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@dawriter

रिश्ते

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  • यहाँ बोली लगती हर रिश्ते की
    हर सपने का खरीददार है।
    अपने अपनो से शर्मिन्दा है और
    झूठे रिश्तो की भरमार है।।
    कैसी घटिया सोच यहाँ पर
    कैसा ये संसार है।।
    पूजे जाते पाखंडी
    महिमा प्रभु की अपरम्पार है।।
    मुख पर कुटिल मुस्कान लिए
    रावण के अवतार है।।
    माना अच्छे लोग यहाँ पर
    फिर अच्छाई हारे क्यो हर बार है।।
    क्यो उठा नही सकते अपनी आवाज
    क्या हम दुनिया के कर्जदार है।।।
    मन मे बेशक खुशी रहे ना
    पर मनता हर त्यौहार है।।
    चुपचाप सहो सब ,सहते रहो
    क्योंकि ये हमारे संस्कार है।।


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