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@dawriter

अधजला

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जल जाना अच्छा है 

अधजले होने से 

मगर तड़प वालों को

इतना जल्दी जल जाना 

नसीब कहाँ 
तुम्हारी याद में जलना भी

अधसूखी लकड़ी का आग में 

जलने जैसा है 
ना सबूते रह पाते हैं

ना राख हो पाते हैं 

बस धुआं धुआं सा 

चारों ओर होता है
इतना धुआं कि तुम्हारी यादें 

भी रो देती हैं

मेरे बरसती आँखों के साथ
धीरज झा



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