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@dawriter

एक चिट्ठी उस कमज़ोर लड़की को जो अब कमज़ोर नहीं

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dhirajjha123 by  
dhirajjha123

कभी सोचा ही नहीं कि तुम्हारे बिना भी रहना पड़ सकता है । मगर समय है किस ओर करवट ले कौन जानता है इसीलिए चंद बातें जो तुम्हे कहना चाहता हूँ ठीक वैसे ही जब छोटे थे तब माँ घर से अकेले बाहर जाते हुए समझाती थी । 
तुम्हें आज़ादी पसंद है, आज़ादी की लड़ाई लड़ने का शौख है मगर डर जाती हो । खैंर डर भी ज़रूरी है मगर उतना ही जितना मर्यादा को बनाए रखे । तुम लड़ना तब तक लड़ना जब तक आज़ादी तुम्हारी गुलाम ना हो जाए । मेरे लिए भले तुम्हारी आवाज़ दब गई मगर अपनी आज़ादी को ले कर तुम्हारी आवाज़ बुलंद होनी चाहिए । तुम्हे मैने वो रास्ता दिखाया जिस पर तुम अपने मार्गदर्शन से ना जाने कितनी गुलाम लड़कियों को उनका हक़ दिला सकती हो । तुम्हारा कद हमेशा बढ़ता रहना चाहिए तब तक बढ़ना चाहिए जब तक तुम इतनी ऊंची ना हो जाओ कि कोई तुम्हे और तुम्हारी बात को नज़रअंदाज़ ना कर सके ।
मैं खो जाऊंगा तुम्हारे जाते ही । मेरा वजूद ना सिरे से मिट जाएगा । मगर तुम्हे लड़ना है बढ़ना है । शायद नियती ने मुझे इसीलिए चुना था कि मैं तुम्हे वो हिम्मत दे सकूं तुम्हे सिखा सकूं कि अपने सीने में बन रही गांठ को कैसे अपनी आवाज़ बना कर निकाला जाता है । रोना नहीं ये तुम्हे कमज़ोर कर देगा और मुझे तुम में कमज़ोरी नहीं मजबूती देखनी है । तुम उम्मीद हो बहुतों की मेरे चले जाने से उन बहुतों की उम्मीद मरने ना पाए । 
नियती ने चाहा तो फिर मिलेंगे । 
हमेशा तुम्हारा ही 
#सीट_नं_48
धीरज झा



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