nis1985
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रिश्तों की कॉम्प्लिकेशन

आखिर वो दिन आ ही गया जब जतिन ने रिया से अपने दिल की बात कह दी,उस दिन जतिन बहुत सहमा हुआ सा था उसे पूरा विश्वास था कि रिया उसे ना नहीं बोलेगी

गुमगश्त सी खामोशियाँ

चलो एक ऐसे जहाँ, जहा बस सुकूँ मिले, करके आलिंगन तुम, मिटा दो सारे गिले......

कांच हु अभी....

कांच हूँ अभी,खुद को तराशना है बाकी, जब आइना बन जाऊं,तब दुनिया देखेगी......

पवारिश

परवरिश ........ TRUE story सुबह की भागमभाग ओहो इतना टाइम हो गया अब परी को तैयार करना है,उसका टिफिन और फिर नीचे भी तो जाना है

दरकते एहसास

दरकते एहसासों को एक साँस मिल गयी, तुमसे मिलन की फिर आस बढ़ गयी.....

मंजिल

हृदय आतुर है कुछ कर जाना है, जीवनपथ पे आगे बढ़ जाना है....

जिंदगी का फलसफा

धुआँ धुआँ सा है जहाँ, रौशनी बहुत कम है.....

बाबूजी वो गुड़िया ला दो

आज छुटकी ने फिर से अपने मजदूर पिता से एक फरमाइश करदी....बाबुजी आज तो हमको वो गुड़िया ही चाहिये बस जो हमने दुकान पे देखी थी...

अपेक्षाएं या आत्मविश्वास

अपेक्षाएं या फिर कह लीजिए उम्मीदे....हम्ममम्म इस शब्द से शायद कोई भी अछूता रहे, ये इंसानी फितरत का ही एक हिस्सा है, पर ये जो उम्मीदे या अपेक्षाएं होती है,अपनो से कितनी बढ़ जाती है ना!!!

वो अनकहा सा इश्क

सीमा को अजय से कोई शिकायत नही थी , उसे अपने त्याग और समर्पण का कोई मोल भी नही चाहिये था

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