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@dawriter

​तुम्हारे बिना वो खुद खुद का भी नहीं

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dhirajjha123 by  
dhirajjha123

हर बात पर रूठना 

और रूठ कर कह देना

कि अब जा रहा हूँ मैं 

बच्चकाना है 

जवानी के आखरी पड़ाव 

पर खड़े लड़के के लिए तो

सच में बच्चकाना है 
वह लड़का जो बहादुर है 

वो लड़का जो हर परिस्थिती से

लड़ने की हिम्मत रखता है 

तुम्हारे लिए उसका रो देना 

और रो कर कहना कि जा रहा हूँ मैं 

वाकई बच्चकाना है 
मगर ये बच्चपना तुम से ही क्यों ?

ये रोना धोना ये धमकाना 

हर बात पर छोड़ जाने की कह जाना

ये सब तुम्हारे साथ ही क्यों ?

क्योंकि तुम हक़ हो उसका

वह जानता है कि तुम हर बार

रोक लोगी उसे हाथ पकड़ कर 

उसके गले से लिपट कर 

तुम आत्मा हो 

वो शरीर है 

शरीर चोट खा सकता है 

दर्द महसूस कर सकता है

मगर अपनी मर्ज़ी से आत्मा 

से अलग नहीं हो सकता 
कभी कहो उसे पलट कर 

कि हाँ ठीक है जाओ चले जाओ

तब देखो उस बड़े से लड़के का 

बच्चों की तरह फूट फूट कर रोना 

वो हर बार चाहता है 

तुम मनाओ अपनी व्यस्तता से 

कुछ पल चुरा कर उसके साथ बिताओ 

और कहो कि जाने की ज़िद्द ना करो 

यकीन मानों वो दूसरी बार 

तुम्हे ये बोल गुनगुनाने नहीं देगा 

माफ़ी भी मांगेगा हमेशा की तरह 
माँ का अंश भी है तुम में 

और वो बच्चे की तरह है 

धमकाता है डराता है 

बस इसीलिए कि तुम देखो उसे 

उसे मनाओ उसे दुलारो 

एक दिन मनाना छोड़ देना 

और देखना वो चला आएगा 

सुबह के भूले की तरह शाम को लौट कर घर

मायूस सी सूरत लिए हुए
एक बात याद रखना 

जिस दिन कभी वो तुमसे अलग हो जाए ना

उस दिन से वो खुद से अलग सा दिखने लगेगा

और धीरे धीरे हो जाएगा 

गाँव की मिट्टी की तरह 

जिसे शहर की पक्की इमारतों ने

समेट लिआ है अपने भीतर 
याद रखना तुम से ही उसका वजूद है 

तुम नहीं तो वो खुद खुद का भी नहीं 
धीरज झा



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