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@dawriter

दिल का मैल

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kavita by  
kavita

 

आज के युग मे न्यूक्लियर फैमिली का प्रचलन है...शादी होती है उसके बाद अगर लड़का किसी दूसरे शहर में रहता है तो उसको अपनी पत्नी को लेकर वहां जाना पड़ता है फिर फैमिली अलग और पति पत्नि अलग रहते हैं...मैने देखा है आज कल बहुयें खुद नहीं चाहती कि सास ससुर या फॅमिली उनके साथ रहे..! उन्हें कोई रोक टोक या बंधन पसंद नही..! फिर परिवार शुरू होता है यदि एक बच्चा है या किसी के दो बच्चे हैं तब भी देख रेख में दिक्कत होती ही है। केवल पिता बाहर जाता है तब तो ठीक है, पर अगर माँ भी जॉब करती है तो परवरिश का सवाल पैदा हो जाता है कि बच्चे कौन देखेगा ! पहले न लोग इतने व्यस्त होते थे न ही इतनी समस्याएं थी।

आज की कहानी एक दम्पति की है: रमन और मधु ... दोनो ही जॉब में थे फिर कुछ समय बाद उनकी एक बेटी हुई ..बेटी के बाद अब मधु के सामने (प्रेगनेंसी लीव खत्म होने के बाद) बेटी की देखरेख की समस्या आयी। उन्होंने सोचा मेड के हाथों तो बेटी की परवरिश ठीक से ना हो सकेगी क्योंकि आए दिन में क्रैच में और आया द्वारा बच्चे के दुरुपयोग (कभी उसे भीख मंगवाने और कभी भी घर के सीसी टीवी कैमरे में मेड द्वारा बच्चे के साथ दुर्व्यवहार)की घटना समाचारों में देखने को मिलती थी फलतः दोनों ही आशंकित थे..! घर के लोग अपने अपने मे व्यस्त थे और माँ पिताजी गाँव मे थे किंतु वे काफी बूढ़े हो गए थे..! मधु शुरू से ही बंधन पसंद नही करती थी रमन ने एक बार पहले भी चाहा था कि,वे उनके साथ ही रहे ..! आखिर उसके बूढ़े माँ बाप को भी, इस उम्र में सहारे की जरूरत थी मगर उस वक़्त मधु नही चाहती थी कि, कोई उसे रोक टोक करे चाहे वो कपड़े पहनने का ढंग हो या घूमने फिरने में ..की ये मत करो वो मत करो यहां मत जाओ वहां मत जाओ .. उसकी आजाद दिनचर्या में कोई भी खलल डाले..! वो बिल्कुल नही चाहती थी कि उनके आ जाने से उन दोनों की प्राइवेसी में कोई दखल पड़े..उसने रमन से साफ साफ मना कर दिया था।की अगर उसके मम्मी पापा यहां आएंगे तो वो उसके साथ नही रहेगी..अपने माँ पिताजी के घर चली जायेगी..! किन्तु अब और कोई चारा न था,उसकी अपनी माँ ने भी मना कर दिया कि ,तेरे पापा अकेले रह जाएंगे बेटी..' मजबूरन उसको सास ससुर के लिए हां बोलनी पड़ी..बेटे का आमंत्रण पाकर दोनो पति पत्नी बहुत खुश हुए और दोनों ही शहर आ गए।

अब तो मां जी के भरोसे बच्ची और घर छोड़कर मधु आराम से अपनी ऑफिस जाती और शाम को लौट कर आती तो बच्ची भी हंसती खिलखिलाती हुई मिलती..! उसकी सासू मां ने सब कुछ संभाल लिया उसके घर को भी, बच्चे को भी और मधु को भी ..! मधु बहुत खुश थी कि चलो कम से कम सासु मां तो हमारे साथ हैं । धीरे धीरे विचारधारा बदलने लगी। वह सोचती कि ..काश शुरू में ही मम्मी जी यहां आ जाती तो प्रेगनेंसी के टाइम पर इतनी केयर करने वाला कोई बड़ा घर में होता...! एक दिन मधु को ऑफिस से आने में काफी देर हो गई बारिश की वजह से एक तो वह देर से निकली ..दूसरे रास्ते में ट्रैफिक जाम की वजह से उसे घर पहुंचने में 3 घंटे लेट हो गया.. बहुत परेशान हो गई ..कि, बच्ची ने तो अब तक घर में आफत मचा दी होगी ..मम्मी जी कैसे संभाल रही होंगी उसको ..! यह सोच-सोचकर मधु का दिल बैठा जा रहा था वह सोच रही थी कि अब तक तो रमन भी आ गए होंगे! और रमन उसे कितनी बातें सुनाएंगे ! किसी तरह भगवान को मनाते हुए घर पहुंची और दरवाजा खोलकर जब अंदर आई तो उसने देखा कि उसकी बच्ची आराम से खेल रही है अपने दादा जी के साथ ..!

दादाजी घोड़ा बने हुए हैं और वह उन पर बैठकर सवारी कर रही है..! और सास रूम में बैठकर सब्जी काट रही हैं मधु को देख कर बच्ची खुश हुई मधु ने उसकी तरफ अपनी बाहें फैला दी किंतु यह क्या वो तो उतरने का नाम नही ले रही .. दादाजी की गोद से उतरना ही नहीं चाह रही थी और मधु के जबरन लेने की कोशिश करने पर चिल्ला उठी..! मधु को थोड़ा अजीब लगा कि ,अरे मैंने तो सोचा था कि यह रो रही होगी ..! आफत मचा रही होगी! मुझे देखते ही भाग कर चिपक जाएगी..!! मगर यहां तो कहानी उल्टी है यहां तो नजारा ही बदला हुआ है उल्टा वो दादाजी की पीठ से उतरकर मधु के पास आना ही नहीं चाहती थी।

मधु ने उसे देखकर ताली बजा कर उसका उत्साह वर्धन किया और मुस्कुराते हुए अंदर से निश्चिंत भी हुई कि, चलो शुक्र है घर का माहौल ठीक है ! बच्चे ठीक होने से उसे भी तसल्ली हुई !! मम्मीजी के पास गई तो उन्होंने कहा : अरे तुम तो पूरी भीग गई हो जाओ जाकर कपड़े बदल लो ! हाथ मुंह धो लो! और थक गयी होगी.. मै चाय बनाती हूं ! सुरु की चिंता न करो मैं उसको लेकर आती हूं। मधु तो शर्म से गड़ी जा रही थी अपने दिल के मैल को समझ कर ..उसकी आंख में पश्चाताप था...उसे लगा कि कल तक जिन को अपने साथ नहीं रखना चाहती थी ! अपने स्टैंडर्ड का नही समझती थी सोचती थी उनके कारण सोसायटी के लोग मज़ाक उड़ाएंगे ..! आज वह कितना ख्याल रख रहे हैं उसका... उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसकी आंखों में आंसू आ गए ...तब तक गोद मे सुरु को लेकर वो आ गयी ..! और मधु ने मम्मी जी की तरफ देख कर कहा मुझे माफ कर दीजिए ..मां ..! मैंने तो हमेशा आप लोगों को अपने साथ रखने से गुस्सा किया रमन से झगड़ा किया मगर आप आप तो मेरी मां से भी ज्यादा केयर करती है मेरी ..! इतनी देखभाल तो कोई नहीं कर सकता ..! बच्चे को भी देखती है घर को संभालती हैं और मुझे भी संभाल रही हैं आप? मम्मी जी ने हंसकर कहा: अरे बेटी! कैसी बातें करती हो ..! क्या मैं तुम्हारी मां नहीं हूं? क्या यह घर मेरा नहीं ?क्या यह मेरी बच्ची नहीं है ? जो मै तेरे घर ,तेरी बेटी और तेरे परिवार का ख्याल रख रही हूं.. खबरदार जो आइंदा कभी यह बात बोली..! यह सब कुछ तेरा अकेले का नहीं मेरा भी है.. यह मेरा परिवार है और अपने परिवार की देखरेख करना हर गृहणी का कर्तव्य है ..और हां बच्चे के सामने ज्यादा रोते नहीं हैं वरना वह डर जाएगी कि मेरी मां क्यों रो रही है ! (गोद मे सुरु को देते हुए) तुम इसको देखो मैं चाय बना कर लाती हूं पी लो वरना जुकाम हो जाएगा..! दरवाजे पर खड़ा रमन बहुत देर से उन दोनों के इस मिलन को देख रहा था और बाहर हो रही बरसात के साथ घर के अंदर हो रही इन आंसुओं की बरसात के साथ दिल का मैल धुल गया यह देखकर रमन भी आज बहुत खुश था..!

दोस्तों आपको यह कहानी कैसी लगी इसके बारे में जरूर बताइयेगा..!

-कविता जयन्त श्रीवास्तव

Image Source : buzzle



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