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@dawriter

खुशियों का पासवर्ड...

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Part 1-

विदिशा से आगे बढ़ते ही ट्रेन ने स्पीड पकड़ ली और मेरा मन भी उससे कही आगे भाग रहा था| “रिया और सुमित मैरिज काउंसलर के पास जा रहे है”, जब से मैंने यह सुना था मन बेचैन हो गया था। रिया मेरी भतीजी है और मुझे बहुत प्रिय है। वो भी मुझे बहुत चाहती है। अपनी शादी के दिन रीति-रस्मो के बीच उसकी आँखे मुझे ही ढूँढती और शादी मुश्किल से दो साल ही तो हुए थे। भाई-भाभी ने अगर यह सुना तो सदमे में आ जाएंगे क्योंकि उस जमाने में पति-पत्नी अगर अपनी प्रॉबलम्स लेकर काउंसलर के पास जाए तो चिंता और शर्म की बात मानी जाती थी।हर माँ-बाप की तरह बड़े धूम-धाम से उन्होंने रिया की शादी की थी और शादी भी तो रिया की पसंद से थी।

रिया की मैरिज में टेंशन चल रहा है यह सुनकर मन तो मेरा भी बहुत बेचैन है।

भोपाल स्टेशन से रिया के घर पहुँचने में आधे घंटे का समय लगा। दरवाज़ा खोलते ही रिया मुझसे लिपट गई। इस तरह अचानक मुझे देख वह बहुत खुश थी।

सुमित ऑफिस जा चूका था। दोपहर के खाने के साथ ही रिया मुझसे बातें करती रही पर मैंने नोटिस किया बीच-बीच में जैसे वो कही गुम हो जाती थी साथ ही सेल फोन के मैसेज चेक करती और रिप्लाई करती। शाम की चाय के वक्त सुमित से मुलाकात होती है। समझदार व सुलझा हुआ था सुमित, हर बात वह मुस्कुरा कर बोलता अच्छा लगा मुझे, मगर इसके बाद वह लैपटॉप पर जो बिजी हुआ तो डिनर भी उसने बेड पर ही ले लिया। उसके आने के बाद रिया मुझे उदास व् यंत्रवत लगी। हर काम को वो मशीन की तरह कर रही थी। शाम के बाद रात तक मैंने उन दोनों में कुछ ख़ास बातचीत नहीं देखी। नव-दंपत्ति का कोई उत्साह उनमें नहीं दिखा। कई बार मेरी सवालिया निगाहों से रिया बच रही थी।

मैंने बस ज़रा सा ही तों पूछा था रिया तू खुश ह न? इतने से टूट गई थी रिया। सिसकियों के साथ शुरू हुई रिया की आवाज़ तेज़ रुलाई के सात कमरे में फूट रही थी। ‘बुआ शरू में तो सब अच्छा था पर अब सुमित को मेरी कोई परवाह नहीं। अपनी ऑफिस की व्यस्तता को वो घर पर भी लाता है और फिर लैपटॉप, मोबाइल चलाते चलाते सो जाता है। उसे मेरी फीलिंग्स की कोई कदर नहीं। बात बात में मुझे हर्ट और इग्नोर करना उसकी आदत बन गयी है।

कभी हम आउटिंग पर भी जाते है तो वहा भी वह अपने सेल फ़ोन से दूर नहीं रहता और फिर मै भी अपना धैर्य खो बैठती हूं, बस इसपर हमारी बहस हो जाती है, और तो और उसने अपने मोबाइल पर पासवर्ड भी डाल रखा है जिससे में उसके फ्रेंड्स और चैटिंग न देख सकू। अपनी प्राइवेसी का उसे बहुत खयाल है। रोते रोते रिया थक चुकी थी। मैं अवाक थी...क्या होगया है आज की जनरेशन को? सुख सुविधाओं का रिमोट हाथ में लेकर भी वे कितने दुखी व् असहाय है।

मैंने तो सोचा था इनके जीवन में कोई गंभीर प्रॉब्लम है मगर एक अदद मामूली गैजेट्स के लिए उन्होंने अपना सुख-चैन और विश्वास सब कुछ दाव पर लगा दिया है। मुझे यहाँ रुके चार दिन हो गये थे कल शाम को मेरी ट्रैन है मगर जिसलिए मैं यहाँ आई थी मैं कुछ नहीं कर पा रही थी। इन नई जनरेशन वालों से हर बात बहुत सोच समझ कर और उनके मूड के हिसाब से करना होता है।

उन दोनों की एक दूसरे के प्रति बढ़ती उदासीनता व ignorance मुझे कचोट रहा था। ऑफिस से आने के पांच दस मिनट बाद ही सुमित मोबाइल में डूब जाता। उसे किसी से कोई मतलब नहीं होता। रिया भी किचन का काम निपटा मोबाइल और टीवी में ही बिजी हो जाती या मैं देख रही थी की उसे भी उन्ही कामो में मज़ा आ रहा था मगर बीच बीच में उसका। उदास चेहरा मुझे बेचैन कर देता। दोनों को एक साथ बिठा कर कब क्या कहूं समझ में नहीं आ रहा था.....

Part 2-

फ्रेंड्स! पिछले ब्लॉग में मैंने बताया था कि मेरी भतीजी जिसकी शादी को अभी सिर्फ दो साल ही हुए थे उनके marriage councilor के पास जने की बात सुनकर मैं घबरा गई थी, बाद में उनके घर जा कर देखा की दोनों अपनी अपनी प्राइवेसी को मोबाइल से जोड़ बैठे है और इस तरह उन्हें एक दूसरे की फीलिंग्स की बिलकुल परवाह नहीं।उनका इग्नोरेंस गेम इतना बढ़ गया था की उन्हें काउंसिलर के पास जाना पड़ रहा था। दो चार दिन रहने के बावजूद मैं उन्हें समझा नहीं पा रही थी। आज तो शाम को मेरी ट्रैन है मैं इसी चिंता में थी की मोबाइल के कीपैड पर उंगलिया चलने लगी।

प्रिय बच्चो

मैं यहाँ तुम्हारी खुशियाँ देखने आई थी मगर तुम्हारे जीवन में उदासी और अकेला पन देख कर मन दुखी हो उठा है।

माना आज का समय बहुत बदल चुका है मगर रिश्तों को लेकर जो बात पहले सही मानी जाती थी वो आज भी वही हैं।

‘विश्वास बहुत बड़ी चीज़ है’ मगर जब तुम अपने अपने मोबाइल में ‘पासवर्ड’ डालते हो संदेह वही से शुरू हो जता है।

मुझे नहीं लगता पति-पत्नी में पासवर्ड नाम की कोई चीज़ होती है।

एक साथ होते हुए भी तुम दोनों घंटो दुसरो से चैटिंग में बिजी होते हो। जो ख़ुशी तुम्हें एक दुसरे के साथ मिलने चाहिए वो तुम दूसरों के लाइक्स और कमेंट्स में ढूंढ रहे हो हां! ढूँढ ही तो रहे हो क्योंकि यह सब करके भी तुम्हारे चेहरे से चैन गायब है। फेसबुक फ्रेंड्स के लिए तुम एक दुसरो की फीलिंग्स को भी हर्ट करते हो।

सुमित और रिया मैं तुम दोनों से कह रही हूं की अपनों छोटी बातों को एक दूसरे से शेयर करना और appreciate करना पति-पत्नी के रिश्तों में बेहद जररूरी है और तुम दोनों ख़ुद को जान बूझ कर अकेला और व्यस्त बना रखा है। ‘विश्वास और प्रेम’ ही खुशियों का पासवर्ड है जिसे कभी भूलना नहीं चाहिए।

अपने मन की बात लिख कर मैंने मैसेज सेव कर लिया। ट्रेन टाइम से थी। रिया छोड़ने आई थी। ट्रेन चलने लगी तो रिया का मुस्कुराता चेहरा धीरे-धीरे ओझल होने लगा।

ट्रेन भोपाल स्टेशन को बहुत पीछे छोड़ चुकी थी मगर मेरा मन अभी भी रिया के आस-पास था अचानक मेरा हाथ मोबाइल पर चला गया और सेव किया हुआ मैसेज सेंड कर दिया।

मुझे नहीं मालूम मेरे इस व्हाट्सअप मैसेज पढ़ कर उन दोनों का क्या रिएक्शन होगा। तुरंत वे दोनों ऑनलाइन दिखे और बहुत देर तक दीखते रहे और फिर ऑफलाइन हो गए। कुछ ही देर में मेरा मोबाइल मैसेज अलर्ट हुआ मैंने देखा ☺ और 👍 के मैसेज थे रिया और सुमित के नम्बरो से। मुझे हसना भी आया की आज कल के बच्चे मुश्किल हालात में इमोजी भेज कर निश्चिन्त हो जाते हैं। मैंने एक गहरी साँस ली, एक positive councelling की शुरुआत मैंने कर दी थी....



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