prakash shakya

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"एक और कविता "

बालक ह्रदय से निकली सरलतम , शुद्धतम भावनाओं से समाहित कविता "एक और कविता "

आत्म दीपो भवः

एक साल हो गए इस घटना को, छोटू अब स्कूल जाता है। माँ-बेटे दोनों ही बहुत खुश हैं l इस एक घटना ने मेरे दृष्टिकोण को काफीहद तक बदल दिया था। क्यों कि शायद मन का अँधेरा मिट गया था। आत्मा का दीपक जल उठा था। अंतर्मन का अंधकार मिट गया था। इसलिए मैंने इस संस्मरण का शीर्षक “आत्मदीपो भवः” रखा है।

किडनी के पत्थर

मनोशारीरिक भाव में “किडनी के पत्थर” उन आंसुओं का मूर्त रूप है जो समय पर बहे नहीं, जिन्हें हमने अपने भीतर दबा दिया? हमारे शरीर की उर्जा मनोशरीर से मुक्त नहीं हो पायी, उसने पथरी का आकर ले लिया, वह सख्त हो गयी l

रिपोर्ट कार्ड

पिता ,पुत्री और उनकी स्कूल टीचर के बीच मजेदार संवाद , और पिता का अपनी पुत्री के प्रति प्यार जताना । ये शानदार और मजेदार कहानी अवश्य पढे ☺

सबै सयाने एक मत

कई बार हम वास्तविकता जाने बगैर ही परिस्थितियों को दोष देते हैं। लेकिन कई बार केवल परिस्थितियाँ या साधन ही दोषी नहीं होते अपितु हमारी सोच मे ही कोई दोष रह जाता है , और हम आत्मविश्लेषण किए बगैर ही किसी को भी दोष देते फिरते हैं ।

कर्मफल

क्या हमे इस जन्म मे भी पूर्व जन्म के कर्मों के फल भोगना होता है ? हमे इस जन्म मे मिलने वाले सुख या दुख का क्या पूर्व जन्म से भी कोई संबंध है या ये एक कोरी कल्पना मात्र है । ऐसी जिज्ञासा सदैव ही लोगों के मन मे बनी रहती है अतः एक छोटा स विश्लेषण .....

पीली चुनरी

ये एक अधूरी प्रेम कहानी है।जिसकी शुरुआत तो हुई , पर अपने मुकम्मल मुकाम तक न पहुँच सकी ।

Some info about prakash shakya

  • Male
  • 09/04/1996

i write about what makes my heart sing. and that is the only way i am going to get real feedback on what i am trying to do.

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