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बुर्का बेहया

Amritanshu Yadav   34 views   2 years ago

प्रचलित सामाजिक रूढ़ि एवं समाज मे फैली धार्मिक अराजकता पर तंज कसती हुई हिंदी के सबसे युवा रचनाकार की एक कृति..

बरगद

Amritanshu Yadav   7 views   2 years ago

एक कविता है जो समसायिक विश्व में स्वार्थीपन पर तंज कसती है...

That Lady

nischay   19 views   2 years ago

It always wondered me that what it's like to be the old person, who just waits for death to engulf his/her tedious and painful life.

घर क्यों बन जाता है नरक

harish999   17 views   2 years ago

हम सत्ता पलटने और दुश्मन को धूल चटाने में माहिर है, तो फिर भी बच्चों को संस्कारवान बनाने में क्यों नाकाम साबित हो रहे है?

जाने वालों ज़रा, मुड़ के देखो इन्हें..!

chandrasingh   24 views   2 years ago

देह से अधूरे है तो क्या आत्मा तो पूरी है न, मुस्कुराहटों में मिलावट तो नहीं है ना, इक सवाल अक्सर मन में उठता है कि विकलांग कौन? जिसकी देह अधूरी है वो या जिसे इश्वर ने देह तो सुन्दर दे दी लेकिन मन की सुन्दरता नहीं दिया ह्रदय में किसी के लिए प्रेम,?

उम्मीदों की कश्ती-५

abhidha   78 views   2 years ago

सारी रात मुझे नींद नहीं आई। देर रात मैं उठकर कागज़ पर कुछ लिखकर कश्तियाँ बना रहा था। अगली सुबह मैं झरने की ओर भागा देखा तो अलख नहीं थी।

​चले आओ

dhirajjha123   16 views   2 years ago

तेजाबी बूंदों ने बना दिया है थोड़ा सा बदसूरत जो छटपटा रही है इस अनचेते हमले से

A DATE WITH DEPRESSION

mehakmirzaprabhu   26 views   2 years ago

I am so sleepy. Eye lids are heavy as wet winter blankets. Phone is ringing. I forgot to keep it off hook and I have only myself to blame for that. I have only myself to blame for many more things.

मां का नायाब मोती

swa   103 views   2 years ago

वो झांककर बंगले में देखने की कोशिश कर रहा था, चार चक्कर लगा चुका था अगल-बगल पूरे बंगले के।

गरीबी की दिल कचोटती तस्वीर

rashmi   30 views   2 years ago

जहाँ अमीरों के बच्चों के कई शौक और इच्छाएँ पूरे करने में दिन बीतते है वही गरीब बच्चों का पूरा दिन केवल खाने की तलाश में बीत जाता है. फिर जो कुछ भी मिलता है उसे भी मिल बाँट कर खाते है. ये गरीब बच्चें भी दिल के बड़े अमीर होते है. बस ऐसी ही कुछ स्थिति को अल्फाज़ देने की एक कोशिश.

काश में दबी आह!

Mohit Trendster   29 views   2 years ago

एक अधूरे प्यार की खैर में खुशी ढूँढती औरत और अपने ख्वाबों का क़त्ल कर चुके आदमी की कहानी।

तर्पण

kumarg   137 views   2 years ago

वो दौड़कर कटोरी में गंगाजल ले आई । बटेसर सर पर हाथ धड़े वहीं बैठे रहे । भौजाई सुरक्षित दूरी से दुआरी पर खड़े होकर रमेसर से इहलोक से प्रस्थान का आग्रह कर रही थी और वीर रस की कविताओं से दलन के इस कंटक को मिटा डालने का आवाहन ।

​तुम्हारे बिना वो खुद खुद का भी नहीं

dhirajjha123   16 views   2 years ago

हर बात पर रूठना और रूठ कर कह देना कि अब जा रहा हूँ मैं

कलरब्लाइंड साजन

Mohit Trendster   126 views   2 years ago

हॉस्पिटल में हुई जांच में रूही को पता चला कि आशीष को झूठ बोलना आता है। वो कई महीनों से छोटा मर्ज़ मान कर अपने फेफड़ों के कैंसर के लक्षण छुपा रहा था, जो अब बढ़ कर अन्य अंगो में फैल कर अंतिम लाइलाज चरण में आ गया था। अब आशीष के पास कुछ महीनों का वक़्त बचा था। दोनों अस्पताल से लौट आये।

A GOODBYE LETTER

rumana7   10 views   2 years ago

#antisuicide Guys fight the bad times.. You will surely encounter a bright day after a murk night..! Thoughts of committing suicide are common but to combat them is more crucial! Remember Quiting is easy but it shows your cowardice. Your struggle will make u stronger .