sunilakash

0

Most recent posts

कहानी-- नारी अधिकारों के शिकार

नारी उत्पीड़न को रोकने के लिए बने कानूनों को मुट्ठी में पकड़कर, पति के परिवार की नारियों और खुद पति को भी आतंकित रखने वाली चालाक महिलाओं की कहानी।

लघुकथा-- नजरिया

कई लोग सामाजिक समस्याओं के बारे में बहुत अच्छे तरीके से सोचते हैं किंतु व्यवहार में बिल्कुल उल्टा करते रहते हैं, और उन्हें कभी यह अहसास नहीं होता कि वे उल्टा कर रहे हैं।

ग़ज़ल "धूप धोखों की मिली"

जीवन में कई बार हमारे विश्वास तब कमजोर पड़ जाते हैं जब हम उनके रहते भी दुख और अपमान झेलते हैं।

इन प्रतिकूल हवाओं में

आजकल के दौर में सच्चाई के साथ जीवन जी पाना कठिन हो गया है।

ग़ज़ल

किससे करे शिकायत ठग लें जिसे उजाले

लोगों का न्याय

वह निर्दोष व्यक्ति जिसने इंसाफ की बात कही थी, लोगों की मार से छूटने के लिए छटपटा रहा था और वहां मौजूद लोग अब भीड़ में मिलकर या तो तमाशा देख रहे थे, या उसे पीट रहे थे।

शेषनाग

"नई रोशनी" दैनिक की प्रेस में अखबार की स्थापना से लेकर आज तक, पचास वर्षों में ऐसा कभी नहीं हुआ था।

बापू देख रहे हो ना?

बापू ! देख रहे हो ना अपने सपनों का भारत ? तुम्हारी--- अहिंसा की मूरत आकंठ रक्त में डूब चुकी है।

तुम कब आओगे ?

दिक्-दिगंत का कलरव आज संगीत बना है। जीवन का ये एकाकीपन फिर गीत बना है॥ सुखद मनोहर वसंत बना है शीत आजकल। विरह-व्यथा का दर्द पुन: मनमीत बना है ॥ हृदय-उमंगें लगी सँवरने। तन्हाई का जाल कुतरने॥1॥

🌴 प्रकृति ने घोले रंग 🌴

प्रकृति ने रंग घोल दिये हैं हल्के-गहरे प्यारे-प्यारे। मन को बहुत भले लगते हैं दृश्य सलोने न्यारे-न्यारे।

देश तब मरता है !

काम चल जाता हो जब बातों-ख्यालों से। जूझना पड़ता न हो रोटी के सवालों से॥

आसमान बोलता है !

विश्वास है इंसान का, जो विपदाओं मॆं डोलता है।

Some info about sunilakash

EDIT PROFILE
E-mail
FullName
PHONE
BIRTHDAY
GENDER
INTERESTED IN
ABOUT ME