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ज़िंदगी रोटी से चलती है, गोलियों से नहीं

harish999   12 views   2 years ago

हर कोई अपनी बीन ऐसे बजा रहा है जैसे जनता सांप हो और वो नासमझ खुद अभी अभी आसमान से टपका हो. चाहे कितना भी हंगामा कर लीजिये,

घर का भेदी लंका ढहाए

harish999   25 views   2 years ago

दोस्त हमेशा पराया और दुश्मन हमेशा अपना ही निकलता है. उसकी दुश्मनी की वजह भी साफ होती है. कभी एक ही रास्ते के हम राही जब एक-दूसरों की जरूरत या उम्मीदों पर खरा नहीं उतरते, तो वह आपस में दुश्मनी की शक्ल में अख्तियार कर लेते है.

"ज़िन्दगी है"

ayushjain   15 views   2 years ago

"कहीं रोती ज़िन्दगी है कहीं हँसती ज़िन्दगी है

तेरा मेरा प्यार....!

chandrasingh   19 views   2 years ago

जब लहरे मुझे थोड़ा भीगो के कुछ कहने लगी, तो मै भी निःशब्द होकर खो गया कुछ यूं ही उनमें।

मुंबई कॉलिंग

kumarg   28 views   2 years ago

ट्रकवाला ओवरटेक करने लगा तो ड्राईवर ने गाड़ी का एक चक्का साइड में उतार दिया । बगल से गुजरती लड़कियां साइकिल रोककर खड़ी हो गई । गाड़ी पास आते ही सब ने एक साथ हाथ हिलाया "बाय बाय " एक गर्व भरी मुस्कान मूंछों के नीचे छुपाते हुए बाबूजी बोले "वहाँ लफंगई थोड़ा कम करिएगा । "

घूंघरू

kumarg   53 views   2 years ago

आजकल उसके घूंघरूओं से न जाने माँ को क्यों चिढ़ होने लगी है । जबकि अब तो जब चलती है तो घूंघरूओं की छनकार सुन हर आता जाता उसे कितनी हसरत से निहारता है । माँ बाप के सपने से इतर उसने भी एक सपना देखा सिल्वर स्क्रीन पर चमकने का । माँ को समझा बुझाकर पिता को बिना बताये वो बम्बई पहुंच गई ।

Mother-God In Flesh

troubleseeker11   11 views   2 years ago

A mother's feelings about her child as she grows old. The bond is described here.

बच्चो के राम, बड़ों के राम से अलग है..

shipratrivedi   23 views   2 years ago

राम की समझ आजकल बच्चो को बड़ों से ज्यादा है. बड़ों ने तो राम को एक समस्या बना दिया है जो कभी लोगो के बीच तो कभी कचहरियो मे सुनी जा रही है..

औरत की जंग

kumarg   41 views   2 years ago

मच्छरहट्टे में दो किलो रेहू तौलाने के बाद विधायकजी के पोते ने पैसे देने से इनकार कर दिया तो गंगिया मलाहिन ने फांसुल चला दिया । दूर्योग से निशाना ऐसा चूका की नेताबीज जीवन भर के लिए बियाह से वंचित हो गये ।

vivaah: ek nayi shuruaat

shashankbhartiya   57 views   2 years ago

एक टूटा हुवा दिल,और उस टूटे हुवे दिल से प्यार करने वाली,उम्मीदों से भरी,आँखों में सपने सजाये हुवे एक नवविवाहिता...

प्रेम व्यथा

Amol Chimankar   6 views   2 years ago

मनुष्य के जीवन में मात्र उसके जीवित रहने हेतु,अन्न,वस्त्र,निवारा की अत्यंत आवश्यकता है,परन्तु-वास्तविकता जीवन की इन सब क्रियाओं से भी कही और भी महत्वपूर्ण हो जाती है,जब जीवन में प्रेम का आगमन हो जाता है। किंतु-आज का प्रेम मात्र युवक और युवतियों हेतु-मात्र शरीर की विलासिता का साधन रह गया है।

चल चलें

poojaomdhoundiyal   7 views   2 years ago

वह बचपन और उसकी यादें अकसर मेरे संग आंखमिचोली करती हैं। माना कि आज भी जीवन खुशहाल है पर वह बचपन वाली अमीरी सच में बहुत याद आती है।

जिन्दगी से कोई वादा तो नहीं था..!

chandrasingh   30 views   2 years ago

तुम बिन जीने का इरादा नहीं था जिन्दगी। पर मैं अब तुम बिन ही जीना चाहता हूँ। अब मुझे तुम्हारी जरुरत भी नहीं | इस बार जिन्दगी बड़ी मायूस होकर मेरे पास से चली गयी। जिन्दगी तुमसे कोई वादा नहीं था मेरा। हाँ लेकिन तेरे बिना जीने का अब इरादा है मेरा। सुबह हो गया।

माँ ! माँ! मेरी माँ

poojaomdhoundiyal   17 views   2 years ago

मृत्यु के लिए कई रास्ते हैं पर जन्म लेने के लिए सिर्फ एक ……..माँ !

A CURSED CHILD

khyati   26 views   2 years ago

This story is about a boy who is devoid of her mother's love and remembers her on the mother's day. he craves for her but she is nowhere to be seen.