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@dawriter

बहू की उड़ान

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नेहा का विवाह बहुत ही अच्छे से सम्पन्न हुआ, नेहा के माता-पिता बहुत खुश थे ,नियत जैसे दामाद को बेटे के रूप में पाकर। नियत बहुत ही संपन्न परिवार की इकलौती संतान होने के साथ बहुत ही संस्कारी था, बडो का आदर सम्मान करता। नेहा को भी अच्छा ससुराल मिला। सास और ससुर भी उसे अच्छे ही मिले थे। लेकिन कहते हैं ना कि कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता। बस वैसा ही कुछ नेहा के साथ भी हुआ। नेहा विवाह से पहले नौकरी करती थी पर शादी के बाद नेहा की सास ने नेहा को यह कहकर उसकी नौकरी छुड़वा दी की अब उसे नौकरी की क्या ज़रूरत। वो अब इतने बड़े संपन्न परिवार की बहु है। नेेेहा ससुराल में नई होने के कारण कुछ न बोल सकी और न चाहते हुए भी नेहा ने अपनी नौकरी छोड़ दी।

लेकिन उसे नहीं पता था कि आगे चलकर उसका ये फैसला कितना गलत साबित होगा उसके नौकरी छोड़ने पर उसकी सास उसे पैसे खर्चने की आजादी नहीं देगी। जब भी कभी नेहा अपने मन से कोई खर्चा करने की सोचती या करती तो उसकी सास यही सुनाती कि इसकी क्या ज़रूरत थी। बेकार में इतना खर्चा किया।

कभी किसी अपने को कोई अच्छा गिफ्ट देना चाहती तो भी उसकी सास उसे टोक दिया करती। कि इतना महंगा लेकर क्या करोगी। वो हमेशा अपने मन में सोचती कि आज भी उसकी सहेलियां नेहा का कोई खास दिन नहीं भूलती उसे तोफे देती हैं तो नेहा कयूं नहीं उनहें तोफे दे सकती। आज नेहा ने नियत को सब बताया कि नेहा को नियत की मां पैसों की तंगी कर रही हैं, नियत ने बडे प्यार से समझाया की जो तुमहे पसंद हो ले लो, जहां चाहे पैसे खचो, एक दिन नेहा ने अपने लिए एक साड़ी खरीदी तब तो नेहा की सास ने हद ही कर दी जोर से चिललाने लगी तुम्हें तो फालतू खर्चा करने की आदत है पैसे पेड़ पर नहीं लगते हैं मेरा बेटा बहुत मेहनत से कमाता है और तुम सब कुछ उड़ा देती हो।

आज नेहा को अपने फैसले पर बहुत ही पछतावा हुआ कि, उसने अपनी नौकरी छोड़ने का बहुत ही गलत फैसला लिया। अगर आज वो आत्म-निर्भर होती तो उसे ये सब नहीं सुनना पड़ता। जिस घर में इतने चाव से नेहा को लाया गया और सब कुछ होते हुए भी उसे पैसों के लिए तरसाया जा रहा था। नेहा अपने कमरे में बैठ रोए ही जा रही थी तो नियत नेहा के पास आ एक फार्म देते हुए बड़े प्यार से बोला, अपने जीवन में किसी दूसरे पर आश्रित क्यू रहना चाहती हो जब तुम खुद आत्म-निर्भर रह सकती हो। तुम्हे इसलिए मैने कहा था कि तुम नौकरी मत छोड़ो। अब नेहा ने भी निश्चय कर लिया कि वो अपनी गलती सुधारेगी। नेहा नियत के साथ अपनी सास के पास गई और अपना फैसला सुना दिया कि बस अब बहुत हो गया अब वह फिर से अपना करियर शुरू करुँगी।

उसकी सास कुछ बोल पाती इस से पहले ही दोनों अपना फैसला सुनाकर कमरे से बाहर जा चुके थे, अब दोनों ही तैयार थे नेेहा कि एक नयी उड़ान के लिए। इस लेख के माध्यम से मैं आप सबसे ये कहना चाहती हूँ कि आत्म-निर्भर बनिए। ज़रूरी नहीं की सबके घर ऐसा ही हो लेकिन जीवन में हर उतार चढ़ाव का सामना करने के लिए एक बहू का आत्म-निर्भर होना बहुत ज़रूरी हैं,इसके लिए हर पति को अपनी पत्नी का साथ देना चाहिए जैसे नियत ने नेहा का साथ दिया।

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