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@dawriter

यही तो इश्क है भाग-१०

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nis1985 by  
nis1985

निशा की कलम से--
【यही तो इश्क है भाग-१०】

उस मनहूस घड़ी को याद करते हुए आनंद की माँ और पिताजी की आंखे आँसुओ के दरिया से सराबोर हो गयी, और आँसुओ की वजह से धुंधली भी, एक दूसरे की हालत वो देख भी नहीं पा रहे थे, बस उन आँसुओ की बूंदों से वेे उस मनहूस पल को महसूस बस कर पा रहे थे।

अगली सुबह आनंद अपने कलीग के साथ ही आफिस निकल गया, आनंद आज कुछ ज्यादा ही खुश था, एक तो उसने ऑफिस का सारा काम निपटा लिया था दूसरा वो हसीन शाम, हाय! उस शाम का ख्याल आते ही उसे गुदगुदी सी हो रही थी, क्योंकि आज उसकी हसीन शाम मंदिरी के दीदार से और भी ज्यादा हसीन होने वाली थी, बस फिर क्या आज तो जनाब के मिजाज सातवें आसमान पर थे,और सच बात तो ये है,कि आज ऑफिस में टाइम काटना बहुत मुश्किल होने वाला था, बॉस का सारा काम जो निपटा दिया था, आनंद का पूरा ध्यान तो बस अपनी मंदिरी को एक बार पूरे साज श्रृंगार में देखने मे ही अटका हुआ था, जैसे तैसे उसने ऑफिस का आज का दिन काटा।

शाम होते ही आनंद सबसे पहले तो अपने घर गया, जाते ही अपनी माँ को गले से लगा लिया और जोर से चिल्लाया माँ मेरी प्यारी माँ।

ओह हो क्या बात है आज मेरा बेटा बहुत ज्यादा खुश दिख रहा है, बस ऐसे ही खुश रहा कर बेटा, तेरी ख़ुशियों को किसी की भी नजर न लगे माँ ने आनंद का माथा चूमते हुए कहा।

हा माँ आज मैं बहुत ज्यादा खुश हूँ, ऑफिस का सारा काम निपटा डाला और बॉस ने लम्बी छुट्टी भी दे दी, अब शादी में कोई टेंसन नही माँ इसलिए इतना खुश हूं।

हम्म ये बात तो सुबह ही तूने मुझे फ़ोन में बता दी थी, लेकिन तेरी खुशी मे तो कोई और ही बात छुपी है, बता क्या बात है माँ ने आनंद के कान खींचते हुए कहा।

अरे,अरे माँ प्लीज छोड़ दो, मुझे मंदिरी से मिलने जाना है और क्यों जाना है वो सीक्रेट है प्लीज आप अब वो सब मत पूछना।

अच्छा बेटा अब माँ से छुपायेगा, अच्छा चल नही पूछुंगी माँ ने हंसते हुए कहा।

क्या माँ आप न मेरी ही टांग खींचने में लगी रहती हो, आनंद ने शरमाते हुए कहा !

अच्छा चल ज्यादा शरमा मत और एकदम हीरो जैसा तयार हो जा, मंदिरी को इम्प्रेस करना है न तुझे माँ ने आनंद से ठिठोली करते हुए कहा,,!

क्या माँ आप भी न, अच्छा अब जाने दो नहीं तो लेट हो जाऊंगा, बस आनंद तुरन्त भागता हुआ अपने कमरे में चला गया तैयार होने!

आनंद की बेकरारी बढ़ती ही जा रही थी, अब तो उसका दिल इसी उलझन में फसा हुआ था कि, आज तो उसे सबसे अच्छा दिखना है,बस फिर क्या एक के बाद एक शर्ट अपने उपर लगाता, आईने में खुद को निहारता फिर बेड पर फेंक देता, ऐसा करते करते उसने १०-१५शर्ट बेड पर फेंक डाली, ऐसा होता है जब हम अपने सबसे खास से मिलने जाने वाले होते हैं, खासकर जब वो हमारा प्यार हो तो ऐसा लगता है जैसे उसकी नजर बस हम पर ही टिक जाए।

जैसे-तैसे आनंद को एक शर्ट पसंद आई, वो जल्दी से तैयार हो गया मस्त सी परफ्यूम लगाई एकदम हीरो जैसा लग रहा था आनंद, माँ ने आनंद को देखते ही बोला कि किसी की नजर न लगे मेरे बच्चे को, बहुत ही प्यारा लग रहा है, आनंद ने मा के पैर छुए, उनको गले से लगाया और खुशी-खुशी निकल गया मंदिरी से मिलने।

उधर मंदिरी का दिल भी बहोत जोरो से धड़क रहा था, काफी सोच में डूबी हुई थी, एक तो उसने कभी ऐसा श्रृंगार किसी के लिए किया नहीं था, आज पहली बार आनंद की खुशी के लिए ,जिसमे अब उसकी खुशी भी बराबर शामिल हो चुकी थी, सजने संवरने जा रही थी, बहुत प्यार करने लगी थी अब मंदिरी आनंद से, उसके साथ, उसके प्यार के गहराइयों में डूब कर अब उसने अपने सुखद भविष्य के सपने संजो लिए थे, जिस चीज को उसने कभी महसूस नहीं किया और न ही वो करना चाहती थी,आज आनंद ने उसकी जिंदगी में आकर सारी खुशियां ला दी थी, उसने कभी सोचा ही नही था कि ये इश्क का एहसास इतना खूबसूरत भी होता है कि इंसान के अंदर तक इसकी खूबसूरती झलकने लगती है,दर्पण के सामने खड़ी मंदिरी बस यही सोच रही थी।

हां आनंद तुम्हारे इश्क ने मुझे बदल दिया है, मुझे जो चीज पहले कभी अच्छी नहीं लगती थी, वो भी अब अच्छी लगने लगी है, हां मुझे दर्पण में खुद को निहारना अच्छा लगने लगा है, हां मुझे पल-पल बिना बात के मुस्कुराना अच्छा लगने लगा है, हां मुझे अब श्रंगार करना भी अच्छा लगने लगा है, मुझे तुम्हारी बिंदिया, चूड़ी, झुमके, काजल सब कुछ भाने लगे हैं, हां मैं पूरी तरह से बदल गयी हूँ आनंद और शायद तुम्हारे बिना अब मैं जी भी नहीं पाऊं, बस इन्ही ख़यालो में खोई हुई मंदिरी कब तैयार हो गयी उसे पता भी न चला, दर्पण में खुद को निहारती हुई आज मंदिरी खूब मुस्कुरा रही थी, बहुत खूबसूरत लग रही थी मंदिरी, उसे खुद को देख यकीन भी नही हो रहा था ये वही मंदिरी है पहले वाली ,सच मे आज अपने प्यार के लिए कितना बदल गयी है।

बस अब वो आनंद के इंतजार में पलके बिछाय बैठी थी कि कब वो आये वो अपने कमरे से बाहर नहीं निकलना चाह रही थी, वो चाहती थी कि सबसे पहले आनंद उसे देखे, माँ ने आवाज लगाई, मंदिरी इतना समय क्यों लग रहा है तुम्हे तैयार होने में कब से कमरे के अंदर हो जल्दी करो।

अरे माँ आप आप तो जानती हो ये सब श्रंगार मुझसे नहीं होता, पहली बार है मेरे लिए, तो थोड़ा टाइम तो लगेगा मंदिरी ने माँ से झूठ बोलते हुए कहा क्योंकि वो चाहती थी आनंद ही उसे सबसे पहले देखे।

अचानक डोर बेल बजी,मंदिरी की माँ ने दरवाजा खोला, देखा तो आनंद आया हुआ था, आनंद ने भी चरण स्पर्श किये और माँ ने सत्कार सहित अपने होने वाले दामाद को बिठाया, आनंद की निगाहे पूरे घर मे सिर्फ मंदिरी को ही तालाश रही थी, उसे तो होश भी नहीं था कि उसके सामने चाय नाश्ता रखा हुआ है।

अरे बेटा ये क्या चाय तो ठंडी हो गयी नाश्ता भी नहीं किया तुमने, मंदिरी की माँ ने आनंद से पूछा

जी-जी माँ आनंद ने हड़बड़ाते हुए कहा

अरे बेटा मैंने तुम्हें चाय के लिए पूछा, शायद तुम्हारा ध्यान नहीं है, मंदिरी की माँ मुस्कुराने लगी वो भांप गयी कि आनंद सिर्फ मंदिरी को देखना चाहता है, माँ ने कहा अच्छा बेटा मैं मंदिरी को बुलाकर लाती हूँ, अब तो आनंद का चेहरा चमक उठा खुशी के मारे और उधर मंदिरी भी बेकरार बैठी थी...!!

तेरे इंतजार में पलकें बिछाय बैठी हूँ,
तू बस एक नजर देखे,और मैं निखर जाऊं....!
ये बिंदिया,झुमका और कँगना सजाये बैठी हूँ,
तू बस एक नजर देखे,और मैं निखर जाऊं....!!©

क्योंकि यही तो इश्क है...!!

【क्रमशः】

यही तो इश्क है-१

यही तो इश्क है-२

यही तो इश्क है-३

यही तो इश्क है भाग-४

यही तो इश्क है भाग-५

यही तो इश्क है भाग-६

यही तो इश्क है भाग-७

यही तो इश्क है भाग-८

यही तो इश्क है भाग-९

निशा रावल
बिलासपुर, छत्तीसगढ़



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