swa

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मां का नायाब मोती

वो झांककर बंगले में देखने की कोशिश कर रहा था, चार चक्कर लगा चुका था अगल-बगल पूरे बंगले के।

बहनजी टाइप

8 दिन हो गये । सृष्टि जिद पकड़कर बैठी है । नौकरी करेगी। आख़िर उसकी डिग्री किस काम की है ? सिर्फ घर संभालती रहेगी? आखिर वो गोल्ड मेडलिस्ट है। ऋषभ बताओ मैं क्यों नहीं कर पाऊंगी नौकरी? कितनी लड़कियां करती है। तुम्हें क्या लगता है? मैं नौकरी और घर मैनेज नहीं कर सकती?

हादसा

वास्तविक घटना को कहानी का रूप देने की कोशिश की है ड्राइव करते समय सतर्कता बरतें।

दागदार हसीन चेहरा

इतनी खूबसूरत भगवान किसी किसी को खूबसूरती भी बेशुमार देता है मैं उसकी झील सी आंखों में डूब कर खो जाना चाहता था हर पल हर घड़ी अब बस मुझे उसी का ख्याल रहता था

खलनायिका

रिनी कभी अपनी मां को मां नहीं समझ पाई। जिस मां को उसकी मां के स्थान पर लाया गया था। उसने हमेशा सरला को एक सबसे बड़ी खलनायिका समझा और सरला कभी अपने आप को चाह कर भी अच्छी मां साबित नहीं कर पाई।

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