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@dawriter

यही तो इश्क है भाग-७

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nis1985 by  
nis1985

निशा की कलम से...

【यही तो इश्क है भाग-७】

"मंदिरी और आनंद दिल मे मोह्हबत के दिये जलाये अपने-अपने घर को चल तो दिये, लेकिन दोनों के दिल और और दिमाग मे अब शायद किसी और के लिए जगह ही नही बची थी,की कुछ और भी सुनाई दे,सिवाय एक दूसरे की धड़कनों के।

"मंदिरी इश्क के इस मीठे एहसास को महसूस करके काफी खुश थी, अब वो अपने लिए भी जीने लगी थी, हाँ इश्क जीने लगी थी मंदिरी।

"आनंद तो पहले ही डूब चुका था मंदिरी के इश्क में, वो तो बस झट से कमरे में गया और मंदिरी को फ़ोन किया, मंदिरी अभी तक अपने कमरे में नहीं आई थी, वो बस बेसब्री से इंतजार कर रहा था कि कब मंदिरी की मीठी बातें उसके कानों में रस घोल दे, और वो चैन से सो सके।

"उस रात शायद ही दोनों को नींद आने वाली थी, रह-रह के करवटे बदलना और एक दूसरे के एहसास को महसूस करते हुये आंखों से तो नींद कोसो दूर भागने वाली थी।

"अचानक मोबाइल की रिंग बजी, आनंद तो कूद पड़ा मोबाइल पर ही, इंतजार जो नहीं हो रहा था उसे।

"मंदिरी ने बड़ी मीठी आवाज में कहा, हम्म तो आप क्या कहने वाले थे जनाब, जो आपको सुबह तक भी इंतजार नहीं हो रहा, मुझे तो बड़ी नींद आ रही है, कहो न क्या बोलना है।

"आनंद उदास होकर गुस्से में बोला-अच्छा मैं तुम्हारे लिए यहा तड़प रहा हूँ और तुम्हे मेरी जरा सी भी परवाह नहीं है, तुम मुझसे अभी तक प्यार नहीं कर पाई न मंदिरी, पता नहीं कब मेंरे प्यार को समझोगी, मेरे मरने के बाद हैं न।

"मंदिरी, आनंद की बाते सुनकर एकदम से घबरा गई, सासु माँ की वो सारी बाते मंदिरी के सामने घूमने लगी कि कैसे आनंद बचपन मे मौत के मुंह से लौटा है।

"मंदिरी ने एकदम घबराते हुए आनंद से कहा-आनंद तुम ये सब क्या फालतू की बाते कर रहे हो, मैं तो बस मजाक कर रही थी, आनंद की आंखे गुस्से में एकदम लाल हो गयी, पर वो मंदिरी से इतना प्यार करता है कि अपना गुस्सा उस पर उतार ही नहीं सकता था, बस इतना ही कहा आनंद ने कि देखो मंदिरी मैं तुम्हे जान से भी ज्यादा चाहता हूँ और ये तुम्हारा छोटा सा भी मजाक एक दिन मेरी जान ले लेगा।

"मंदिरी ने प्यार से कहा-अरे बाबा आज के बाद कोई मजाक नहीं करूँगी तुमसे पक्का वाला प्रोमिस करती हूं पर तुम भी वादा करो मुझसे की आज के बाद ये मरने वरने की फालतू बाते नहीं करोगे।

"अच्छा बाबा नही बोलूंगा, आनंद ने मुस्कुराते हुए कहा।

"अब चलो जल्दी से कुछ प्यारा सा बोल दो, आनंद ने मंदिरी से कहा, मंदिरी शरमा सी गयी, आनंद को बस उसकी सांसो की आवाज ही सुनाई दे रही थी, मंदिरी का दिल जोरो से धड़क रहा था, आनंद उन धड़कनो को सुनकर उसकी साँसों को महसूस कर रहा था।

"बोलो न मंदिरी कुछ आनंद ने धीरे से कहा,
हम्म क्या बोलू आनंद, तुम कुछ कहने वाले थे न मुझसे, मंदिरी ने बात पलटते हुए कहा

"हम्म बोलना तो है, कल मैं तुमसे मिलने आ रहा हुँ, मैंने तुम्हारे लिए कुछ खास लिया है तीज के लिए, मैं चाहता हु कि कल तुम मुझे सबकुछ पहन के दिखाओ, जो भी मैंने तुम्हारे लिए लिया है, मुझे पता नहीं, क्यों पर तुम्हे कल पूरे सजे- धजे देखने की इक्षा है, क्या तुम मेरी ये ख्वाहिश कल पूरी करोगी मंदिरी?

"मंदिरी बड़ी सोच में पड़ गयी-क्या बात है आनंद, तीज का त्योहार तो कुछ ही दिनों में आने ही वाला है और आपसे सब्र ही नहीं हो रहा जनाब, मंदिरी मुस्कुराने लगी

"पलज़्ज़ न मंदिरी अब मन है तो है, मैं कुछ नहीं जानता कल मैं आ रहा हूँ बस और मुझे तुम्हे उसी रूप में देखना है जैसे मैं सपने में अपनी राजकुमारी को देखता हूँ

"हुह तुम्हारे सपनो की राजकुमारी, अब तो मुझे उस से जलन होने लगी है, मंदिरी ने चिढ़ते हुए कहा, आनंद मंदिरी की बाते सुनकर जोर से हस पड़ा

"क्या बात है, आज गुस्से में तो कोई बहोत ज्यादा ही हसीन लग रहा है ओर कहीं से जलने की भी बु आ रही है, लगता है किसी को हमसे भी अब इश्क हो गया है, मंदिरी आनंद की बाते सुनकर शर्म से लाल हुए जा रही थी, और दोनों की प्यार भरी नोकझोंक से पूरा समां हसीन हो चुका था.

"अच्छा मुझे कोई जलन वलन नहीं ही रही है और कोई इश्क विश्क नहीं है तुमसे, समझ गए न तुम, मंदिरी ने गुस्साते हुए कहा

"अले मेरी राजकुमारी इत्ती गुस्सा हो गयी, तुम मेरी जान हो पता है न तुम्हे मंदिरी, मेरी सांसे बस तुम्हारा ही नाम लेती हैं, इस दिल पर सिर्फ तुम्हारा ही राज है मेरा बस चले तो कमबख्त इन धड़कनो को भी जगह न दूँ इस दिल मे, मंदिरी आनंद की बाते सुनकर मुस्कुरा रही थी

"अच्छा - अच्छा ठीक है, अब मजनू बनने की कोई जरूरत नहीं है, मंदिरी जोर से हस पड़ी

"जाओ अब मैं फ़ोन काट रहा, आनंद गुस्साते हुए बोला,
अरे आनंद सुनो तो, मंदिरी ने बहोत प्यार से कहा,
अब आनंद तो झूठमूठ की ही नाराजगी दिखा रहा था असल मे तो, वो मंदिरी में ही खो जाना चाहता था,

"हा बोलो मैं सुन रहा हुँ, आनंद ने झूठमूठ का गुस्सा दिखाते हुए कहा

"आनंद मैं सब जानती हूं, पता है तुमने मुझे सही मायनों में जीना सीखा दिया है, तुम्हारा मेरे प्रति इतना खयाल, प्यार,इन सब को जब मैंने महसूस किया न, तो मुझे भी तुमसे इश्क हो गया आनंद, नहीं तो ये रूहानी एहसास मुझे कभी छू भी नहीं पाते, तुमने मेरी सारी दुनिया ही बदल दी

"हम्म तो मतलब हमारा जादू तुम पे चल ही गया, इतनी कशिश है हम में, आनंद ने इतराते हुए कहा

"जी जनाब आपका जादू हम पर चल ही गया, और कशिश आप मे नहीं आपके इश्क में है, मंदिरी भी इतराई, और दोनों जोर से हस पड़े...!!!

तेरे इश्क़ के रंग में अब तो सराबोर हो गई मैं,
ऐसी लगन लगी तुमसे की खुद को भूल गयी मैं...!!

क्योंकि यही तो इश्क है..!!©

【क्रमशः】

यही तो इश्क है-१

यही तो इश्क है-२

यही तो इश्क है-३

यही तो इश्क है भाग-४

यही तो इश्क है भाग-५

यही तो इश्क है भाग-६

निशा रावल
छत्तीसगढ़



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