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अपवित्रता??....... वो पाँच दिन (पीरियड्स)

Maneesha Gautam   74 views   1 year ago

जिस खून को लोग अपवित्र समझते हैं वे यह क्यों नहीं समझते कि 9 महीने तक माँ के पेट में उसी खून से उनका विकास और पालन पोषण होता है।

उम्मीदों की कश्ती-५

abhidha   78 views   2 years ago

सारी रात मुझे नींद नहीं आई। देर रात मैं उठकर कागज़ पर कुछ लिखकर कश्तियाँ बना रहा था। अगली सुबह मैं झरने की ओर भागा देखा तो अलख नहीं थी।

महिलाओं का पहनावा

nehabhardwaj123   1.59K views   1 year ago

ये कहानी है वंदना की, जो अपनी गर्भावस्था के कारण पूजा में साड़ी की जगह सूट पहन लेती है, लेकिन अपनी नन्द साक्षी के कारण अपनी सास को समझाने में भी सफल हो जाती है

गरीबी की दिल कचोटती तस्वीर

rashmi   30 views   2 years ago

जहाँ अमीरों के बच्चों के कई शौक और इच्छाएँ पूरे करने में दिन बीतते है वही गरीब बच्चों का पूरा दिन केवल खाने की तलाश में बीत जाता है. फिर जो कुछ भी मिलता है उसे भी मिल बाँट कर खाते है. ये गरीब बच्चें भी दिल के बड़े अमीर होते है. बस ऐसी ही कुछ स्थिति को अल्फाज़ देने की एक कोशिश.

काश में दबी आह!

Mohit Trendster   29 views   2 years ago

एक अधूरे प्यार की खैर में खुशी ढूँढती औरत और अपने ख्वाबों का क़त्ल कर चुके आदमी की कहानी।

अक्स

Sharma Divya   520 views   1 year ago

सच्चे प्रेम की दास्तां। दो प्यार करनेवाले एक दूसरे को अपनी रूह से चाहते है अगर प्रेम सच्चा हो तो जीने की वजह देता है।

​तुम्हारे बिना वो खुद खुद का भी नहीं

dhirajjha123   16 views   2 years ago

हर बात पर रूठना और रूठ कर कह देना कि अब जा रहा हूँ मैं

समूह वाली मानसिकता (लेख)

Mohit Trendster   2 views   1 year ago

समूहों की रेखाओं में उलझे समाज का विश्लेषण।

हमको उठा लो भगबान (कहानी जैसा ही कुछ)

dhirajjha123   9 views   2 years ago

अच्छा सिला दिया तुने मेरे प्यार का यार ने ही लूट लिया घर यार का” ई गीत 36वीं बार बज रहा था । चाईना का फोन, कान फाड़ू अबाज, लोराएल झोराएल आँख के सामने खुलल दस रुपया में ली हुई दर्द भरी सायरी के किताब आ अँटा चालने वाला चलनी के जैइसे छलनी हुआ रमजनमा के दिल । दू महीना हो गया फूलबतिया के सादी हुए ।

स्तनपान

rishav   30 views   2 years ago

सामाजिक तबके कभी एक से दृष्टिकोण नहीं पाते! नज़र के साथ बदलते हैं। स्तनपान कराना क्या शर्म का मुद्दा है?

घूंघरू

kumarg   53 views   2 years ago

आजकल उसके घूंघरूओं से न जाने माँ को क्यों चिढ़ होने लगी है । जबकि अब तो जब चलती है तो घूंघरूओं की छनकार सुन हर आता जाता उसे कितनी हसरत से निहारता है । माँ बाप के सपने से इतर उसने भी एक सपना देखा सिल्वर स्क्रीन पर चमकने का । माँ को समझा बुझाकर पिता को बिना बताये वो बम्बई पहुंच गई ।

जीवन में विलेन ढूँढने की आदत (लेख)

Mohit Trendster   20 views   1 year ago

बचपन से हमें बुराई पर अच्छाई की जीत वाली कई गाथाओं का इस तरह रसपान करवाया जाता है तो कोई भी बुरा नहीं बनना चाहता। अब सवाल उठते हैं कि अगर कोई बुरा नहीं तो फिर समाज में फैली बुराई का स्रोत क्या है? दुनिया में सब अच्छे क्यों नहीं?

मुंबई कॉलिंग

kumarg   28 views   2 years ago

ट्रकवाला ओवरटेक करने लगा तो ड्राईवर ने गाड़ी का एक चक्का साइड में उतार दिया । बगल से गुजरती लड़कियां साइकिल रोककर खड़ी हो गई । गाड़ी पास आते ही सब ने एक साथ हाथ हिलाया "बाय बाय " एक गर्व भरी मुस्कान मूंछों के नीचे छुपाते हुए बाबूजी बोले "वहाँ लफंगई थोड़ा कम करिएगा । "

निराशा

Rajeev Pundir   263 views   1 year ago

दूसरों की मजबूरियां किस तरह हमारी समझ में नहीं आती और हमारे लिए एक पहेली बन कर रह जाती है , पढ़िए इस कहानी में I

तेरा मेरा प्यार....!

chandrasingh   19 views   2 years ago

जब लहरे मुझे थोड़ा भीगो के कुछ कहने लगी, तो मै भी निःशब्द होकर खो गया कुछ यूं ही उनमें।