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@dawriter

​चले आओ

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मेरे चेहरे पर सजी 

बनावटी हंसी की झालरों 

के बीच से झाँकती है 

अक्सर उदासी मेरी  

ढूंढती है इधर उधर 

बेचैन होकर, तुम्हारी मोहब्बत का 

वो बेहद खूबसूरत चेहरा

जिसे हालात की कुछ

तेजाबी बूंदों ने बना दिया है 

थोड़ा सा बदसूरत 

जो छटपटा रही है 

इस अनचेते हमले से 

ये भीड़ है भीड़ में हर तरफ

हंसी ठिठोलियाँ हैं 

मगर ये सब व्यर्थ है 

मुझे तुम्हारी मोहब्बत का वो 

हसीन चेहरा देखना है

मुझे छलावा नहीं 

सुकून चाहिए 

मुझे हंसना है दिल से

तुम्हे हंसता देख कर 

मुझे छूना है तुम्हारी आत्मा को

मुझे महसूस करनी है 

वो प्यार की बारिश 

जिसका पानी उदासियों का 

हर रंग धो देता है 

मूझे तुम्हे जीना है 

मुझे तुम्हें बार बार मरना है

चले आओ जहाँ भी हो 
धीरज झा 



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