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@dawriter

बहाव के विरुद्ध

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Mohit Trendster by  
Mohit Trendster

 

एक गायन टीवी शो के दौरान चयनित प्रतिभागी को समझते हुए एक निर्णायक, मेंटर बोला। 

"अपनी कला पर ध्यान दो, तुम्हारा फोकस कहाँ है? मैं नहीं चाहता कि तुम इस जेनरेशन के सुरजीत चौहान या देविका नंदानी कहलाये जाओ।
क्या तुम्हे अपने माँ-बाप का सिर शर्म से झुकाना है?"


देहरादून में अपने घर पर टीवी देखते हुए सुरजीत चौहान के चेहरे पर मुस्कराहट आ गई। ऐसा पहली बार नहीं हुआ था पर वह नकारात्मक बातें, ताने नज़रअंदाज़ करने की पूरी कोशिश करता था। उसे इंटरनेट का ज़्यादा शौक नहीं था पर बच्चों के कहने पर नया स्मार्टफोन लिया था। आज हिम्मत जुटाकर अपना नाम इंटरनेट पर खोजा। उसके और देविका के नाम पर कई न्यूज़ रिपोर्ट्स, आर्टिकल, वीडिओज़ थे। किसी में उनपर जयपुर में दर्ज हुए धोखाधड़ी के केस की खबर थी, तो किसी में ड्रग्स रखने के आरोप।

 

21 साल पहले सुरजीत और देविका ऐसे ही एक गायन टीवी शो में प्रतिभागी थे। शुरुआती हफ्ते ठीक बीतने के बाद अचानक एकदिन दोनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। यहाँ उन्होंने टीवी चैनल मैनेजमेंट पर शो के वोट्स में हेरफेर, पैसों के गबन और कास्टिंग काउच जैसे गंभीर आरोप लगाए। उस दौर में ये एक बड़ी खबर बनी पर कुछ दिनों में खबर का स्वाद कम होने के साथ बात आई गई हो गयी। दोनों को तुरंत शो से निकाल दिया गया और इनपर दर्जनों मामले दर्ज हो गए वो भी ऐसी जगहों पर जहाँ ये कभी गए ही नहीं। उस समय इन्होने भी उपलब्ध सबूतों के साथ टीवी चैनल के मैनेजमेंट पर कुछ केस किये। मुंबई में संघर्ष करने गए इन युवाओं पर प्रेस वार्ता के बाद ऐसा ठप्पा लगा कि उन्हें कहीं काम नहीं मिला और कुछ महीनों बाद दोनों अपने-अपने शहरों को लौट आये।

 

सपनों के शहर में सपनों को चकनाचूर होता देखने के बाद इन प्रतिभावान गायकों ने साधारण निजी नौकरियां पकड़ ली। दोनों तरफ से दर्ज हुए मामले या तो रद्द हो गए या अनिर्णीत घिसटते रहे। किसी भी केस में सुरजीत और देविका को सज़ा नहीं हुई थी पर झूठ इतनी बार दोहराया जा चुका था कि आम जनता आरोपों को सच मानती थी। वो टीवी चैनल आज 2 दशक बाद भारत के सबसे बड़े चैनल्स में से एक है।


उधर जौनपुर में देविका एक 15 साल के किशोर के विडिओ पर मुस्कुरा रही थी, जिसमे वो अपने पैदा होने से 6 साल पुरानी न्यूज़ क्लिप्स के आधार पर अर्जित जानकारी के अनुसार देविका और सुरजीत का मज़ाक उड़ा रहा था। कोई दिन ऐसा नहीं जाता जब सुरजीत, देविका यह नहीं सोचते कि काश हमने हिम्मत ना दिखाई होती...काश हम भी औरों की तरह बहाव में बहते रहते।

समाप्त!
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