54
Share




@dawriter

मेरा‌ ‌वजूद है भी ‌या ‌नहीं????

2 194       
anonymous dawriter by  
Anonymous

 

सुबह छ: बजे से चाय के कप के साथ शुरू हुई मेरी जिन्दगी का हर एक दिन का खाली समय मुझसे यह पूछता है कि कौन हूँ मै ???? क्या वजूद है मेरा???? क्या पाया है मैने???? जवाब वही जिन्दगी देती है कि शायद कुछ नहीं। नौ साल पहले अपने पति के साथ प्रेम विवाह करके इस घर में बड़े सपने लेकर आयी‌ थी कि अपने सपनों को पूरा करने के साथ साथ घर ‌मे भी अपने अच्छे व्यवहार से सबका दिल जीत लूँगी लेकिन शायद हम जो सोचते हैं वो‌ नहीं लिखा होता किस्मत मे। ना सपना पूरा हुआ न कोई अपना बना।।।।पति का प्यार तो पूरा ‌मिला लेकिन जब पता चला कि घर के बाकी सदस्य ही आपको पसंद न करते हों, उनका मतलब तो सिर्फ आपसे अपना काम निकलवाना हो तो शायद उस घर में जीना मुश्किल हो‌ जाता है। इज्जत देने के बाद भी इज्जत नहीं मिल पाती शायद प्रेम विवाह करने का उपहार मिल रहा है मुझे।। मेरे कुछ सपने थे कि उच्च स्तर की पढ़ाई करने के बाद अध्यापिका बनकर बच्चों के भविष्य को सवाँरूगी वो तो पूरा न हुआ बस घर में रहकर आटे व दाल के भाव जरुर समझ आ गये हैं। तीन वक्त के खाने में क्या बनना है बस इसी विचारों में जिन्दगी सिमट कर रह‌ गयी है। आँखों से आंसू छलकाने का, अपने शरीर की पीड़ा बताने का शायद कोई हक नहीं है हम लड़कियों को ससुराल में क्योकि आँखों के आँसुओं को नाटक व शरीर की पीड़ा को काम से मन चुराने का बहाना समझा जाता है।

बिन बड़ों के आशीर्वाद व सपोर्ट के शायद ही हम‌ जीवन में कुछ पा सकते हैं शायद यही वजह बनी मेरे सपने के ना पूरे होने की। टीचर की जाँब तो आधे दिन की ही होती हैं करने की इच्छा कहने पर अपना घर की तरफ व बच्चे की जिम्मेदारी की तरफ ध्यान देने के लिए कहकर चुप करा दिया जाता। पति का सपोर्ट पूरा मिला मेरे लिए घर में लड़ाई भी की लेकिन बड़ों की जिद के आगे झुकना पड़ा। अब घर से निकल कर अकेले भी तो नहीं रहा जाता क्योंकि माता पिता को उनके बेटे से दूर करने के श्रेय का अपने सिर पर नहीं लगाना चाहती।

कहूँ भी तो किससे ना माता-पिता से बोल सकती न ही ससुराल में। कोई समझने वाला ही नहीं, जिससे बात करी वो समझने की बजाय, सिर पर हाथ रखने की बजाय बस यह बोल देता है कि काम तो करना ही पड़ता है ससुराल में आकर नौकरी के खयाल मन से निकाल दो अब वो तुम्हारा घर है जैसा वो कहे वैसा करो….जिन्दगी शायद कठपुतली बन कर रह गयी है। फिर भी इन हालातों में खुशी खुशी जीना सीख लिया है लेकिन जिन्दगी से एक सवाल हमेशा पूछती हूँ कि क्या वजूद है मेरा या है भी कि नहीं ??और मेरे जैसी उन लड़कियों का जिन्होने अपना घर बनाने के लिए अपने सपनों का त्याग किया है।

अच्छा लगे तो कृपया लाइक व कमे़ट अवश्य कीजिएगा।

Image Source : huffingtonpost



Vote Add to library

COMMENT