harish999

1

Most recent posts

ज़िंदगी रोटी से चलती है, गोलियों से नहीं

हर कोई अपनी बीन ऐसे बजा रहा है जैसे जनता सांप हो और वो नासमझ खुद अभी अभी आसमान से टपका हो. चाहे कितना भी हंगामा कर लीजिये,

घर का भेदी लंका ढहाए

दोस्त हमेशा पराया और दुश्मन हमेशा अपना ही निकलता है. उसकी दुश्मनी की वजह भी साफ होती है. कभी एक ही रास्ते के हम राही जब एक-दूसरों की जरूरत या उम्मीदों पर खरा नहीं उतरते, तो वह आपस में दुश्मनी की शक्ल में अख्तियार कर लेते है.

इंसानी जिद में दफन हो गए पेड़

आज महानगरों में सांस लेने के लिए शुद्ध हवा तक मयस्सर नहीं है, कंक्रीट के जंगलों के लिए पेड़ों को दफन करके हाउसिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी और हाइवे के चौड़ीकरण के लिए पेड़ों को कटान के चलते पर्यावरण संतुलन गड़बड़ा गया है

हल्ला-गुल्ला नहीं, मंथन की जरुरत

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाने के बजाय अपने गिरेबान में झांकना बेहतर होगा. ये रोज-रोज की चिक-चिक बाजी से अच्छा है, विपक्षी दलों को मंथन करते हुए अपने आचरण में सुधर लाने की जरुरत है.

आंतकी घटनाएं और भारतीय सेना का धैर्य

जब ख़ामोशी में सुलगते अंगारे और दिल ही दिल में सिसकते शहीदों के परिजनों की बददुआ बाहर निकलेगी तब क्या होगा.

दिल की सुनो, दिमाग से चलो

दिल की बात सुनते हुए दिमाग से काम किया जाए तो सफलता की उम्मीद बहुत ज्यादा रहती है. दोनों ही हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है.

मुसीबत का नाम है जिंदगी

जिंदगी मुसीबतों से निकलकर निखरती, मुस्कराती है. इसलिए हंसते-मुस्कराते हुए खुद को तैयार करते रहिए आने वाली मुसीबतों से लड़ने के लिए.

जब जड़ों में पनपता हो भेदभाव

भारत को डिजिटल इंडिया बनाने पहले कुछ सवालों के सकारात्मक जवाब तलाशने होंगे।

Some info about harish999

EDIT PROFILE
E-mail
FullName
PHONE
BIRTHDAY
GENDER
INTERESTED IN
ABOUT ME