27
Share




@dawriter

मां का नायाब मोती

0 96       
swa by  
swa

 

 

वो झांककर बंगले में देखने की कोशिश कर रहा था, चार चक्कर लगा चुका था अगल-बगल पूरे बंगले के।

 

चौकीदार ने उसे डाँटकर पूछा, "क्या देख रहे हो इधर उधर? क्या चाहिए?"

 

उसने अपनी हकलाती हुई धीमी सी आवाज से कहा, "पप्पू, पप्पू, पप्पू से मिलना है।"

 

पप्पू कोई पप्पू यहां नहीं रहता?

 

 नहीं, पता तो यही है । 

 

यहीं पता है? चौकीदार ने पूछा।

 

 हां यही पता है। उसने इस बात पर जोर देते हुए कहा।

 

 बताओ तो जरा क्या एड्रेस है?

 

उसने अपनी पैंट की जेब में हाथ डाला, उसमें से एक खत निकला। खत चौकीदार पकड़ने ही वाला था कि उसने ये कहते हुए उसके हाथ से यह कह के छीना कि ये तो पप्पू को देना है। दूसरी जेब में हाथ डाला एक पर्ची निकाली, जिसमें पता लिखा था।

 

पता तो यहीं है। परिमल जोशी, बंगला नंबर 15, आदर्श नगर, लखनऊ, लेकिन साहब का नाम तो पप्पू नहीं है? चौकीदार ने अपने माथे पर क्वश्नमार्क लगाते हुए पूछा। उनका नाम तो परिमल है।

 

हां, हां परिमल से ही मिलना है। मुझे अंदर जाना है। उसमें हाथ का इशारा करते हुए कहा। उसे जाता हुआ बीच में रोककर, चौकीदार ने निष्ठुरता से डाँटा, ऐसे कैसे घुसे चले जा रहे हो बंगले के अंदर? कोई नाम पता कुछ बताना होता है कि नहीं। ऐसे मुंह उठाकर चले आते हैं। नाम क्या है?

 

 मैं, मैं छोटू। छोटू, मेरा नाम छोटू है। मां, मां ने भेजा है। माँ ने पप्पू, पप्पू के लिए चिट्ठी  दी है। पप्पू के पास जाना है मुझे।

 

साहब घर पर नहीं है। 3 दिन बाद आएंगे। देहरादून गए हैं छुट्टी मनाने। परिवार के साथ।

 

अच्छा तो मैं अंदर इंतजार कर लूंगा  ....... अंदर ।

 

नहीं अंदर कैसे जा सकते हो? चले आते हैं पता नहीं कहाँ कहाँ से।

 

जा तो रहा था लेकिन मुड़ मुड़कर बार-बार बंगले की तरफ से देख रहा था। न जाने 3 दिन कहां रुका। तीसरे दिन सुबह 5:00 बजे ही दरवाजे पर खड़ा था। चौकीदार अभी गहरी नींद में था। उसको हाथ लगाकर उठाते हुए उसने पूछा ,"भाई साहब पप्पू आ गया क्या?" 

 

पप्पू अरे परेशान कर दिया है। अभी नहीं आए साहब। वही बंगले के दरवाजे पर बैठ गया, तभी चौकीदार ने डंडा मारकर उठाते हुए कहा, "यहां मत बैठो।"

 

 सकपकाते हुए उठा 

अपना बैग उठाया और सामने वाली फुटपाथ पर जाकर बैठ गया। धीरे-धीरे दिन निकला।दिन से से दोपहर, तपती धूप में उसने अपने बोतल में से पानी निकाला, अपना रुमाल गिला करके उसे सर पे रख लिया।

 

चौकीदार माली से बात कर रहा था, "पता नहीं कौन है? 3 दिन पहले आया था। मैंने कहा 3 दिन बाद आना तो 5:00 बजे ही मुझे आकर जगा दिया। हमें तो पागल लगता है।साहब का नाम पप्पू बता रहा है। "माली थोड़ा दयालु था उसने कहा," पेड़ की छांव में बिठा दो बड़ी धूप है। क्या पता कोई काम हो जरूरी। पागल तो नहीं दिखता हो सकता है थोड़ा कम दिमाग हो।

 

चौकीदार ने इशारे से उस बुलाया कहा, "गेट से थोड़ा दूर जाकर वहां पेड़ की छांव में बैठ जाओ। उसने अपने हाथ जोड़ते हुए कहा, "ठीक है। "थोड़ा सा मुस्कराया। चलते चलते रुका और मुड़ा पूछा, "पप्पू कब तक आएगा। "

 

अरे एक ही सवाल का रट लगाए हो। आ जाएंगे एक दो घंटे में अभी बात हुई है हमारी। जब आएंगे हम बता देंगे। उसने "ठीक है" बोला और जाकर पेड़ की छाँव के नीचे बैठ गया। एक काली गाड़ी दरवाजे पर आकर रुकी। उसने हॉर्न बजाया, चौकीदार ने भागकर गेट खोला। वो उठा और भागकर गाड़ी के पास पहुंचने ही वाला था कि गाड़ी अंदर पहुंच गई। तभी चौकीदार ने उसे रोका और कहा, "सहाब अभी थके हुए आएं हैं। थोड़ी देर बाद मैं उनको खुद तुम्हारे बारे में बता दूंगा। तब तक तुम बैठो। अभी अगर बताऊंगा तो गुस्सा करेंगे। उसने गर्दन हिला दी ।

 

माली ने उसकी तरफ देखते हुए कहा, "अब तो साहब को बता दो। एक घंटा गुजर गया।

 

चौकीदार अंदर गया बोला साहब कोई पागल है शायद। 3 दिन पहले आया था, आपका नाम पप्पू बता रहा था। उसके हाथ में एक पर्ची थी जिसमें पता तो यहीं था। उसे आपसे मिलना है। बाहर बैठा है। आप कहे तो भेज दूं। परिमल का चेहरा एक दम से बदल गया पप्पू ना जाने कब से इस नाम को नहीं सुना था। उसने अपनी आवाज में शीघ्रता दिखाते हुए कहा, " हां बिल्कुल भेजो। चौकीदार उसे अंदर लेकर आया। वो आँखे फाडफाडकर बंगले को देख रहा था। परिमल ने एक नजर उस देखा तो आंखें भर आईं। उसने कहा छोटू? छोटू के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे। ना ही खुशी की नहीं दुख के। परिमल ने छोटू को अपने गले से लगा लिया। कैसे हो छोटू ? चौकीदार की तरफ आंख निकालते हुए कहा ,"गेट नहीं खोल सकते थे, अंदर बिठा देते ।

 

 पता नहीं था कौन है? चौकीदारी ने डरते हुए कहा।

 

फोन करके नहीं पूछ सकते थे?

 

साहब हमें लगा।

 

क्या लगा ? जाओ मेरी आंखों के सामने से। राधा आवाज सुनकर बाहर आई, "क्या हुआ? छोटू की तरफ दिखते हुए पूछा ये कौन है? परिमल ने छोटू का नाम बताते हुए कहा ये छोटू है 

राधा की आंखों में जैसे प्रश्नचिंह था? जिस प्रश्नचिंह का जवाब परिमल गर्दन हिलाकर कहा, "हां, यही है।

 

कहां थे इतने दिन? छोटू ने अपनी जेब से एक चिट्ठी निकाली। माँ, माँ ने दी है। बोली कि पप्पू को दे देना। पप्पू को, हां पप्पू को दे देना यही बोला था, माँ ने।

 

मां कैसी है?

 

मां, मां का नाम सुनते ही छोटू ने रोना शुरु कर दिया। माँ बहुत बीमार है। तुम्हें याद करती है। बहुत याद करती है तुम्हें। रोज, रोज याद करती है। तुम कभी नहीं आते मां से मिलने। मैं, मैं तो रोज मिलने जाता हूं। मां से मिलने हॉस्पिटल। तुम तो कभी नहीं जाते। मां बहुत बीमार है बहुत बिमार है माँ। माने चिट्ठी दी है तुम्हारे लिए अपनी जेब से चिट्ठी निकालकर छोटू ने पप्पू को पकड़ा दी

 

पप्पू ने चिट्ठी खोली÷

 

प्यारे पप्पू 

कैसे हो? तुम तो हमें भूल ही गए। अपनी मां की कही गई बात को इतना दिल से लगा लिया कि उसे कभी याद नहीं किया। तुम्हारे छोटे भाई की fd को तुडवाकर, मैं तुम्हें कैसे दे सकती थी? तुम तो जानते हो उसे कितनी जरुरत है इस पैसे की। काश तुम इतने वादे के पक्के न होते? तोड़ देते अपना किया वादा, मैं कभी इस चौखट पर कदम नहीं रखूंगा। तुम्हारे ऊपर तो विश्वास था मुझे, तुम अपने पैरों के खड़े हो जाओगे। लेकिन तुम्हारा छोटा भाई, दुनियादारी की समझ नहीं है उसे। तुम्हारे पिताजी इस दुनिया में हमें अकेला छोड़कर चले गए और तुमने तो जीतेजी हमें मुड़कर नहीं देखा। गांव वालों से खोज खबर मिलती है कि सुख से हो। बस यही मन को तसल्ली है। तुम चाहे पास न हो पर हमेशा खुश रहना।

 

बच्चन में जब कहते मैं छोटू से ज्यादा प्यार करती हूं, तो मैं समझती, बच्चा है इसलिए कहता है, पर तुम तो बड़े ही नहीं हुए। इस बात ने तुम्हारे दिल के अंदर घर बना लिया। तुम हमेशा उससे अपनी तुलना करते। तुमने कभी नहीं सोचा जो तुम्हारे पास है जो तुम्हें सहज मिला है उसके पास नहीं है। उसे देखभाल की ज्यादा जरूरत है। जब शरीर का कोई अंग खराब होता है तो उस पर ही ज्यादा ध्यान दिया जाता है। माता पिता अपने हर बच्चे को समान ही प्यार करते हैं। अब शायद पिता बनने के बाद तुम्हें ये बात समझ में आई होगी।

 

बहुत मजबूरी में तुम्हें चिट्ठी लिख रही हूं। जीवन का कुछ भरोसा नहीं है। तुम्हारा भाई नायाब मोती की तरह है। जिसपर दुनिया के मिलावटी व्यवहार की परत नहीं चढ़ी। तुम्हारे ऊपर पूरी तरह से आश्रित नहीं रहेगा। उसकी fd तुड़वा कर उसके लिए एक दुकान खुलवा देना। सब  काम अच्छे से कर लेता है। कहीं आना जाना हो कभी आज तक उसने इस बात का परिचय नहीं दिया कि उसके अंदर दिमाग नहीं है। आशा रहेगी तुम भी कभी उसे एहसास ना दिलाओ, उसमें कोई कमी है ।

 

चिट्ठी मिलते ही शीघ्र से शीघ्र आने की कोशिश करना। मैं राह देखूंगी, अगर मैं ना रहूं तो अपने भाई को सहारा जरूर देना। तुम्हारे सिवा उसका कोई नहीं है दुनिया में।

                             

प्रतीक्षा में तुम्हारी माँ।"

 

आसुओं का बहाव जो न जाने कितने दिन से परिमल ने रोक रखा था जैसे आज सब कुछ बहाकर ले जाएगा। राधा ने पूछा क्या हुआ सब ठीक है?

 

 परिमल बाहर की तरफ भागा, "ड्राइवर, ड्राइवर गाड़ी निकालो।

 #स्वाति_गौतम



Vote Add to library

COMMENT