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@dawriter

अधजला

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dhirajjha123 by  
Dhiraj Jha

जल जाना अच्छा है 

अधजले होने से 

मगर तड़प वालों को

इतना जल्दी जल जाना 

नसीब कहाँ 
तुम्हारी याद में जलना भी

अधसूखी लकड़ी का आग में 

जलने जैसा है 
ना सबूते रह पाते हैं

ना राख हो पाते हैं 

बस धुआं धुआं सा 

चारों ओर होता है
इतना धुआं कि तुम्हारी यादें 

भी रो देती हैं

मेरे बरसती आँखों के साथ
धीरज झा



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