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@dawriter

मानसिकता

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Parul Mahajan by  
Parul Mahajan

आज क आधुनिक जीवन में और बचपन क जीवन में जमीन आसमान का अंतर है क्यों कहा जाता है की बच्चपन के दिन दोबारा लौट कर नहीं आते....जितनी जरूरते बढ़ती जा रही हैं उतनी परेशानियां भी बढ़ती जा रही हैं और लोग मानसिक रूप से कमजोर हो रहे हैं

जब जिंदगी की परेशानियां झेलने के लिए कोई रास्ता नज़र नहीं आता तो आज की युवा पीढ़ी को आत्महत्या क सिवा कुछ नहीं सूझता और वह न चाहते हुए भी इस पथ पर चलने क लिए अग्रसर हो जाते हैं जोह बिलकुल गलत है...हमे भगवन ने भेजा है एक उद्देशय क साथ इस दुनिया में...

अपनी जिंदगी को ख़त्म करना किसी भी वजह से बिलकुल ठीक नहीं है.जिंदगी में बहुत सी मुश्किलें आती हैं कोशिश यह करनी चाहिए की उनको झेलने क लिए भगवान हम सब में शक्ति का विस्तार करे...भगवन की आराधना एक मात्र मंत्र है जिससे जीवन की सारी परेशानियों को दूर किया जा सकता है..

जिस प्रकार दिन के उपरान्त रात है...तो रात के बाद दिन का होना निश्चित है उसी प्रकार जीवन में दुःख क बाद सुख का आना निश्चित है...बस थोड़ा सयंम...प्रतीक्षा करना और ईश्वर की आराधना करने से कब दुःख सुख में बदल जायेगा पता भी नहीं चलेगा....

मित्रों मै कोई लेखिका नहीं बस अपनी जिंदगी का अनुभव आप सब क समक्ष लिख रही हूँ...मैंने अपने जीवन में एक बहुत प्रिय इंसान जो मेरी जिंदगी में बहुत महत्व रखता था सिर्फ इस वजह से खो दिए की वह अपने जिंदगी के उतार चढ़ाव को नहीं झेल सका.अनंत में आत्महत्या को अपना कर जिंदगी छोड़ कर चला गया...

उसके जाने क बाद उसके बच्चे उसका परिवार अस्त-व्यस्त हो गया....दोस्तों जिंदगी भगवान की देन है उसको उस पर ही छोड़ दो हमे कोई हक़ नहीं इसको खत्म करने का...भगवान ने यह शरीर दिया है उसका रख रखाव करना हमारा कर्त्तव्य है...अपने मन में कोई बात मत रखिये उससे अपने प्रिय जन के साथ बाटिये....अनंत में यह कहना चाहूंगी की किसी शायर ने ठीक हे कहा है कि

"अगर खोल ले ते दिल दोस्तों के साथ,
 खोलना न पड़ता औजारों क साथ..."

 



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