59
Share




@dawriter

​चले आओ

0 16       
dhirajjha123 by  
Dhiraj Jha

मेरे चेहरे पर सजी 

बनावटी हंसी की झालरों 

के बीच से झाँकती है 

अक्सर उदासी मेरी  

ढूंढती है इधर उधर 

बेचैन होकर, तुम्हारी मोहब्बत का 

वो बेहद खूबसूरत चेहरा

जिसे हालात की कुछ

तेजाबी बूंदों ने बना दिया है 

थोड़ा सा बदसूरत 

जो छटपटा रही है 

इस अनचेते हमले से 

ये भीड़ है भीड़ में हर तरफ

हंसी ठिठोलियाँ हैं 

मगर ये सब व्यर्थ है 

मुझे तुम्हारी मोहब्बत का वो 

हसीन चेहरा देखना है

मुझे छलावा नहीं 

सुकून चाहिए 

मुझे हंसना है दिल से

तुम्हे हंसता देख कर 

मुझे छूना है तुम्हारी आत्मा को

मुझे महसूस करनी है 

वो प्यार की बारिश 

जिसका पानी उदासियों का 

हर रंग धो देता है 

मूझे तुम्हे जीना है 

मुझे तुम्हें बार बार मरना है

चले आओ जहाँ भी हो 
धीरज झा 



Vote Add to library

COMMENT