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@dawriter

माँ ! माँ! मेरी माँ

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चंदा है तू सूरज है तू

हर तारे का उजाला है तू

हर कण में तेरा रूप बसा

जल की निर्मल धारा है तू।।

        

         कभी प्यार से लोरी सुनाती

         कभी प्यार से रोटी खिलाती

         कभी मार कर तू हमको

         सही राह है दिखलाती।।

 

याद आया आज पल वो

गिरते हम रोती तू थी माँ

हम हँसते तो हँसती तू थी

हम सोते तब सोती तू थी माँ।।

          

          रात रात को जाग जाग कर

          पालन हमारा करती थी

          हमे बनाने को संस्कारी

          काँटों पर खुद चलती थी।।

 

तू ममता का सागर है

कुछ नहीं धन का गागर है

लूट न पाए कोई जिसे

तू ईश्वर की अमानत है।।

 

            कभी बहन कभी अर्धांगिनी

            कभी बहु कभी बेटी

            पर सबसे प्यारा रूप तेरा

            कहते हैं जिसे हम माँ।।

 

जानी जब ममता माँ की

अपना शीश झुकाया है

हर माँ में अंश खुदा का

बस यही समझ में आया है।।

 



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