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@dawriter

तुम देना साथ मेरा

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ऋतु आज कुछ ज्यादा ही खुश है , क्योंकि बात ही ऐसी थी कि उसे समझ ही नही आ रहा था कि ये सच है या हक़ीक़त । क्योंकि आज सुबह ही उसे फ़ोन आया था उसी स्कूल से जहाँ उसने अभी परसों ही इंटरव्यू दिया था , और उन लोगों ने ऋतु को दो दिन बाद जॉइन करने का टाइम भी दिया है , बस अब उसे एक ही चिंता सता रही है .... कि वो मिष्ठी का क्या करे .....?

अभी तो वो केवल 3 साल की ही है , और उसका स्कूल टाइम भी इतना कम है कि कैसे हैंडल करेगी सब , इसी कश्मकश में उसे नींद भी नही आ रही थी , और वो इधर से उधर करवटें बदल रही थी उसकी बार बार की चूड़ियों की खनक से अनुज की भी आँख खुल गयी और वो ऋतु के जागने का कारण समझ गया । उसने ऋतु का हाथ अपने हाथ में लिया और बोला तुम सो जाओ , हम कल बात करेंगे सब कैसे करना है ......???

लेकिन मैं सो ही कहाँ पा रही हूँ ...?? अनुज ! दिमाग में वही सब घूम रहा है , कैसे होगा ......?? ये सब । हो जाएगा न देखो मिष्ठी स्कूल कितने बजे जाती है...?? 9 बजे न , तो तुम एक काम करना जब तुम अपना और मेरा खाना सुबह बनाती हो न तभी मिष्ठी का टिफ़िन भी पैक कर देना । बाकी मैं इसे इसके स्कूल जाने के लिए तैयार कर दूंगा और इसके लिए दूध ही तो बनाना है ..... न , मैं बना दूंगा बस , हो गया न सब मैनेज और तुम आते हुए उसे लेती आना , जैसा कि ये पहले ही से तय था , और इसके अलावा कोई परेशानी मुझे नज़र नहीं आती ।

अगर तुम चाहो तो मैं कुछ दिन खाना भी ऑफिस में खा लूंगा जब तक मेड मिल जाएगी मैंने ऑफिस में भी बात की है , और तुमने सोसाइटी में भी एक दो को कह रखा है न कि वो अपनी मेड से बात करके बताएंगी , तो हम फिर से सब तरीके से कर लेंगे " । लेकिन मिष्ठी का खाना ठंडा हो जाएगा ..... और तुम जानते हो उसे ठंडा बिल्कुल पसंद नही " ऋतु ने चिंता की नज़रों से देखा । " तो उसके लिए एक नया इंसुलेटेड लंच बॉक्स ले आएंगे " अनुज ने जवाब दिया । जिससे उसका खाना ठंडा नही होगा अब और कुछ परेशानी हो तो कहिये मास्टरनी साहिबा।

नही ..... अब तो नींद आ जायेगी .... न ! या नही ..... । हमेशा आएगी ..... " बस तुम देना साथ मेरा " कहकर ऋतु ने अनुज का हाथ थाम लिया । ज़रुर दूंगा , तुम्हे भी तो अपने लिए पूरा समय मिलना चाहिए न , और मैं हमेशा तुम्हारे हर काम मे तुम्हारे साथ हूँ कोशिश करूंगा हमेशा एक अच्छा पति बना रहूँ , वैसे भी मैं जानता हूँ तुमने पिछले 3 सालों से अपनी इच्छा को मन के एक कोने में दबाए रखा था । क्योंकि तुम किसी को कोई परेशानी नही दे सकती और ये भी अच्छे से जानता हूँ कि ये नौकरी तुम्हारी पहली पसंद नही है क्योंकि तुम कभी भी पढ़ाना नही चाहती थी ।

तुम तो कहती थी कि सब काम कर सकती हूँ पर पढ़ा नही सकती , हाँ अनुज और मैं पढ़ा भी सकती हूँ .... इस बात का एहसास तो मुझे मेरी मिष्ठी ने कराया कि हाँ मैं पढ़ा भी सकती हूँ , चलो चलो अब सो जाये कभी छोटी मैडम उठ कर हम दोनों को ही पढ़ा दे ।

©नेहाभारद्वाज

 



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