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@dawriter

यही तो इश्क है भाग-४

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nis1985 by  
nis1985

निशा की कलम से.....
【यही तो इश्क है भाग-४】

""शादी की तैयारियाँ जोरो पे चल रही थी,आनंद और मंदिरी के घर पे ,,,समय पंख लगा के ऐसे बीत रहा था कि किसी को पता ही नही चल रहा था।

बाप रे!!! सांस लेने की भी फुरसत नही थी किसी को भी।

"लेकिन इस आपाधापी और व्यस्तता में भी किसी का इश्क बहोत जोरो की सांसे ले रहा था।

"उफ्फ्फ!!आनंद का दिल तो 5g की स्पीड से धड़क रहा था।

""उधर मंदिरी को भी थोड़ी घबराहट हो रही थी कि नए घर मे ठीक से एडजस्ट हो पाएगी की नही, और सबकी कसौटी पे खरी उतर पाएगी की नही?"बस मंदिरी को यही चिंता खाये जा रही थी।

"मंदिरी की सासु मां एकदम स्टाइलिश सासु माँ जो थी, एकदम आधुनिक लेकिन बहुत ही प्यारी, जीवन मे हर पल का आनंद लेना उन्हें भलीभांति आता था, सजना सवरना उन्हें बहुत अच्छा लगता था,और मंदिरी उनके बिल्कुल विपरीत थी एकदम सादी सी फैशन से उसका दूर-दूर तक कोई भी वास्ता नही था,इसके बावजूद आनंद की माँ ने आनंद की पंसद चुनी, अपने बेटे को बहुत ज्यादा प्यार जो करती थी!!

"" मंदिरी की सासु मां का यही मानना था ,कि मंदिरी जब बहु बन के उनके घर पे आएगी तो कुछ हम मंदिरी के अनुरूप ढल जाएंगे कुछ मंदिरी हमारे अनुरूप,और यही तो जीवन है, क्योंकि ताली दोनो हाथो से बजती है,जब कोई आपसे इतना प्यार करता है, और आपकी खुशियो के लिए आपके अनुरूप होने की कोशिश करता है ,तो फर्ज तो यही बनता है कि हम भी उसके उस प्यार को महसूस करे,उसकी भावनाओं को समझे,दो पहियो से ही तो प्यार और समर्पण की गाड़ी चल पाएगी,नही तो बोझ के सिवा ये रिश्ता कुछ भी नही होगा जो आपको ढोना पड़े।

""इतने आजाद और अच्छे ख़यालातो की थी, मंदिरी की सास, मंदिरी सच मे किस्मत वाली है।

""सुबह होते ही आनंद की मां आनंद के पास गई, आनंद आफिस के काम मे व्यस्त था,,, बेटा आनंद।

""हम्म मां बोलो, आनंद ने अपनी फ़ाइल पलटते हुए बिना मां की तरफ देखे ही बोला।

""अरे बेटा थोड़ा काम छोड़कर मेरी बात तो सुन।

""हा मां बोलो न क्या बात है,आप इतनी हड़बड़ी में क्यों हो।

""अरे पगले तू सुनेगा तो तू भी हड़बड़ा जाएगा।

""ह्म्म्म ऐसा क्या हो गया मां, कही वो मिसेज शर्मा इस बार किटी पार्टी में आपसे ज्यादा सूंदर साड़ी तो नही पहन के अ गयी न, इसलिए आप इतना बेचैन हो रही है
आनंद ने हँसते हुए अपनी मां से कहा।

""अच्छा सुबह -सुबह तुझे मां ही मिली है मजाक करने को आनद के कान पकड़ते हुए मां ने कहा।

""अरेरेरे, मां माफ भी कर दो अच्छा चलो बोल भी दो।

""आनंद सुन, आज हमे मंदिरी के लिये शॉपिंग करने जाना है, ज्वेलरी और कपड़ो की, तो तू भी साथ चलेगा।,

""अरे मां पर मैं जाके क्या करूँगा मुझे आज बहोत काम है, और ये औरतो का मुझे कुछ भी समझ मे नही आता इतना टाइम लगाती है शॉपिंग में की पूछो ही मत।

""आनंद की मां घूरने लगी आनंद को।

""ऐसे क्या घूर रही हो मां, सब जानता हूं अब मेरी जगह मंदिरी ने ले ली है, सारा प्यार अब उसी को करो आप आनंद ने ठिठोली करते हुए बोला।

""कितना नोटंकी है रे तू आनंद सच मे, मां हसने लगी
मुझे सब पता है, उस दिन तेरी अलमारी साफ करते-करते मुझे सबकुछ दिख गया।

"" क्या, दिख गया मां आनंद ने हड़बड़ाते हुए पूछा,,,

""अरे बाबा तू इतना घबरा क्यू रहा है,,
मुझे तेरी अलमारी में मंदिरी की तस्वीर और उसके लिए जो भी तूने लिया है, वो सारे उपहार मिले।

""आनंद थोड़ा शरमा गया।

""अरे मां वो तो बस ऐसे ही।

""हम्म्म्म बहुत अच्छी पसन्द है तेरी चूड़ियां, झुमके, बिंदी।
क्या डिज़ाइन है झुमकों की।

""मुझे तो पता ही नही था कि मेरे आनंद को ये सब भी आता है।

""क्या माँ आप भी, आनंद शरमा रहा था, माँ के सामने।

""अच्छा चल तू शर्माना छोड़ और, मंदिरी को भी बता दे कि उसे भी हमारे साथ चलना है,मैंने उनकी माँ से बात कर ली है और आज्ञा भी ले ली है।

""ये सुन के तो आनंद खुशी के मारे उछल पड़ा
हुरर्रे,,आप दुनिया की सबसे अच्छी मां हो।

""आनंद को इतना खुश देख के उसकी मां मन ही मन ही मन बस ईश्वर से यही प्रार्थना कर रही थी,कि नजर न लगे मेरे बेटे को किसी की।

""थोड़ी देर में ही मंदिरी के मोबाईल में कॉल आया
हेलो मंदिरी,,तुम तैयार हो न शॉपिंग पे जाना हैं हमारे साथ।

""ह्म्म्म,, माँ ने बताया मुझे मंदिरी ने कहा।

""आज तो जलवे ह मंदिरी तुम्हारे,मेरी माँ तुम्हारे लिए शॉपिंग करेंगी,,,आनन्द ने मजाक करते हुए कहा,,
और सुनो मंदिरी माथे पे एक बिंदी जरूर लगाना,,,,कसम से तुम पूरी चांद लगती हो,और हाँ लाल रँग तुम्हारे गोरे रंग में बहुत जंचता है,तो हो सके तो क्या मेरे लिए तुम आज???

""आनंद ने उम्मीद भरे स्वर में पूछा।

हम्म, मन्दिरी ने हामी भर दी।

""मंदिरी की मां ने तो रात को ही डांट लगाई थी मंदिरी को ,की मंदिरी तू अब थोड़ा सजना सवरना शुरू कर दे,तेरी सासु को भी ये सब पसन्द है, और आनंद को भी।

""ह्म्म्म माँ तुम तो जानती हो मैने ये सब कभी किया नही, पर कोशिश करती हूं।

""देख धीरे से सब हो जायेगा मंदिरी,मा ने मंदिरी को समझाया।

""उधर आनंद और उसकी मां मंदिरी को ले जाने आ रहे थे,और इधर आनंद का दिल जोरो से धड़क रहा था, और उधर मंदिरी भी थोड़ा घबरा रही थी ,सासु मां को सोच के।

""आनंद की मां तो मंदिरी को साथ इसलिऐ भी ले जा रही थी,की मंदिरी अपनी सास के साथ थोड़ी सहज हो जाये।

""बस मंदिरी की माँ ने अपनी समधन का स्वागत और सत्कार किया।

""बस बहनजी हमे चलना चाहिए अब,ढेरो शॉपिंग करनी है आप कृपया मंदिरी को जल्दी से बुला लाये,मंदिरी की सास ने आग्रह किया।

""मंदिरी,,,ओ,,मंदिरी,माँ ने आवाज लगाई।

""जी माँ,, बस अभी आयी, मंदिरी ने बड़े धीमे और मीठे स्वर में कहा।

!""हाय!!!, मंदिरी की आवाज सुनकर तो आनंद बेसुध सा हो गया, फिर से वही इश्क़ वाली घण्टी बजने लगी आनंद के दिल मे।

""मंदिरी धीरे से आई और सासु माँ के पैर छुए।
सच कहूं तो कसम से बहुत ज्यादा सुन्दर लग रही थी मंदिरी आज, एकदम स्वर्ग की अफसरा।

""आनंद को तो मंदिरी को देखते ही ४४०वोल्ट का झटका लग गया।

""लाल सलवार कुर्ती,आँखों में काजल,माथे पे बिंदी और कानों में झुमका, कसम से मंदिरी आज तो गजब की लग रही थी,उधर मंदिरी की सासु माँ को तो गुमान सा हो गया अपनी की खूबसूरती देखकर।

""और वो मंदिरी के झुमके का बार-बार उसके बालों में उलझना और परेशान होके बार-बार मंदिरी का अपनी जुल्फों से झुमके को आजाद कराना, उफ्फ्फ, आनंद की धड़कने रुक सी जा रही थी ,इस हसीन पल को देख के, आनंद को ,तो ऐसा लग रहा था मानो ये पल बस यही पे ठहर जाए।

""आनंद बस मंदिरी को अपलक ही देखे जा रहा था और मंदिरी नजरें झुकाये बैठी थी चुपचाप।

""मन्दिरी को ये एहसास हो रहा था, कि आनन्द सिर्फ उसे ही देख रहा है।

""सहसा ही मन्दिरी की नजरें आनंद से जा मिली, मन्दिरी शर्म से लाल हो गयी,अब तो ऎसा लगने लगा कि मन्दिरी को भी आनन्द के इश्क ने स्पर्श कर ही लिया।

मन्दिरी भी अब चोर नजरों से देखने लगी आनंद को, लेकिन अभी इजहारे मोह्हबत बाक़ी था।

क्योंकि यही तो इश्क है!!!

"इजहारे इश्क का इंतज़ार, अब सहा न जाए,
कि तुझे महसूस करके,दूर तुझसे रहा न जाये...!!!!!©

【क्रमशः】

यही तो इश्क है-१

यही तो इश्क है-२

यही तो इश्क है-३

यही तो इश्क है भाग-५

निशा रावल
बिलासपुर



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