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@dawriter

अगले जन्म मोहे आपकी बहू ही किजो

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ये गलियाँ ये चौबारा यहाँ आना ना दोबारा अब हम तो भये परदेसी.

मेंहदी हाथों में लग रही थी और बेटियाँ गानों पर थिरक रही थीं। पूरा घर रंग-बिरंगे बल्बों की झालर से दुल्हन की तरह सजा हुआ था। मिठाइयों की खुशबू नाक के साथ-साथ पेट को भी संतुष्ट कर रही थीं। चारों तरफ शादी की रौनक थी।

आप रोना बंद करें, मेंहदी लगने पर दुल्हन का रोना अच्छा नहीं माना जाता। मेंहदी वाली ने कहा

क्या हुआ इशिता, इतना रोओगी तो मेंहदी खराब हो जायेगी,

हाँ दीदी मैं नहीं रो रही ....

नहीं रो रही बोलते-बोलते भी तो रो रही हो। और इतना रोती रही तो तुम्हें जुकाम भी हो जायेगा।

हाँ, अमित भी यही कहते थे न कि मत रोया करो ,रोने से तुम्हें जुकाम हो जाता है। दीदी ...मैं ये शादी कैसे कर सकती हूँ?

पूरे हाल में सन्नाटा छा गया। दीदी का चेहरा बिल्कुल बुझ गया, मेंहदी वाले के हाथ रुक गए।

बेटा ऐसा नहीं बोलते, ...

हाँ पापा आप ही समझाये मैं तो हर तरह से समझा कर थक गयी. दीदी बस बोलती हैं पर मानती नहीं हैं।

समझता हूँ कि ये शादी तुम्हारे लिए आसान नहीं है, पापा इशिता के पास आकर बैठ गए "मालूम है माता-पिता अपने बच्चों की शादी क्यों करते हैं क्योंकि जब बच्चा जन्म लेता है तो उसके लिए हमेशा के साथी उसके माता-पिता हो जाते हैं. बच्चा बड़ा होने लगता है और माता-पिता बच्चे, सोच का अंतर, पीढियों का अंतर बीच में आने लगता है। फिर माता-पिता इस दुनिया में पहले आये हैं तो जायेंगे भी पहले न, इसलिए वो अपने बच्चे के लिए एक नया forever friend ढूंढते हैं जीवन साथी के रुप में, वो साथी जो माता पिता की तरह, निस्वार्थ, बिना किसी शर्त के पूरे जीवन उसका साथ दे। और हम भी तुम्हें वही साथी देना चाहते हैं।"

पर पापा मेरा साथी तो अमित था न उसने तो मेरा साथ नहीं दिया न, अब किसी और...,.... पापा किसी और को वो जगह कैसे दे पाऊँगी मैं? पापा मुझसे नहीं होगा।

पापा की आँखो में भी आँसू थे।

"बेटा जीवन पानी की तरह है वो बहता रहे उसी में उसकी और उससे जुड़े लोगों का सार है। जाने वाले के साथ इंसान जीना नहीं छोड़ देता। मैं उसकी माँ हूँ हर पल उसका चेहरा, उसकी बातें मेरे साथ रहती हैं जानती हूँ तुम्हारे साथ भी यही है पर बेटा हम अपना जीवन जी चुके तुम्हारे सामने तुम्हारी पूरी जिंदगी है। तुम्हारे माता पिता ने अमित की पत्नी के रुप में तुम्हारे भविष्य के सपने संजोये थे। पर ईश्वर को मंज़ूर नहीं था वरना बड़ी से बड़ी विपत्ति से लोग बच जाते हैं। वो भी बच जाता शायद "

माँ का गला भर आया था हम पूरा जीवन तुम्हारा साथ नहीं दे सकते।

पर माँ

"तुम पढ़ी लिखी हो, नौकरी भी कर रही हो पर जानती हो, जब एक सांस चढ़ती है और दूसरी उतरती है उसमे प्राण बसे होते हैं ये दोनो सांसों का जोड़ा है पति पत्नी। हम तुम्हें उस जोड़ों में देखना चाहते हैं मैं जिसे तुम माँ कहती हो और ये जिन्हे तुम पापा कहती हो तुम्हारे सास ससुर तुम्हारा कन्या दान करके वास्तव में तुम्हारे माता पिता बनना चाहते हैं नये जीवन का स्वागत करो।"

माँ, अगले जन्म भी मोहे आपकी ही बहु कीजो।

Image Source: vimeo



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