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@dawriter

नहीं बदलेंगे वो

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rajmati777 by  
rajmati777

आज‌ बुलबुल का जन्म दिन था। सुबह से ही घर में उत्सव की तैयारियां चल रही थी। बुलबुल भी अपना जन्मदिवस को मनाने में बहुत उत्साहित थी।

उसको तो रात भर नींद ही नहीं आई। वो मुझे अपना बहुत अच्छा दोस्त मानती थी, मैं उसकी कोई नहीं थी, पर उसके लिए मैं बहुत कुछ थी। मैंने उसे जन्म ही तो नहीं दिया था। बाकी जबसे चार महीने की थी, उसको मैंने बेटी की तरह पाल पोस कर बड़ा किया। उसकी मां नौकरी पर जाती और अपनी सास से अनबन रहती तो मेरे पास छोड़ जाती।

आज वो दस साल की हो गई, कैसे समय निकला पता ही नहीं चला।

"बुलबुल तू अपनी मीशा मां को जन्म दिन पर नहीं बुलायेंगी क्या,"मैंने उससे पूछ ही लिया जब वह सुबह मेरे चरण स्पर्श करने आई।"मीशा मां मैं तो बुलाना चाहती हूं, और पापा भी, पर मम्मी ने मना कर दिया, नहीं बुलाना, बच्चों के बीच में बड़ों का क्या काम। अब मीशा मां आप ही बताइए क्या करूं मैं। और ये बात किसी को बोलना मत। नहीं तो मेरी मां बहुत गुस्सा करेगी।"बुलबुल की आंखे कहते कहते बरबस भर आईं।"ना बेटा नहीं रोते, आज तो तेरे जीवन में बहुत बड़ा दिन है।"मीशा ने उसको बाहों में भर लिया।

मीशा मां और बुलबुल का रिश्ता प्रगाढ़ था। वो हर बात अपनी मां को नहीं बताती पर मीशा मां को हर बात बताती।

बुलबुल की मां आतंक का दूसरा नाम थी। सबको घर में डरा धमकाकर कर रखती। उसके सामने तो बुलबुल सिर ऊपर उठा कर बात भी नहीं कर सकती थी। मीशा मां तो उसके जीवन की लाइफ लाइन थी। वो हंसती मुस्कुराती नाचती गाती चिड़िया की तरह बैखोफ फुदकती, मीशा मां के साथ।

लो उत्सव के लिए बच्चे आने लगे। मेहमान आने लगे। बुलबुल आई, "देखो मीशा मां मैं कैसी लग रही हूं।" ..."बहुत अच्छी मेरी जान, किसी को तेरी नज़र ना लगे।"

"मीशा मां मैं आपके लिए चुपके से केक लाऊंगी, इन्तज़ार करना मेरा।"

मीशा मां इन्तज़ार करती रही, अपनी प्यारी सी गुड़िया के उत्सव को खिड़कियों के झरोखों में से देख बहुत खुश हो रही थी।

उत्सव खत्म हुआ, सब अपने अपने घर चले गए। मीशा मां तो इन्तजार करते करते थक गई। बिना कुछ खाए पीए, कब नींद आ गई पता ही नहीं चला।"मीशा मां, उठो, उठो ना मां मैं आपकी बुलबुल,"......"इतनी रात को,"मीशा ने आंखों को मसलते हुए कहा"....."हां मीशा मां, मैंने आपके लिए केक और पेस्ट्री, मिठाई सब छिपा कर रख दी थी। जैसे ही मां सोई, मैं चुपचाप इधर आ गई। अब आप मुंह खोलो, लो केक खाओ, ""मीशा ने 🍰 केक खाया, और अपनी गुड़िया के प्यार को देख एक तरफ आंख में आसू तो दुसरी तरफ अपनी मुस्कान से गुड़िया के चेहरे को निहार रही थी।"मीशा मां गाने लगी...."बार बार दिन ये आये बार बार दिन ये, तुम जियो हजारों साल, ये है मेरी आरज़ू, हैप्पी बर्थडे टू यू, हैप्पी बर्थडे टू बुलबुल, हैप्पी बर्थडे टू यू।"

मीशा मां की गोद में गाना गाते गाते बुलबुल भी सो गई और मीशा भी उसे अपनी बाहों में ले,सो गई।

 Image Source: Indianexpress



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