soni

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कुछ तो बाकी है

कुछ तो बाकी है गुजरे लम्हों की यादों का अहसास बाकी है, जो करना था पर ना कर पाई उसकी टीस बाकी है,

एक छोटी सी कोशिश बेटी के मन की बात कहने की

लोग कहते है कहीं कुछ छुटा तो नहीं अब उन्हें कौन समझाए कुछ नहीं सबकुछ तो छुट गया नैहर में...

सच

फिसलते पाँव अक्सर झूठ की जमीन पर मिले हैं,

अनाथालय -वृद्धाश्रम

कहीं अपने नहीं मिलते, कहीं अपने छोड़ जाते हैं,

एक ऐसा गीत गाना चाहती हूं, मै..

एक ऐसा गीत गाना चाहती हूं, मै.. सुर से सरगम को मिलाना चाहती हूँ, मै,

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