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@dawriter

बहन जी टाइप

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शशि सरल और खुश मिजाज लड़की थी पर वो थोड़ी इंट्रोवर्ल्ड थी और निशी उसकी सगी बहन बेहद मॉडर्न, फ्रैंक और बोल्ड...! कहने को दोनो जुड़वा थी मगर चेहरे को छोड़ दोनो में कुछ भी एक जैसा न था। व्यवहार विचार और कार्यशैली बेहद भिन्न...! 

दोनो के चेहरे एक से थे ,अमूमन लोग कंफ्यूज हो जाते थे...किन्तु 10 मिनट बात करने पे ही समझ आ जाता कि, शशि कौन है और निशी कौन..? रंग रूप वेशभूषा अधिकतर एक सी ही रहती...किन्तु शशि बालों को साधारण रूप से संवार लेती और निशि स्टाइल क्वीन की तरह , बालो में बीस तरह की क्लिप लगा कर...सोचती कि, शशि से भिन्न दिखूं ...! इन प्रयासों में वह बेशक शशि से भिन्न दिखती किन्तु सौम्यता शशि में ही थी..। सरलता अपनी पहचान बना ही लेती है..फलतः शशि भी धीरे धीरे पूरे समाज मे अपनी साफ सुथरी छवि और सौम्य व्यवहार हेतु पहचानी जाने लगी..। वहीं निशि फ्रैंक और मॉडर्न होने के कारण ,आधुनिक लोगों में सराही जाती..। दोनो की अलग अलग पहचान थी..घर मे कोई फंक्शन होता तो शशि किचेन सम्हालती और निशि मार्केट..! उनकी माँ आशा तो अपनी दोनों ही पुत्रियों को लेकर प्रसन्न थी कि दोनों ने बखूबी घर व बाहर सम्हाल रखा है। निशि अपनी आगे की पढ़ाई हेतु विदेश जाना चाहती थी..सो उसने माँ और बहन से विदा ली। 

समय बीत रहा था..शशि के गृहकार्य दक्षता और सौम्य व्यवहार को देख बहुत से रिश्ते आने लगे..उपयुक्त घर वर देख आशा ने उसका विवाह करा दिया..निशि उसके विवाह में शामिल न हो पाई ! इधर शशि अपने ससुराल आ गयी..एक दो माह तक तो सब कुछ ठीक रहा..शशि की उसके ससुराल में सभी बहुत इज़्ज़त करते थे..किन्तु उसके पति वरुण को धीरे धीरे शशि का ये अति साधारण रहन सहन वेशभूषा और आचरण ..खराब लगने लगा। उसे आफिस मीटिंग और दोस्तों के फैमिली पार्टीज में अक्सर शशि को ले जाना पड़ता ..जहां शशि थोड़ा असहज हो जाती.. इन बातों के कारण अक्सर वरुण और शशि में झगड़ा होने लगा..! एक बार उसके फ्रेंड ने शशि को ड्रिंक व डांस आफर किया तो शशि ने ठुकरा दिया जो वरुण के मित्र को बुरा लगा..! हाई सोसाइटी की लाइफ स्टाइल के हिसाब से शशि को पिछड़ी ही कहा जायेगा ..गैर मर्द ,और शराब उसे बेहद परेशान करने वाली चीज़े होती फलतः शशि ऐसी पार्टीज से डरने लगी..कभी जाती भी तो चुपचाप बैठी ही रहती.. दूसरी तरफ वरुण को शशि को हर जगह ले जाने में शर्मिंदगी महसूस होती ..!जहां दोस्तो की बीवियां, बेहतरीन हेयर स्टाइल में गाउन और मॉडर्न मिनी ड्रेसेज पहन कर आराम से चियर्स करती वही शशि 70 के दशक की हेरोइन की तरह साड़ी और बड़े से जूड़े के साथ ही हर जगह जाती ..हैलो हाय की जगह किसी भी को अभिवादन में हाथ जोड़ कर नमस्ते कर लेती..!

घर लौट कर वरुण और शशि का झगड़ा होता ..और वरुण के भीतर शशि को लेकर शर्मिंदगी और शशि के भीतर अपना खत्म होता आत्म विश्वास ...दोनो के बीच के प्रेम तत्व को मार डालने के लिए काफी थे। वरुण और शशि अलग अलग बिस्तर पर सोते..वरुण तकिया लेकर सोफे पर और शशि बेड पर।

दोनो के बीच के तनाव को वरुण के मम्मी पापा महसूस करते..सास ने शशि को समझाया कि," बेटा जैसे वरुण चाहता है वैसे ही रहा कर, थोड़ा सा खुल के सबसे मिलो..! बातें करो..! ये बिज़नेस मीटिंग्स ऐसी ही होती हैं पर तुम अगर कोशिश करोगी तो एडजस्ट कर लोगी खुद को..." उस रात शशि ने बहुत सोचा...कि, क्या जिंदगी है ये ,जो मैं हूँ, वो किसी को नही चाहिए और जो नही हूं जब वैसी बनूंगी तब वरुण के टाइप की हो सकूंगी..उसने कोशिश भी की ,नए कपड़े और हेयर स्टाइल ट्राई किये...। पर वरुण ने उसे देख के मुह बिचका दिया ...रोज़ यही होता , वो प्रयास करती और प्रयास रोज़ निष्फल होता ...! अब तो वरुण उसे अक्सर सुना देता ..क्यों 'बहन जी' आज किस ड्रेस की बलि चढ़ानी है ? शशि चिढ़ जाती ...कभी ,मॉर्डन ड्रेसेस पहनते देख के उसे हिकारत से देखता है कि.." हुह' ये ड्रेस , ये पेंसिल हील और तुम ?? चल पाओगी ढंग से इसे पहनकर? जाने दो तुमपे वो बहन जी वाला जुड़ा और 6 फ़ीट की साड़ी ही ठीक लगेगी ?"..और शशि तिलमिला जाती, उसे लगता इतना उपहास !! क्या सादगी को "बहनजी" कहकर अपमानित करना जरूरी है कल तक जो सादगी उसकी पहचान थी आज वही उसकी कमजोरी है...इतना अधिक कमजोर उसने खुद को कभी महसूस न किया..! धीरे धीरे शशि अवसादग्रस्त हो गयी..! बीमार रहने लगी ...! वरुण की माँ ने उसकी ये हालत देख उसे मायके जाने की सलाह दी..! 

शशि अपने मायके आयी, यहां भी गुमसुम ही रहती..किसी से उसने अपना गम न बांटा..! एक दिन निशि को देखने लड़के वाले आये..उसके मॉडर्न रूप श्रृंगार को देख सबने पसंद भी कर लिया, शाम को फ़ोन आया और उसकी भावी सास ने इस शर्त के साथ विवाह की हामी भरी की कि, निशि को पहनावा बदलना होगा ,यहां जीन्स टी शर्ट नही साड़ी पहननी पड़ेगी। निशि ने तुरंत प्रस्ताव ठुकरा दिया। आशा चिंतित हो उठी..इस बात पर शशि ने अपनी चुप्पी तोड़ी.." माँ जो निशि को पसंद हो वही करने दो! आखिर मुझे ही देख लो..' कहते हुए माँ को वरुण की मॉर्डन सोच और उसके बहन जी वाले ठप्पे का सम्पूर्ण वृत्तांत सुनाया और खूब रोयीं। सब कुछ सुनकर निशि उठ खड़ी हुई...! उसने शशि के संग मिल एक योजना बनाई।

अगले दिन सुबह निशि ,शशि बनकर उसके ससुराल गयी, चूंकि चेहरा बिल्कुल एक जैसा था अतः कोई पहचान न सका..! आधुनिक वस्त्रों में सजी धजी, चश्मा लगाए , होंठो में सुर्ख लाल रंग की लिपिस्टिक और लंबे नाखूनो पर नेलपेंट  हील की सैंडल और तंग कसी जीन्स को देख कोई नही कह सकता था कि, वह पुरानी शशि है। सासू माँ उसे देखकर आश्चर्यचकित रह गयी..! उसने भी शशि की तरह झुक कर पांव नही छुए अपितु " हाय मम्मी जी" कहकर गले ही लिपट गयी ..सास घबरा गयी , किन्तु खुश भी हुई " अरे बेटा ये क्या? तूने तो काया कल्प ही कर लिया! .." 

"हां मम्मी जी एक्चुअली वरुण मुझे ऐसे ही तो देखना चाहते थे ना !"...

हाँ हाँ समझ गयी...! अच्छा ही किया तूने! ...कहकर सास उसे भीतर ले गयीं। 

शाम को वरुण आया , तो शशि(निशि) को देख दंग रह गया! उसने गुस्से में होने के कारण और पिछले झगड़ों के कारण उससे ढंग से बात न की थी अतः कुछ औपचारिक रूप से भी न कह सकता था। शाम को दोनो कक्ष में गए, निशि ने बिस्तर लगा कर दूसरा तकिया स्वतः सोफे पर फेंक दिया। वरुण को उसकी ये हरकत अच्छी न लगी। पर चिढ़ के भी उसने कुछ न कहा। दो दिन बीत गए। तीसरे दिन वरुण की माँ ने एक पार्टी रखी, सोच कर की, इस बार शायद शशि के बदले स्वरूप से वरुण का ध्यान उसकी ओर खिंचे..! निशि ने वरुण को सबक सिखाने की ठान ली थी, उसने पार्टी से सम्बंधित कोई तैयारी नही की ,सिर्फ अपने साज श्रृंगार में व्यस्त रही । शाम को वरुण और उसकी माँ लौट कर आये तो घर अस्त व्यस्त ,किचेन शांत । किसी भी प्रकार की कोई तैयारी नही..! दोनो माँ बेटे दंग रह गए। उन्होंने बौखला कर शशि को आवाज़ लगायी..! शशि मैरून कलर के गाउन में चमचमाता हीरे का सेट पहन, विक्टोरिया स्टाइल में बाहर आयी।  सास ने ऊपर से नीचे देख कर गुस्से लाल पीले होते हुए कहा " वाह बहू वाह ! अपनी साज सज्जा तो अच्छी की है किंतु, घर की हालत देखो ! " इस गंदे घर मे आएंगे मेहमान ? और खाएंगे क्या? तुमने तो कोई तैयारी नही की? वरुण ने भी आग बबूला होके उसे देखा..।

" तो क्या ये सब कुछ मैं करती? अगर मैं सफाई और खाना पकाने के काम करती ,तो मेरी स्किन का क्या होता, टैनिंग हो जाती,रैशेज पड़ जाते धूल और गर्मी से। अरे वो दिन गए जब मैं 'बहनजी' टाइप हुआ करती थी..! अब आप लोगों को वैसी बैकवर्ड बहू नही चाहिए ना ! जो ये सब करके साड़ी लपेट के खड़ी हो जाये..!! " निशि ने नेलपेंट लगे ,नाखूनों पर फूंक मारते हुए कहा। 

उससे बहस न कर,वरुण ने जल्दी जल्दी नौकर बुला कर साफ सफाई का काम शुरू करवाया, और खाने की व्यवस्था के लिए होटल से आर्डर किया, निशि अपनी पहली सफलता और उनकी तिलमिलाहट से बहुत खुश थी ।

मेहमान आ गए, पार्टी शुरू हुई, निशि ने ड्रिंक लिया और बिंदास होकर सभी पुरुषों के साथ डांस भी किया..! कल तक जो शशि आंख उठा कर नमस्ते नही करती थी और उसके इस व्यवहार को वरुण बहनजी टाइप कहा करता था वही आज वरुण के मित्रों के बीच बैठ एन्जॉय कर रही थी। वरुण शर्म से कटा जा रहा था पत्नी की इस बेशर्मी की वजह वो खुद ही था इसलिए कुछ कह भी नही सकता..! सास की मित्र मंडली ने शशि के इस रूप और व्यवहार की खूब आलोचना की। जो कल तक संस्कारी बहु के आने पर जलन के मारे कुढ़ते थे वे ही अब तो हर जगह शशि के इस रूप को चटखारे लेकर वर्णन करेंगे। आज वरुण को एहसास हो रहा था शायद की जिस रूप को वह बहन जी कह कर अपमानित करता था, वो कितना सौम्य और आदर्श था..! किन्तु अब क्या हो सकता था।  पार्टी खत्म हुई..सभी अपने अपने घर चले गए। 

वरुण की आंखों में नींद न थी, निशि नशे के कारण सो रही थी..! वरुण ने आखों ही आंखों में रात काट दी। भोर की किरण ने कमरे में प्रवेश किया तेज़ रोशनी से निशि की आंख खुली, उसने वरुण को सोते हुए देखा..और अपने बगल पड़े एक कागज को देखा, जिस पर कुछ लिखा हुआ था।

 "सॉरी ...मुझे पहले वाली शशि ही चाहिए , मुझे प्लीज माफ कर दो!! मैं आधुनिकता की सोच में अंधा हो गया था..बीवी को प्रदर्शन की वस्तु मानने लगा था, कल तुमने मेरी आँखें खोल दी। हो सके तो मेरी पहले जैसी सरल,और सौम्य पत्नी चाहिए मुझे।...- तुम्हारा वरुण " पत्र पढ़ कर निशि प्रसन्न हो गयी और तुरंत फ़ोन कर शशि को आने के लिए कहा। शशि माँ के साथ अपने ससुराल के लिए निकली..! सासू माँ ने दरवाजा खोला तो हतप्रभ रह गयी, शशि को देख!! वही सलीकेदार साड़ी, वही जूड़ा और आंखों में वही सरलभाव, जब झुक कर शशि ने पांव छुए तो सासू माँ ने उसे गले से लगा लिया..! 

सारा माजरा समझकर दोनो के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा "जाओ अब वरुण को भी बता दो.."

कमरे में पेट के बल सोए वरुण को सोता देख, शशि ने प्यार से कहा ." अरे अब क्या सोते ही रहोगे..! उठो आफिस नही जाना क्या? " वरुण ने शशि को पुराने रूप में देख हैरत से कहा.." तो क्या तुमने मुझे माफ़ कर दिया? " 

"नही माफ तो आप हमें करोगे...सच्चाई जानने के बाद"....पीछे खड़ी निशि ने हंसकर कहा..! और अपनी पूरी बात उसे बताई..!

वरुण ने पलटकर आश्चर्य से देखा और उसकी सारी बातों को ध्यान पूर्वक सुनने के बाद कहा "ओह्ह तो ये बात है, डबलरोल !! सीता और गीता!! तभी तो मैं कहूँ कि, बहनजी लगने वाली शशि अचानक इतनी मॉर्डन कैसे बन गयी..! 

फिर से बहनजी बोला?? शशि ने बनावटी गुस्से से कहा। 

नही शशि! इस बार मज़ाक नही करूँगा ,मुझे सच मे माफ कर दो मैं बाहरी चकाचौंध में भटक गया था..घर की रौनक उसकी गृहलक्ष्मी से ही होती है, ये बाहरी रूप रंग ढंग तो बस दिखावा है, गुणों के बिना हर स्त्री खोखली है,मुझे तो मेरी सीता ही चाहिए ,मेरी शशि, और कोई नही.."

तोफिर जीजाजी आपने अपनी गीता को यानी मुझे माफ़ किया ना? आप नाराज तो नही है हमसे!! " निशि ने इठलाकर कहा।

अरे नही नही मैं तो इस डबलरोल से बहुत खुश हूं..जहां सीता की जरूरत होगी शशि, और जहां गीता डार्लिंग की जरूरत होगी वहां निशि..!! मज़ाक करते हुए वरुण ने कहा।

कहकर वरुण ने हंसकर दोनो को चपत लगाई, और माहौल उनके ठहाकों के समवेत स्वर से गूंज उठा।

.-कविता जयन्त श्रीवास्तव



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