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@dawriter

एक लड़की का सबसे अच्छा दोस्त

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varmangarhwal by  
varmangarhwal

कहानी— एक लड़की का सबसे अच्छा दोस्त

लड़की— अब पहले से पता थोड़े ही चलता हैं, कौन कैसा हैं ? किसके दिल में क्या हैं ?

लड़का— क्यों ? पता क्यों नहीं चलता ? मुझे कैसे पता चल गया ? मैंने तो बिना बात किये सिर्फ फेसबुक आईडी और कॉमेन्ट देखकर बता दिया.

लड़की— अरे, तुम तो सब पर शक करते हो. तुम सबकी एक–एक बात पर दिमाग चलाते हो. इसलिए तुम्हें पता चल जाता हैं.

लड़का— हाँ तो तुम क्यों किसी भी राह चलते पर विश्वास करती हो ? तुम इन्सान को पहचानने की कोशिश क्यों नहीं करती ?

लड़की— तुम पर भी तो विश्वास किया ना मैंने. क्या मैंने कभी तुमसे कोई सवाल किया ? लेकिन मेरी किस्मत अच्छी हैं, जो तुम उन लोगों जैसे नहीं हो.

लड़का— अरे, तो क्यों करती हो ऐसे बिना सोचे-समझे विश्वास ? वहीं तो बोल रहा हूँ, तुम्हें मेरी कोई बात गलत लगे या तुम्हें कोई शक हो या कोई सवाल हो तो बोला करो. मैं तुम्हारी सारी बातों से जवाब दूँगा. तुम्हारे सारे शक दूर करूँगा. अगर मैं ऐसा नहीं करता हूँ, तो समझ जाओ कि मेरे मन में पाप हैं. जिसका मन साफ़ होता हैं, वो कभी का सवाल–जवाब करने का बुरा नहीं मानता. बल्कि सवालों के जवाब देकर सारे शक दूर करता हैं, ताकि कोई गलतफ़हमी ना हो.

लड़की— हाहाहाहा………तुम भी ना.

लड़का— कमाल हैं. हँस क्यों रही हो ? मैंने जोक सुनाया हैं क्या ?

लड़की— अरे बुद्धू ! तुमसे क्या सवाल करूँ ? मेरे कुछ पूछे बिना तुम खुद ही सब बता देते हो. इसलिए तुम पर शक या तुमसे कोई सवाल करने की जरूरत ही नहीं पड़ती. वरना हर लड़का बस बॉयफ्रैंड बनकर लड़की को गर्लफ्रैंड बनाने के लिए ही लड़की से दोस्ती करना हैं. लेकिन तुमने कभी ऐसी कोई कोशिश नहीं की.

लड़का— ओह ! लेकिन मेरी बात को समझो. मैं तुम्हें सब कुछ इसलिए बता देता हुँ. क्योंकि तुम मुझे अपना सबसे अच्छा दोस्त बोलती हो और मैं अपनी सबसे अच्छी दोस्त को किसी गलतफ़हमी के कारण खोना नहीं चाहता.

लड़की— और कभी खोओगे भी नहीं. क्योंकि मुझे पता हैं तुम ऐसा कुछ होने ही नहीं दोगे, जिससे हमारे बीच में दूरियाँ आए.

लड़का— ये बात मैं समझता हूँ. ये बात तुम समझती हो. लेकिन ये गलत और गन्दे लोग जो प्यार और दोस्ती के नाम पर दिल बहलाते हैं, वो नहीं समझते. और कोई तुम्हारे बारे में गलत और गन्दी सोच रखता हो. ऐसे लोगों से तुम दोस्ती कर लेती हो तो मुझे अच्छा नहीं लगता.

लड़की— मैंने बताया ना तुम्हें, पहले–पहले सब अच्छी–अच्छी बातें करते हैं. बाद में अपना असली रंग दिखाते हैं.

लड़का— तो तुम सोच–समझ कर किसी से बात किया करो ना. इनके कॉमेन्ट, इनकी बातों से तुम्हें कुछ समझ नहीं आता. उन लोगों ने कुछ चिकनी–चुपड़ी बड़ी–बड़ी बातें करी. तुम्हारी तारीफ की. कुछ फैमिली की बातें करली. हँसी–मजाक करने लगे. बस तुम्हें लगा वो बहुत अच्छे हैं और मैडम ने मोबाइल नम्बर भी दे दिया. हमें कभी–भी किसी के ऊपर विश्वास नहीं करना चाहिए.

लड़की— लेकिन अब तो मैंने उनसे बात करना भी बन्द कर दिया. फेसबुक, वॉटसअप सब जगह से ब्लॉक.

लड़का— लेकिन इतना बखेड़ा तो हो ही गया ना. हमारा झगड़ा हुआ. और वो सब कितनी गन्दी बातें बोल रहे थे. और अब सबको तुम्हारे बेवकूफ बनने के किस्से सुनायेंगे.

लड़की— तो क्या हुआ ? गलत लोग गलत बातें ही बोलेंगे ना. अब उनके बोलने से मैं खराब हो जाऊँगी क्या ?

लड़का— उफ्फ………अरे बैईज्जती तो हो ही गई ना. और अगर मैं उनके बारे में तुमसे नहीं पूछता तो तुम तो कुछ बताने वाली भी नहीं थी. बस उनका टाइम–पास बनकर उनका दिल बहलाती रहती.

लड़की— एम सॉरी ! प्लीज मुझे माफ कर दो. अब आगे से ऐसे किसी से बात नहीं करूँगी.

लड़का— ओहो, मुझे सॉरी बोलने की जरूरत नहीं हैं. लेकिन तुम अपना ख्याल रखा करो और सोच–समझ कर किसी से बात किया करो.

लड़की— अब मैं क्या करूँ ? मुझे अपना ख्याल रखने और सोचने की जरूरत ही नहीं हैं.

लड़का— अच्छा, ऐसा क्यों ?

लड़की— तुम हो ना मेरा ख्याल रखने और सोचने के लिए. हाहाहाहा………………

लड़का— हँसों मत. मैं क्या हमेशा तुम्हारे साथ रहता हूँ ?

लड़की— तो रह जाओ, तुम्हें कौन मना कर रहा हैं ?

लड़का— तुम मेरी बात मत सुना करो, मेरी बात मत समझा करो. बस घूम–फिर कर यहीं आ जाया करो.

लड़की— लो , मैं तो तुम्हारे फायदे की बात कर रही थी.

लड़का— इसमें मेरा क्या फायदा ?

लड़की— अरे , तुम हमेशा साथ रहोगे, तो मेरे बारे में इतना सोचना नहीं पड़ेगा ना.

लड़का— कभी–कभी लगता हैं, तुम बेवकूफ नहीं हो.

लड़की— कभी–कभी क्यों ?

लड़का— क्योंकि तुम बड़ी वाली बेवकूफ हो ना इसलिए.

लड़की— हाहाहाहा………फिर भी तुम बेवकूफ के साथ अपना दिमाग खराब करते हो. तो तुम तो मुझसे भी बड़े बेवकूफ हुए ना.

लड़का— ये भी सही हैं. अब बेवकूफ के साथ रहुँगा, तो कुछ तो असर आएगा ही.

लड़की— ये भी सही हैं. हाहाहाहा………

लड़का— अच्छा, एक बात और. देखो, ये सच हैं कि मैं हमेशा तुम्हारे साथ नहीं रहुँगा और कोई भी हमेशा किसी के साथ नहीं रहता. इसलिए अपना ख्याल खुद रखना सीखो और गलत, घटिया, बेकार और गन्दे लोगों से दूर रहा करो.

लड़की— तुम ऐसी बातें क्यों बोलते हो ? एक तरफ तो तुम मेरी इतनी चिन्ता करते हो. मेरा इतना ख्याल रखते हो. और हमेशा ये एहसास भी दिलाते हो, तुम हमेशा साथ नहीं रहोगे.

लड़का— वो इसलिए क्योंकि यहीं सच हैं. और हमें सच को हमेशा याद रखना चाहिए.

लड़की चुप रहती हैं.

लड़का— अच्छा, एक बात बताओ. तुमने खुद मुझे बताया था ना कि तुम अपने मम्मी–पापा से सबसे ज्यादा प्यार करती हो.

लड़की— हाँ.

लड़का— और मम्मी-पापा के साथ–साथ अपने भाई–बहनों से, अपनी भाभी से, भईया के बच्चों से, चाचाजी, मामाजी, अपनी सहेलियों से, अपने दोस्तों से बहुत लोगों से प्यार करती हो. ये सब तुमने ही तो समझाया था.

लड़की— हाँ.

लड़का— तो क्या ये सब हमेशा तुम्हारे साथ रहते हैं ?

लड़की— मतलब ?

लड़का— मतलब ये हैं कि बचपन में तुम स्कूल जाती थी. फिर कॉलेज जाती थी. अब जॉब करती हो. ये सब हमेशा तो तुम्हारे साथ नहीं रहते ना. कल को तुम्हारी शादी हो जाएगी. तुम्हें कभी घर के या परिवार के काम से यहाँ–वहाँ जाना होगा. तब हर वक्त तुम्हारा पति या तुम्हारे ससुराल वाले तुम्हारे साथ थोड़े ही रहेंगे. नहीं रह सकते ना ?

लड़की— हाँ.

लड़का— और कल को तुम्हारे बच्चे होंगें. तुम्हें मम्मी–मम्मी बोलेंगे. वो भी स्कूल जाएगे. घर से बाहर जाकर खेलेगें. तो उनको अपना ख्याल खुद ही रखना होगा ना. तुम तो सिर्फ समझा सकती हो, स्कूल में कैसे रहना हैं ? बाहर दूसरे बच्चों के साथ कैसे रहना हैं ? गलत बच्चों से दूर रहना हैं. हमेशा हर जगह उनके साथ थोड़े ही जाओगी.

लड़की— हाँ, ऐसे तो कोई भी हमेशा साथ नहीं रह सकता. लेकिन सब एक–दूसरे की केयर तो करते ही हैं ना. एक–दूसरे से बात करना या मिलना थोड़े ही छोड़ देते हैं.

लड़का— तो मैंने कब कहाँ कि मैं तुमसे बात करना या मिलना छोड़ दूँगा. मैंने तो सिर्फ इतना ही बोला कि हमेशा साथ नहीं रहुँगा. तुमने तो ऐसे मुँह बना लिया जैसे मैं मर गया हूँ. हाहाहाहा………

लड़की— हुहुहुहु………अब तो तू पक्का मरेगा.

लड़का— हाहाहाहा………बात को समझे बिना उल्टे–सीधे मतलब खुद निकालती हो और मुझे पीटती रहोगी.

लड़की— रूको जरा, अभी तुम्हारे मतलब सही करती हूँ.

लड़का— हो गये, हो गये. सारे मतलब सही हो गये. मैं हमेशा तुम्हारा सबसे अच्छा दोस्त बन कर तुम्हारे साथ रहुँगा.

लड़की— लातों के भुत बातों से नहीं मानते.

लड़का— लेकिन एक प्रोब्लम हैं.

लड़की— वो क्या ?

लड़का— अगर तुम्हारे पति ने ये समझ लिया कि तुम्हारा और मेरा चक्कर चल रहा हैं तो ?

लड़की— तो दो हाथ मारूँगी और बोलूँगी, तुमने भी कॉलेज में, जॉब में या आस–पड़ौस की औरतों से बातें तो करी होगी, सबकें साथ तुम्हारा चक्कर चल रहा हैं क्या ?

लड़का— हाहाहाहा………फिर तो मैं तुम्हारे पति के सामने ही तुम्हें डॉन्टा करूँगा.

लड़की— और जो तुम्हारी पिटाई होगी, वो भी पति के सामने ही होगी.

लड़का— हाँ, जैसे तुम्हारी पिटाई तो होगी ही नहीं. तुम्हारा पति बोलेगा, वाह रे वाह मोटी………कराटे सीखे हैं, जिम जाती हैं, फिर भी पिटकर आ गई.

लड़की— हाँ, तो वो क्या खड़ा–खड़ा देखता रहेगा क्या ? तुम तो हम दोनों से पिटोगे.

लड़का— वहीं तो बोल रहा हूँ, तुम्हें पिटते देखकर तुम्हारे पति को तुम्हें बचाने के लिए आना पड़ेगा.

लड़की— ऐसा नहीं होगा. तुम्हें तो मैं एक हाथ से ही घूमाकर पटक दूँगी.

लड़का— ठीक हैं. देखेगें. तो कब कर रही हो शादी ?

लड़की— जब सबसे अच्छा पति मिलेगा.

लड़का— चलो, जल्दी ही मिले, ये सबसे अच्छा पति. ताकि मुझे परेशान करना तो बन्द करो.

लड़की— तुम्हें परेशान करना तो अब कभी नहीं छोड़ूँगी.

लड़का— ये भी सही हैं.

लड़की— हाहाहाहा………ये भी सही हैं.

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समाप्त

 लेखक— वर्मन गढ़वाल



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