gaurav97p

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नज़्म

प्रेम में भी एक तन्हाई है पीड़ा है जो इससे सहन कर लेता है और प्रेम को पा लेता है वो ही सत्यार्थ प्रेम का हकदार है।।

आशियाँ

प्रेम जीवन है अगर इसे सत्यता के साथ जिया जाए।। एक और मेरी कविता उस प्रेम के नाम जो मैं हर पल जीता हूँ।।

रुखसती

ये रचना हैं उन सभी को समर्पित है जो समाज के झूठे मुखोटे के शिकार होते हैं अच्छा है नियम बनाना लेकिन ऐसा न हो की जो नियम जीने के लिए बनाये हैं उसके लिए आप उन प्रेम करने वालो की ज़िन्दगी बर्बाद कर दे जो सच में नहीं जी सकते हैं एक दूजे के बिना ||

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