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समूह वाली मानसिकता (लेख)

Mohit Trendster   2 views   1 year ago

समूहों की रेखाओं में उलझे समाज का विश्लेषण।

​शायद इसीलिए हम हैं चरित्रहीन

dhirajjha123   1 views   1 year ago

शायद इसीलिए हम हैं चरित्रहीन अगर यही है चरित्र का हीन हो जाना है तो हम बिना चरित्र के ही खुश हैं अपनी बेरंग दुनियां में

स्वप्न संगिनी

shivamtiwari   1 views   1 year ago

एक बाल मन की महत्वाकांछाएँ व सपने किस प्रकार से उम्र का रास्ता अकेलेपन के साये में तय करते-करते प्रेम के 'ढाई अक्षर' में विलीन होने को मचलने लगती है उसी अनुभूति को कविता में पिरोने की एक कोशिश।

खौफ की खाल (नज़्म)

Mohit Trendster   1 views   1 year ago

खौफ की खाल उतारनी रह गयी, रुदाली अपनी बोली कह गयी... रौनक कहाँ खो गयी? तानो को सह लिया, बानो को बुन लिया। कमरे के कोने में खुस-पुस शिकवों को गिन लिया।