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@dawriter

सुकून की आस

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rashmi by  
rashmi

 

 

जर्रा-जर्रा पिघल रहा....

हर्फ-हर्फ तड़प रहा.....

लहू भी अब 

दर्द की मानिंद..

नस -नस को सुलगा रहा.....

रूह  छलनी-छलनी है.....

साँसे भी ज़रा ज़ख्मी है....

धड़कनें बिलख-बिलख कर

नग़मा-सा एक पढ़ रही....

रक्त-रंजित से मन को यूं

बचाने की फरियाद कर रही.....

 

हालात- ए-कल्ब़ 

ना पूछो........

ख्वाबो़ं की मदफ़न में,

ख्वाह़िशों की मिट्टी तलें

यूं तनहा़ सुबक रहा......

लम्हा-लम्हा चित्कार भरा

रूह को पुकार रहा......

जिस्म की क्या बात करें....

एक मुस्कुराती -सी 

पत्थर की मुरत है.....

 

बस , इंतजार है.......

रूह को गहरा-सा सुकून मिले.....!

 

#Rashmi



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