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@dawriter

इस प्यार को क्या नाम दूं

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rajmati777 by  
rajmati777

"खुले बालों में तुम बहुत अच्छी लगती हो। इनकी पाॅनी मत बनाया करो।"यही तो कहा था कर्नल साहब ने मुझे पहली बार। दत्ता साहब की पार्टी में मुलाकात हुई थी हमारी।

लाल साड़ी पहन कर आई थी मैं। सभी की निगाहें थम गई मुझे देख कर। मैं बहुत ज्यादा ही सुन्दर दिख रही थी लाल साड़ी में। कर्नल पाल रोमांटिक अंदाज में मेरे समीप आये और बोलें,"हाय ब्यूटिफूल लेडी, हाऊ आर यू आर लुकिंग वेरी नाइस इन दीस रेड साडी"। मैंने शरमाते हुए कहा,"ऐसा कुछ नहीं है।'..... अरे हम तो बस आप की तारीफ ही कर रहे हैं। खैर छोड़िए......टेक ड्रींक इन्जाय पार्टी"... मैंने कहा मैं नहीं पीती। ओहहहहह ठीक है, कह वो पार्टी का मजा लेने लगे।

मैं घर आईं और उनके ही बारे में सोचने लगी। अजीब है कर्नल पाल, पहली मुलाकात में ही इतने खुल गये मेरे साथ।

वक्त गुजरता गया, और उनसे मुलाकात यदा कदा होने लगी। और फिर तो धीरे-धीरे मुलाकातों का सिलसिला बढ़ता गया। कर्नल साहब जब भी मिलते मेरी सुन्दरता की तारीफ किए बिना नहीं रहते। उनमें एक अलग ही आकर्षण था। उनकी बात करने का अंदाज़ बहुत ही अच्छा था।

मुझे भी वो अच्छे लगने लगे। दिल चाहता था कि मैं पूरे दिन सुबह शाम उनसे बातें करती रहूं। वो भी तो यही चाहतें थे। मुझे पता था की मैं शादी शुदा हूं और वो भी शादीशुदा है। हम दोनों एक दूसरे के साथ मर्यादित होकर बात करते। अपने जीवन की सभी बातें एक दूसरे के साथ शेयर करते। कितनी बार उनसे मुलाकात में भी भावुक हो जाती और पाल साहब भी।

हम दोनों के बीच एक पवित्र रिश्ता था।न रुह की चाहत,न कोई अपेक्षा। बस था तो प्यार और वो भी बेशुमार। मैं भी उनको एक अच्छे इंसान की तरह बहुत पसंद करने लगी थी।

"सुहानी आज मैं काम से बैंकाक थाईलैंड जा रहा हूं, तीन दिन बाद आऊंगा।"फोन पर उन्होंने बताया।"अच्छा अपना ध्यान रखना,समय पर खाना खाना, और......।" ...."और क्या,बोलो"..."कुछ नहीं, तुम मुझसे बात करते रहना।"

"अरे बाबा करेंगे तुम से बात।"।। जातें ही वहां से अपनी पिक भेजी। रात को सोते समय उन्होंने बहुत देर तक मुझसे बात की। आज उनको बहुत अकेला पन लग रहा था।बोले ""सुहानी एक प्यारी सी किस दें दो ना प्लीज़ मुझे।".... मेरी कहा, नहीं मुझे नहीं लगता अच्छा ये।"प्लीज़.... ओके बाबा ये लो, और .....। थैंक्स सुहानी यू आर सो स्वीट।"हम्म्म् कह मैं कुछ नहीं कह सकी।

इंडिया आने के बाद मैंने कर्नल पाल से कहा, आज हम मिल सकते हैं क्या"?...."हां हां क्यों नहीं आ जाओ शाम को मिलते हैं।"

शाम को हम मिले।" मैंने कहा एक बात पूछूं आप से।"..."हां"....पूछो।"आप के इतनी सुन्दर फाईफ है फिर भी आप मुझे इतना प्यार करते हैं क्र्यू?"......

एक बार तो वो कुछ नहीं बोले, फिर ‌‌‌‌आ हाथ पकड़ कर बोलें,"यू आर वेरी नाइस,यूअर हार्ट इस वेरी प्योर, और तुम बहुत अच्छी हो। तुम मुझे समझती हों। मेरी फीलिंग जानती हो। मेरी जिंदगी मेरी वाइफ नहीं समझती। तुम मेरी जिंदगी नहीं हो, पर हम दोनों के बीच एक प्यारा सा है,जो मुझे बहुत खुशी देता है।"मैं भी मन ही मन यही सोच रही थी कि तुम से मुझे भी बहुत खुशी मिलती है। पर मैं कभी उनसे मुलाकात में कह नहीं पाई। मेरे पति मुझे बहुत प्यार करते हैं, पर फिर भी मैं इस अनजान रिश्ते में प्यार से बहुत खुश होती हूं।......"क्या हुआ क्या सोचने लगी... कुछ नहीं....यह कह मैंने उनके गालों को बच्चों की तरह खींच कर उनकी बांहों में लिपट गई।

पाल साहब बोले, सुहानी बताओ इस पवित्र रिश्ते के प्यार को मैं क्या नाम दूं।"



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