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@dawriter

यही तो इश्क है भाग-५

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nis1985 by  
nis1985

निशा की कलम से.....

【यही तो इश्क है भाग-५】

◆"इश्क के रंग में सराबोर होकर फाइनली मन्दिरी और आनंद माँ के साथ शॉपिंग को निकल पड़े।

"मन्दिरी की सासु माँ ने मन्दिरी की माँ से आज्ञा ली।

""बहन जी आप बिलकुल भी चिंता न करे, शॉपिंग खत्म होते ही हम समय से मन्दिरी को घर छोड़ देँगे,आनंद की माँ ने मन्दिरी की माँ से कहा।

"अरे! इसमे चिंता की क्या बात है, मन्दिरी अब आपकी अमानत है जो मेरे पास है, आप बेफिक्र रहे मन्दिरी की माँ ने आनंद की माँ को आश्वस्त किया।

"आनंद ड्राइव कर रहा था, और माँ बाजू वाली सीट में बैठी थी, मन्दिरी भी पीछे वाली सीट में बैठ गई, आनंद मन्दिरी को महसूस बस कर पा रहा था, उसका मन तो मंदिरी को बार-बार देखने को बेचैन हुआ जा रहा था, दिल भी उसका जोरो से धड़क रहा था,वो ड्राइव तो कर रहा था, पर उसका पूरा ध्यान मन्दिरी की तरफ ही अटका हुआ था।

"मन्दिरी चुपचाप बैठी हुई थी, तभी आनंद ने मन्दिरी का ध्यान अपने तरफ खींचने के लिए बोला।

"क्या माँ आप गाने सुनने में लगी हो, देखो आपकी बहु आपसे डर के कितनी चुपचाप सी बैठी है, आप उसे पूछ तो लो क्या-क्या चाहिए उसे, नहीं तो आप दोनो घंटो लगाएंगी और मैं बहुत बोर हो जाऊंगा।

"माँ ने हँसते हुए कहा, अरे मन्दिरी मुझसे क्यों डरने लगी, मेरी बच्ची, माँ ने पीछे मुड़कर मन्दिरी को देखते हुए पूछा।

""मन्दिरी झीनी सी मुस्कान बिखेरते हुए माँ की तरफ देखने लगी, और बोली, नहीं माँ मेरे लिए आप मेरी मां जैसी हैं, पहली ही मुलाकात में आपने मुझे ये महसूस तक नहीं होने दिया कि आप मेरी सास हैं, नहीं तो मैं न जाने अपको लेकर क्या-क्या सोच रही थी, और मन ही मन डर भी रही थी, सच में आपने मुझे ऐसा माहौल दिया, कि मुझे माँ और सास में फर्क अब तक तो समझ ही नहीं आया।

""आनंद की माँ मन्दिरी की बाते सुनकर भाव विभोर सी हो गई और बड़े प्यार से मन्दिरी के सर पे हाथ फेरा।

""उधर मन्दिरी और माँ बातो में लगी हुई थी और इधर आनंद मन्दिरी की एक झलक पाने के लिए तड़प रहा था, थोड़ी देर पहले भी घर मे जी भर के देखा था आनंद ने मन्दिरी को, पर मन्दिरी के प्यार में पागल आनंद बौरा सा गया था।

""माँ के सामने तो पीछे मुड़ के देखने की हिम्मत नहीं थी आनंद की, इसलिए इसने माँ से नजर चुराकर झट से सामने वाला मिरर मन्दिरी की तरफ सेट कर दीया, ताकी वो मन्दिरी को जी भर के देख सके।

""मन्दिरी और माँ बातो में लगी हई थी, और ये जनाब अपने इश्क का दीदार कर रहे थे, मन्दिरी भी चोर नजरों से अपने इश्क को निहार रही थी,

""हाय!! अब तो ऐसा लग रहा रहा था मानो इश्क की आग दोनो तरफ बराबर लग रही है, मन्दिरी भी जैसे आनंद के इश्क को पूरी तरह से महसूस कर रही थी।

""मंदिरी की सासु माँ ने बातो ही बातो में कहा, मन्दिरी बेटा एक बात कहनी थी।

""हम्म माँ बोलो न क्या बात है।

""देखो अगले महीने ही तीज का त्योहर है, तो मैं चाहती हूँ की तुम भी आनंद के लिए ये व्रत रखो, अब तुम दोनों की सगाई भी हो चुकी है।

""आपकी जैसी इक्षा माँ मन्दिरी ने अपनी सास को हामी भरते हुए कहा।

""और देखो आज जो भी खरीददारी होगी वो तुम्हारी और आनंद की पसन्द से ही होगी, मुझे बीच मे नहीं पड़ना, सबकुछ तुम दोनों की ही पसन्द का होना चाहिए, हा मैं कुछ मदद जरूर कर दूंगी, मन्दिरी की सास ने मुस्कुराते हुए कहा।

""अरे नहीं माँ आपकी पसंद भी शामिल होनी चाहिए, नहीं तो मैं कुछ नहीं लुंगी आज, मंदिरी ने जिद पकड़ ली, एक बहु का अपनी सास से बेटी जैसा व्यवहार और जिद सच मे ये अनुपम दृश्य देखते ही ही बन रहा था आज, इतने करीब आ चुके थे, सास-बहू।

""अगर मंदिरी की नजर से देखे तो, यकीन मानिए, सास-बहू के रिश्ते की महक का एक अलग ही एहसास था, बशर्ते उसे निभाने की चाहत दोनो के दिलो में हो, तो इस रिश्ते की खूबसूरती को चार चांद लग जाएंगे, यकीन मानिए अपनी सास से मिलने के बाद मंदिरी के मन से ये सास नाम का डर और फितूर दूर हो चुका था।

""शॉपिंग मॉल पहुचते ही आनंद ने माँ से कहा।

""माँ आप दोनो जब तक कुछ पसन्द करो मैं बस थोड़ी देर में आया।

""अरे तू कहा चला।

"ओह हो माँ आप कितने सवाल पूछती हो, आता हूँ न, आनंद खीजते हुए चला गया।

""माँ मुस्कुराने लगी।

""अरे माँ आप क्यों मुस्कुरा रही है, मंदिरी ने बड़ी मासुमियत से पूछा।

""कुछ नहीं बेटा ये पगला तीज में तुम्हे कुछ सरप्राइज़ देना चाहता है, मुझे सबकुछ पता है, मैं बस इस पगले को परेशान कर रही थी, देखा तुमने कैसे गुस्से और शर्म से लाल हो रहा था।

""माँ की बाते सुनकर मंदिरी के गाल शर्म से गुलाबी हो गए।

""आनंद तुमसे बहुत प्यार करता है, मन्दिरी और मैं चाहती हूँ, जो कुछ भी आनंद आज तुम्हारे लिए अपनी पसंद से खरीदेगा, झुमके, लहँगा, चूड़ियां और काजल वो तूम जरूर तीज के दिन पहन लेना आनंद की यही मर्जी है और बेटा मेरी भी।

""तुम्हे पता है आनंद तुमसे संकोच में शायद ये बाते नहीं बोलेगा, क्योंकि हमें पता है तुम्हे ये सब उतना पसन्द नहीं है, और वो तुम्हारी खुशी चाहता है, पर उसे क्या मालूम था, कि उसके सपनो की राजकुमारी से ये सच्ची वाली राजकुमारी इतनी अलग होगी, कि फिर भी मेरे बेटे का दिल आ जायेगा इस पर।

""सहसा मन्दिरी की सासु माँ बातो ही बातो में कही खो सी गयी और एकदम से चुप सी हो गयी।

""क्या हुआ माँ, मन्दिरी ने उनके कंधो पे प्यार से हाथ रखते हुए पूछा।

""आंखों से आंसू बह रहे थे माँ के, आंसू पोछते हुए माँ ने बोला, बहुत लाड़ प्यार से पाला है मैंने आनंद को, आज तक कोई कमी नहीं होने दी, सारी इक्षा पूरी की इसकी, बस यही चाहती हूं, कि दुनिया की सारी खुशियाँ मीले मेरे बच्चे को।

""बचपन का एक बहुत ही भयानक हादसा जिसमे शायद आनंद की जान भी जा सकती थी, उस हादसे को जब भी याद करती हूं मेरी रूह कांप जाती है, मेरा एक ही तो बेटा है और भगवान न करे उसे कुछ भी हो।

""इतना कहते हुए आनंद की माँ का गला एकदम से रुदन से भर उठा अब तो आवाज भी नहीं निकल पा रही थी और शब्द भी लड़खड़ा रहे थे, शायद वो आनंद के बचपन का हादसा इतना ज्यादा भयावह था, कि उसे याद करते ही माँ की रूह कांप उठी।

""मंदिरी ने माँ की हालत देखते हुए उन्हें झट से बिठाया और पानी पिलाया।

""माँ का हाथ अपने हाथों में लेकर मंदिरी ने कहा, माँ आप बिलकुल भी चिंता न करे, मैं आज आपसे वादा करती हूं, कि आपके बेटे का जिंदगी भर खयाल रखूंगी, उन्हें इतना प्यार दूंगी की, उन्हें कभी किसी भी तकलीफ का एहसास तक नहीं होने दूंगी, और माँ उनका अपने लिए इतना प्यार देख के सच कहु, मुझे भी आज उनसे बहुत प्यार हो गया है, शायद उनसे भी कही ज्यादा, पर मैं उनसे इजहार नहीं कर पा रही, पता नही क्यों????

""मंदिरी की ऐसी बाते सुनकर माँ ने उसे झट से अपने गले से लगा लिया।

""सच मेरे बेटे की पसंद पे नाज है आज मुझको, और माँ ने मंदिरी का माथा चुम लिया...!!!

""जरूरी ये नहीं की, प्यार पाने के लिए
बहू को बेटी और सास को माँ ही बनना पड़े
अगर दिलो में चाहत हो, रिश्ते निभाने की तो
बहू, बस बहूऔर सास सिर्फ सास बनकर ही
एक दूसरे का दिल जीतते चले....!!!

क्योंकि यही तो इश्क है...!!!©
【क्रमशः】
निशा रावल
बिलासपुर

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यही तो इश्क है-२

यही तो इश्क है-३

यही तो इश्क है भाग-४



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