0
Share




@dawriter

उसकी और उसके उसकी बातचीत

0 5       

“जानते को कल मैंने एक सपना देखा”
“कुछ उत्पतंग ही देखा होगा”
“हाँ हाँ सरे सही सपने तो तुम्हे ही आते हैं ना, जाओ नहीं बताती हुंह”
“अरे मजाक कर रहा था, चलो बताओ” (फुसफुसाते हुए)
“एक तो नई बहुरिया बन जाते हो आफिस आते ही, जोर से मत बोलना जेठ जी सुन लेंगे”
हंसी छुट गयी दूसरी तरफ से
“अच्छा अब भाव न खाओ बताओ क्या सपना देखा”

“वो न हम ये सपना देखे कि कोई हमारे चेहरे पर एसिड फैंक देता है”
“तुम्हारा दिमाग ख़राब है न जाहिल कहीं की, तुम्हे पता भी है जिसके साथ ऐसा होता है वो कितने बड़े सदमे और दर्दसे गुजरती है, तुमने तो मुंह उठा के बोल दिया, सोचा भी नहीं मुझें कैसा लगेगा” पहले से ज्यादा ऊँची आवाज़ में । फ़िक्र में आफिस बॉस किसी का दर नहीं रह जाता फिर बस फ़िक्र का दर होता है । 
“अरे  अरे शांत प्रभू, पर यार सच में सोचती हूँ की ऐसा हो जाये तो बढ़िया हो । क्योंकि फिर कोई मुझसे शादी करेगा नहीं और घर वाले ना चाहते हुए भी तुम्हारी शादी मुझसे कर देंगे । क्योंकि मैं जानती हूँ जहाँ कोई भी मेरे साथ नहीं खड़ा होगा वहाँ तुम मेरा हाथ थमने के लिए मुझे सहारा देने के लिए खड़े रहोगे ।”
“ पहले तो अपनी ये बकवास बंद करो ना जाने क्या क्या सोचती रहती हो, प्यासी आत्मा हो गयी हो न और दूसरी बात दिमाग नहीं ख़राब मेरा जो तुम्हारे जलने के बाद तुम्हे अपनाऊंगा, पागल हूँ क्या मैं, ऐसा सोचना भी मत” आगे का जवाब जानते हुए मुस्कुरा दिया वो 
“हिहिहिहिहिही तुम्हे झूठ बोलना भी नहीं आता, तुम्हारी मुस्कराहट यहाँ तक पहुँच रही है, तुम्हे तुमसे ज्यादा जानती हूँ मुझे पता है जहाँ मैं भी अपना साथ छोड़ दूंगी न वहां भी तुम मेरे साथ खड़े रहोगे । बोलो न ये आईडिया सही है ना ?”
तुम पागल हो गई हो फोन में से निकल कर दो थप्पड़ मरूँगा अकाल ठिकाने आजायेगी, तुमको वैसा सोचना भी किस तरह डरा देता है तुम जानती भी हो ?”
“अरे अरे मैं तो बस एक तरीका बता रही थी हमारे मिलने का, अच्छा चुप हो जाओ न अब नहीं कहूँगी ।”
“अपने पास रखा करो अपने सादे गले तरीके. तुम्हारा साथ पाने का ये मतलब नहीं तुम्हे नरक में धकेल दूँ ।”
“तुम्हारा साथ हो तो कहीं भी किसी हाल में भी स्वर्ग है ।”
“जा रहा हूँ दस मिनट से बहार हूँ ऊपर से तुम्हारी ये बेफिजूल की डरावनी बातें ।”
“हाँ हाँ जाओ तुम्हारे ससुर जी आजायेंगे नहीं तो ।”
“मेरे ससुर तुम्हारे अब्बा ही हैं ।”
“हा हा हा, अरे मजाक कर रही थी प्रभु,  हर बात को पकड़ा मत करिए । चलिए जाइए वैसे भी ठण्ड बढ़ रही है बहार सर्दी लग जाएगी ।”
“चलो ठीक है मिलता हूँ शाम को आफिस से आकर ।”
“मिलना और हमारे नसीब में हुहं”
“अरे मतलब मैसेज पर मिलेंगे और होगा होगा मिलना भी होगा यकीन रखो और वो भी बिना तुम्हारा चेहरा जले होगा ।”
“हा हा हा अब तंग खींचो हमारी, एक तो प्यार में डरावने आईडिया सोचें ऊपर से तुम्हारे कमेन्ट सहें हुंह ।”
“प्यार में अच्छा सोचा जाता है डरावना नहीं, वो सोचने के लिए मैं काफी हूँ, चलो बाय लोव यू ।”
“बाय लोव यू टू ।” 
हाय ज़माने और ज़माने के रिवाज़ों के ज़ुल्म, प्यार में न जाने क्या क्या करवाएंगे क्या क्या सोचने पर मजबूर करेंगे । 
धीरज झा



Vote Add to library

COMMENT