीं होता जब तक उन खुशियो के प्रत्यक्ष दर्शन न कर ले, बस यही हाल आनंद का भी था।

अचानक माँ ने आवाज दी-आनंद बेटा जल्दी से आओ नाश्ता ठंडा हो रहा है, आफिस का टाइम भी तो हो रहा है, आज तुम इतनी देर क्यों कर रहे हो।

अब आनंद कैसे बयां करे कि इश्क में पड़ने के बाद कैसा महसुस होता है, न समय का पता होता है, न दिन के चैन की खबर और न ही रातों की नींद का पता, भूख तो ऐसे गायब होती है, मानो उनके एहसासों और प्यार की महक से ही पेट भर गया हो।

बस यही सब सोचते और खुद में मुस्कुराते आनंद ने जवाब दिया-आता हूं माँ, वो क्या है, न आज आफिस में काम ज्यादा है, तो पेपर्स रखने में थोड़ा समय लग गया, और हा माँ आज मुझे उतनी भूख नहीं है,अगर न भी खाऊ नाश्ता तो चलेगा।

अरे ऐसे कैसे चलेगा माँ ने आनंद को डाँटते हुए कहा-आज तक एक भी दिन ऐसा हुआ है कि मैंने तुझे नाश्ता खिलाये बिना भेजा हो, फिर तू क्यों आज मेरे नियम तोड़ने पर उतारू हो गया है, सुन आनंद चाहे तेरी शादी भी क्यों न हो जाये ये सब नियम टूटने नहीं चाहिए जो चल रहे है।

ओह हो माँ नाराज क्यों होती हो, कुछ भी नहीं बदलेगा, मै रोज टाइम पर खाऊंगा अब खुश ,अच्छा चलो अब मुस्कुरा दो नहीं तो दिनभर तुम पर ही ध्यान अटका रहेगा मेरा।

अच्छा बाबा ले मुस्कुरा दिया, अब तू आराम से जा मेरी टेंसन बिल्कुल मत ले तेरी माँ की तू सांसे है समझा, तुझे हर हाल में खुश देखना चाहती हु मैं,बस यही मेरी जिन्दगी का मकसद है।

हा माँ जानता हूँ -आई लव यू,अच्छा माँ चलता हूं अब सारा काम शादी से पहले ही निपटा लेना है ताकि अपनी शादी में कोई टेंशन न रहे इतना कहकर आनंद आफिस को निकल गया।

अचानक माँ को ध्यान आया कि वो कुछ भूल गयी है अरे ये क्या आज तो मैंने आनंद को माता रानी का टीका बिना लगाए ही भेज दिया, ऐसी गलती तो मुझसे कभी भी नहीं हुई, माँ एकदम से चिंतित हो गयी, हो भी क्यों न हम जितने भी आधुनिक विचारों में जिये लेकिन एक माँ का दिल अपने बच्चे के लिए कभी नहीं बदलता, हम बचपन मे अपने बच्चे की कितनी नजर उतारते हैं, काला टीका तक लगात है, छोटे बच्चे जब रोते हैं तो आज भी पहले यही ख्याल आता है कि, हो सकता है नजर लग गयी होगी मेरे बच्चे को और सबसे पहले उसकी नजर उतारते हैं, बस यही होता है माँ का दिल ये कोई धकयानुसी विचार नही वरन एक माँ का अपने बच्चे के प्रति असीम प्रेम और सुरक्षा की भावना होती है, फिर उसका बेटा चाहे गबरू जवान हो जाये तब भी एक माँ का दिल भी वही होता है,आज भी हम कोई भी नया काम करे या हम पे कोई मुसीबत आये तो हम ईश्वर को सबसे पहले याद करते हैं, बस आनंद की माँ का दिल भी अपने बेटे के लिए ऐसा ही था भले वो कितने भी आधुनिक विचारो की थी।

माँ ने तुरंत फोन उठाया और आनंद को कॉल किया- हेलो! बेटा सुन न आज मैं तुझे माता का टीका लगाना भूल गयी ,तू ध्यान से रहना और अपना ख्याल रखना, मातारानी तेरे सारे काम सफल करेंगी, मा ने आनंद को समझाते हुए कहा।

अरे माँ आप फिर चिंता में पड़ गयी इन सबसे कुछ नहीं होता मुझे अपनी माँ के प्यार और माता रानी पर पूरा भरोसा है, इतना कहकर आनंद ने फोन कट कर दिया और काम पर लग गया

आज आफिस में इतना ज्यादा काम था कि आनंद को लंच करने की भी फुर्सत न मिली, काम करते-करते कब आफिस का टाइम भी ओवर हो गया ,कि उसे पता ही नहीँ चला ,बॉस ने कहा-आनंद तुम घर जाना चाहो तो जा सकते हो बाकी काम कल निपटा देना, लेकिन मुझे कल शाम तक पेपर्स कम्पलीट ही चाहिए, आनंद बॉस से आज्ञा लेकर अपने ऑफिस कलीग के साथ आज उसके घर चला गया दोनो ने सोच रखा था कि आज रात जाग कर काम निपटा ही देना है, इसलिए आनंद ने मा को फोन किया, वो पहले से ही परेशान थी की आज आनंद इतनी लेट क्यों हुआ।

हेलो! माँ आज काम बहुत ज्यादा है तो मैं सुनील के घर पर ही रुकूँगा, यहा हम दोनों साथ मे काम निपटा लेंगे,आप ड्राइवर को मेरे कपड़े दे दो कल यही से आफिस निकल जाऊँगा,

माँ नाराज होते हुए बोली-हद है आनंद इतना भी क्या काम की तुम घर नहीं आ रहे।

अरे नही माँ-कल शाम तक बॉस को पेपर देने ही है, अगर हमने ढिलाई की तो कुछ काम नहीं होगा और तुम तो जानती हो मुझे शादी के समय कुछ ज्यादा छुट्टियां चाहिए अगर बॉस को खुश नही रखूंगा तो मुझे इतनी लंबी छुट्टी भी नहीं मिल पाएगी, समझो माँ थोड़ा और पलज़्ज़ ज्यादा परेशान मत होना आप और आराम से सो जाना मैं कल शाम को मिलता हूँ आपसे,जल्दी आऊंगा क्योंकि उसके बाद मुझे मंदिरी के पास जाना है, आनंद ने माँ को समझाते हुए कहा।

अच्छा ठीक है तू भी अपना ख्याल रखना और खाना जरूर खा लेना मैं कल तेरा इंतजार करूँगी ,इतना कहकर माँ ने फ़ोन रख दिया,,,मा को अब चैन कहा वो तो रात भर बेचैन सी थी,बस करवटे बदल रही थी,आंखों से नीन्द तो कोसो दूर थी,वो तो बस आनंद को ही याद कर रही थी

तभी अचानक आनंद के पिताजी जाग गये- अरे ये क्या तुम अब तक सोइ नहीं, बात क्या है, तबियत तो ठीक है न तुम्हारी ,आनंद के पिताजी ने चिंतित होते हुए पूछा

हाँ जी मुझे कुछ नहीं हुआ है,बस आनंद के बारे में ही सोच रही थी, अरे यार तुम भी न, अब वो कोई छोटा बच्चा थोड़ी रहा जो अपना ख्याल नहीं रख सकता, शादी होने वाली है उसकी, सो जाओ और ज्यादा चिंता मत करो

हाँ जी आप सही कह रहे पर एक माँ का दिल,उसे कौन समझाए, सबकुछ जानते हुए भी आप ऐसी बाते कर रहे हैं ताज्जुब है मुझे, इतना कहकर आनंद की माँ मुँह फेरकर लेट गयी, अचानक माँ के कानों में कुछ आवाज पड़ी पलटकर देखा तो आनंद के पिताजी की आंखे आंसुओ से भीगी हुई थी, अब शायद दोनो कुछ भी कहने की हालत में नहीं थे, बस भीगी पलकों से एक दूसरे को देख रहे थे, उस मनहूस घड़ी को याद करते हुए,

मेरी आँखों का तारा, मेरा राजदुलारा है तू,
मेरे बेटे इस जीवन से भी प्यारा है तू....!
नाजो से पाला आँचल के तले सुलाया है तुझे,
मेरी उम्मीद और इस घर का उजाला है तू....!!

क्योंकि यही तो इश्क है©

【क्रमशः】

यही तो इश्क है-१

यही तो इश्क है-२

यही तो इश्क है-३

यही तो इश्क है भाग-४

यही तो इश्क है भाग-५

यही तो इश्क है भाग-६

यही तो इश्क है भाग-७

यही तो इश्क है भाग-८


निशा रावल
बिलासपुर,छत्तीसगढ़



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