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बहाव के विरुद्ध

Mohit Trendster   72 views   2 years ago

सपनों के शहर में सपनों को चकनाचूर होता देखने के बाद इन प्रतिभावान गायकों ने साधारण निजी नौकरियां पकड़ ली। दोनों तरफ से दर्ज हुए मामले या तो रद्द हो गए या अनिर्णीत घिसटते रहे। किसी भी केस में सुरजीत और देविका को सज़ा नहीं हुई थी पर झूठ इतनी बार दोहराया जा चुका था कि आम जनता आरोपों को सच मानती थी।

पापा तुम्हारे नाम एक खत

shashank25   50 views   2 years ago

पापा आप जानते हो मम्मी सुबेरे से चुप हो गयी है, कुछ खायी नई, कुछ बोलती नई । दिन भर आपको फोन करती रही आप फोन उठाये नई तो रोने लगी और आज तो टीवी में सिरियल की जगह न्यूज देखती रही । दादी भी चुप चाप बाहर वाले बरामदे में बैठी है जहाँ आपकी वो फ़ौजी ड्रेस वाली फोटो टंगी है ।

विकिपीडिया और बिकाऊ मीडिया के पार की दुनिया

Mohit Trendster   65 views   2 years ago

हरीश शांत स्वर में मेघना को समझाने लगे - “चिंता मत कर मेघू बेटे! ऐसे करियर बर्बाद होने लगते तो मैं कबका एक्टिंग छोड़ चुका होता। तेरा वीडियो मैंने देखा है। एक पार्सल भेजा है तुझे, बाकी फ़ोन पर नहीं समझाऊंगा। अपने मैनेजर और टीम को बुला ले उन्हें समझा दिया है, उनकी बात ध्यान से सुनकर वैसा ही करना… ”

उम्मीदों की कश्ती- १

abhidha   123 views   2 years ago

पिछली बारिश पहाड़ों से घिरे छोटे से कस्बे में मैं एक स्टडी टूर पर था, कुछ जड़ी-बूटियाँ खोजने गया था।यूथ हॉस्टल से सुबह-सुबह निकल पड़ता मैं।अभी अपने कमरे से बाहर ही आया था कि केयर टेकर ने आवाज़ दी- 'साब जी वो जन्तो के यहाँ पकोड़े बहुत अच्छे बनते हैं, लौटते में खाते आना, खाने में देर हो जाएगी

जब जड़ों में पनपता हो भेदभाव

harish999   11 views   2 years ago

भारत को डिजिटल इंडिया बनाने पहले कुछ सवालों के सकारात्मक जवाब तलाशने होंगे।

कागा सब तन खाइयो........!

chandrasingh   104 views   2 years ago

दुनियाँ के वे तमाम रिश्तें जो स्वार्थ , जरुरत , पर टिके हैं जो आपसे हमेशा कुछ ना कुछ लेने की बाँट ही जोहते हैं।

झुलसी दुआ (कहानी) #ज़हन

Mohit Trendster   147 views   2 years ago

उसकी दिनभर की थकान नींद से कम बल्कि घरवालों से घंटे-आधा घंटे बातें कर ज़्यादा ख़त्म होती थी। अक्सर उसने कितने लोगो को कैसे बचाया, कैसे बीमारी में भी स्टेशन आने वालो में सबसे पहला वो था, कैसे घायल पीड़ित के परिजन उस से लिपट गए...

और फिर मनीशंकर भाग गया (एक कहानी युवाओं की)

dhirajjha123   117 views   2 years ago

अब वो अपने दायित्वों के निर्वाह से बिल्कुल नहीं डरता था और ना ही कहीं भाग जाने के बारे में सोचता था । कुल मिला कर वह अपनी उलझनों से बाहर निकल चुका था ।

दधीचि

kumarg   202 views   2 years ago

जमाने से उलट बेटी को कान्वेंट में डाला और बेटे को सरकारी स्कूल में। पत्नी ने आपत्ति की तो उसको समझाया दोनों कान्वेंट में पढ़े इतनी हमारी हैसियत नहीं है और बेटे का क्या है नहीं भी पढ़ेगा तो मजदूरी करके जी लेगा। बेटी जात है समय को देखते हुए उसका पढ़ा लिखा होना जरुरी है।

दिल की सुनो, दिमाग से चलो

harish999   27 views   2 years ago

दिल की बात सुनते हुए दिमाग से काम किया जाए तो सफलता की उम्मीद बहुत ज्यादा रहती है. दोनों ही हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है.

उम्मीदों की कश्ती-७

abhidha   64 views   2 years ago

बर्फीले तूफ़ान के गुज़रते ही हमने अपनी चढ़ाई शुरू की। अब धीरे-धीरे जैसे-जैसे हम ऊपर चढ़ रहे थे हमें ऑक्सीजन की कमी महसूस रही थी परन्तु अलख में पता नहीं कहाँ से एक नयी ऊर्जा का संचार हो गया था

"…और हमने उसे पत्थरों से मारा!"

Mohit Trendster   12 views   2 years ago

"हैलो! आगरा फायर सर्विस स्टेशन।" "हैलो, यहाँ शाहगंज इलाके कि ट्रांजिट ईमारत मे लग गयी है आग..... जल्दी मदद भेजिए।" साइरन बजाती बढ़ रही थी फायर वैन, हर गुज़रते पल के साथ उसमे बैठे विकल का चैन, ईमारत वासियों पर गृहण सा लगा, उनकी उम्मीद का एकमात्र सहारा जाम में फंसा।

स्वप्न संगिनी

shivamtiwari   1 views   2 years ago

एक बाल मन की महत्वाकांछाएँ व सपने किस प्रकार से उम्र का रास्ता अकेलेपन के साये में तय करते-करते प्रेम के 'ढाई अक्षर' में विलीन होने को मचलने लगती है उसी अनुभूति को कविता में पिरोने की एक कोशिश।

खलनायिका

swa   33 views   2 years ago

रिनी कभी अपनी मां को मां नहीं समझ पाई। जिस मां को उसकी मां के स्थान पर लाया गया था। उसने हमेशा सरला को एक सबसे बड़ी खलनायिका समझा और सरला कभी अपने आप को चाह कर भी अच्छी मां साबित नहीं कर पाई।

उम्मीदों की कश्ती-२

abhidha   96 views   2 years ago

यूथ हॉस्टल पहुँचकर जूता एक तरफ फेंक केयर टेकर को आवाज़ दी- काका खाने में क्या है? वो बोला- साब,आज तो जीरा आलू, रोटी और दाल तड़का ही है