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@dawriter

तुम्हारी मम्मी !!!

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रागिनी अभी नहा कर आई, तो देखा फोन में 3 मिस कॉल्स है, इतनी सुबह सुबह मम्मी का फोन 3 बार, उसका मन कुछ अनिष्ट की आशंका से बैठा जा रहा था। उसने जल्दी से फोन उठाया, मम्मी को फ़ोन किया, हलो मम्मी ! सब ठीक है न ..... 3 बार फोन क्यों किया? आपकी तबियत तो सही है न कुछ परेशानी ......????? उधर से आवाज़ आयी, नही नही...... बेटा ! सांस ले ले सब सही है। ऐसी कोई बात नहीं है, बस सुबह सुबह एक बुरा सपना देखा था तो मन बेचैन सा हो रहा था।

लेकिन आज रविवार है, सोच कर रह गयी कि तुम सब सोये होगे। पर रहा नहीं गया तो तुझे फ़ोन मिलाया, लेकिन जब किसी ने फ़ोन नहीं उठाया, मैंने अमर जी का ही फोन मिलाया लेकिन उनका नम्बर लगा ही नहीं। तो सहम सी गयी थी। अरे .... मम्मी ! सब सही है, आप ज्यादा न सोचा करो, वैसे ही आपकी तबियत ठीक नहीं रहती, यहां सब ठीक है।

आप बताओ ...? सब कैसे हैं....? यहाँ भी सब ठीक है ..... बेटा ! चल .... मैं रखती हूं, तेरी राजी खुशी पूछने को फोन किया था।

बात खत्म करके जब रागिनी कमरे में आई तो देखा "अमर अपने मोबाइल में आंखे गढ़ाए बैठे हैं" उसने अमर से पूछा..... अमर ! "आप अभी जागे क्या ?? " नहीं तो ! आधा घण्टा हो गया होगा अमर ने जवाब दिया। "मेरा फ़ोन काफी देर से बज रहा था न, आपने देखा नहीं"। "अरे ....! देखा था न, तुम्हारी मम्मी का फ़ोन था, मैंने सोचा ....! तुम आकर खुद कर लोगी" अमर ने ऊंघते हुए से जवाब दिया।

"तीन बार आने पर भी ..... " रागिनी ने गुस्से से अमर को देख कर कहा। "हाँ ! तो क्या हुआ, तुम लोग वही तो सारी बाते करते हो ..... आप कैसी हो ....?? dr को कब दिखाया ..?? उसने क्या बताया ..... ??? कौन क्या कर रहा है ....?? Bla bla bla ...." अमर ने हाथो से चोंच बनाते हुए कहा ।।

" OK ...! और अगर कोई इमरजेंसी हो तो? उसकी वजह से फोन किया हो तो ?? क्या करते आप .? " इस बार रागिनी झल्ला कर बोली।

" अरे ....! कुछ नहीं होने वाला ...यार, तुम और तुम्हारी मम्मी बस यूं ही खामखां परेशान होते हो, chill yar take it easy " कहकर अमर नहाने चले गए। लेकिन आज रागिनी को उसका "तुम्हारी मम्मी " "तुम्हारी मम्मी" कहना तीर की तरह लग गया, जबकि वो तो हमेशा ही तुम्हारी मम्मी कहकर बात करता है, तो आज क्यों ?? वो इसे दिल पर ले रही है।

पर फिर भी शादी के इतने सालों बाद भी अमर मेरी मम्मी को तुम्हारी मम्मी क्यों कहते हैं? यही सोचते सोचते वो रसोई में घुस गई और जल्दी से नाश्ते की तैयारी करने लगी। इतने में अमर भी नहा कर आ गए रागिनी अमर को बैठने को कहकर, पराठे सेकने लगी। खाते खाते ही अचानक अमर का फोन बज गया। उसने रागिनी से कहा देखो तो ज़रा मेरे हाथ साफ नहीं है ..... रागिनि ने देखकर कहा "तुम्हारी मम्मी का फोन है, पहले खा लो, खा कर बात कर लेना । उसकी बात सुन कर अमर ठगा सा रह गया, " तुम्हारी मम्मी " जबकि रागिनी तो हमेशा सिर्फ मम्मी जी ही कहती है।

उसने कभी भी अमर को इस बात का एहसास ही नहीं होने दिया कि अमर की माँ उसकी माँ नहीं सास है, कोई भी व्रत, त्यौहार हो वो सबसे पहले उन्हें फोन करती, उससे पहले रागिनी को पता होता कि आज घर में कोई परेशानी थी या कुछ खास हुआ। लेकिन अमर, अमर तो शादी के इतने साल बाद भी उसकी मम्मी को अपनी मम्मी नहीं कह पाया। सच आज उसे एहसास हुआ, कि उसने जाने कितनी ही बार रागिनी और कहीं न कहीं अपनी सासू माँ का भी दिल दुखाया है। जब पिछले दिनों उनकी तबियत बहुत खराब थी तब भी उन्होंने खुद ही कई बार पूछा था, कि अमर जी का फोन नहीं आया। शायद ! बहुत व्यस्त होंगे, नहीं तो वो फोन जरूर करते।

लेकिन वो उनसे रागिनी के फोन मिला कर देने पर ही बात करता था, खुद तो उसने कभी किया ही नहीं। पर आज उस एक शब्द ने मानो उसे अंदर जे झकझोर दिया हो। क्या हुआ .....??? खा नहीं रहे , रागिनी के पूछने पर अमर की तन्द्रा टूटी। अरे नहीं .... ! बस बस और नहीं। तुम बैठ जाओ अब, कहो तो..... मैं बना दू , आ ..... हा ..... हा ..... बड़े आये, मैं बना दू ..... । कभी चाय तक तो बनाई नहीं, आलू के परांठे बनाएंगे ये। मैं खा लूंगी तुम मम्मी जी से बात कर लो, मैं शाम को कर लूंगी ।

अमर ने जल्दी से हाथ धोए और मम्मी को फोन मिलाया। उसने मम्मी से बात करने के बाद अब अपनी सासू माँ को फोन किया, जो अब केवल " तुम्हारी मम्मी " नहीं ..... !..मम्मी थी ..... बस ।।

 

नेहा भारद्वाज ।।



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