14
Share




@dawriter

इश्क और आँसू

0 752       
nis1985 by  
nis1985

प्यार थी, मै तुम्हारा प्यार, जानते हो न तुम भी, ये अच्छे से, कितना प्यार करते थे तुम मुझसे कभी तुम्हारा सबेरा, तुम्हारा दिन, तुम्हारी रात सिर्फ एक ही नाम से तो शुरू होती थी और एक ही नाम पर खत्म, ऋतु, ऋतु, ऋतु, कितना खयाल रखा करते थे तुम मेरा, है न, ऋतु तुमने खाना खाया, ऋतु तुम्हारी तबियत, और याद है तुम मुझपे कितनी नजर रखते थे, कितना ध्यान देते थे मेरी छोटी-छोटी बातों का, ऋतु तुम बड़ी बिंदी लगाओ न तुम पे बहुत अच्छी लगती है, अच्छा ऋतु सुनो तुम वो झुमका पहनो न, तुम पे बहुत जचता है, ये बाली उतार दो पलज़्ज़, और सुनो तुम वो हरा सूट पहनना, हरा रंग खूब जंचता हैं तुम पे और काजल जब भी लगाती हो तुम मेरा दिल लूट लेती हो, सच मे कितने वादे किए थे न रवि उस दिन तुमने, तुम्हारी आँखों मे इतना प्यार देखकर सच कहूं मर मिटने को जी चाहता था तुमपर, लगता था हमेशा साथ दोगे तुम मेरा, दुनिया चाहे इधर से उधर हो जाये, पर मेरी शादी कही और लगते ही तुम्हारा प्यार इतना नफरत में बदल जायेगा, सोचा नही था मैंने कभी। 

सारा प्यार, सारे एहसास एक ही पल में मिटा दोगे तुम, मैं सच मे तुम्हे समझ नही पाई रवि, तुम भी तो चुप हो जाते थे, जब भी तुमसे पूछती थी, हम शादी कब करेंगे रवि, पर आज वो टीस क्यों उठ रही है तुम्हारे दिल मे, क्यों मूझे किसी और का होते हुए नहीं देख पा रहे तुम, तुम तो मजबूरियों का हवाला देकर थाम न पाए मेरा हाथ, अब क्यों रो रहे हो किसी गैर के हाथों में मेरा हाथ देखकर। 

सुनो मैंने तो एडजेस्ट कर लिया है, अपने दिल को संभाल लिया है, पर तुम भले कितना भी लोगो को दिखा दो की तुम ख़ुश हो पर सिर्फ मैं जानती हूं कि तुम न तो कभी सम्भल पाओगे और न ही खुश रह पाओगे, मुझसे नफरत करते हो न, बेपनाह नफरत वो भी बिना मेरी गलती के, तो कर लो जी भरके नफरत, एक दिन इसी नफरत की आग में तुम जल जाओगे, क्योंकि मैं सिर्फ तुम्हारी मर्जी से ही आज किसी और की हु और तुमने भी तो शादी कर ली है, अब तो तुलना भी करने लगे हो मेरी उससे है, न, फिर क्यों तुम्हे आज भी चैन नहीं है, क्यों उसके चेहरे में आज भी मेरा अक्स ढूंढते फिरते हो तुम। 

तुम्हें प्यार करना तो आ गया रवि, पर वो नहीं आया जो मुझे चाहिए था, तुम्हें रिस्पेक्ट करना नहीं आया और इतना सब होने पर भी अब मुझे तुमसे बिल्कुल भी नफरत नहीं है, तुम पर बस तरस आता है आज मुझे, हमेशा खुश रहना बस.....पर मुझे अपने दिल से पूरी तरह निकाल के.....!!

बस कहानी यही पर खत्म हुई, एक स्त्री को जीवन मे बस प्यार ही नहीं उसके प्रेमी या पति का सम्मान भी चाहिए, ऋतु जब तक रवि की प्रेमिका थी वो उसे बेपनाह मोहब्बत करता था, ऋतु उस मोहब्बत में ये भूल गयी कि वाकई में रवि उसके प्रेम का सम्मान भी करता है, पर नहीं, रवि मजबूरी वश शादी तो नहीं कर पाया ऋतु से पर उसे किसी और का होते हुए देख उससे बेपनाह नफरत करने लगा। 

सारे एहसास एक ही झटके में खत्म कर डाले उसने, तब भी वो आज चैन से नहीं जी पा रहा है......!!!!

©निशा रावल✍



Vote Add to library

COMMENT