97
Share




@dawriter

बरगद

0 7       

इधर कुछ दिनों से
एक यूकेलिप्टस तन खड़ा हुआ है
पुराने बरगद के सामने।
अट्टहास उपहास करता हुआ
बरगद की जीर्णता पर।
समझता है,बौना है,बरगद
अकड़ा खड़ा यूकेलिप्टस।

ये वही बरगद है
जो धंसा है सदियों से
धरती के भीतर।
जिसकी टहनियां
चिपक गयी हैं
धरती की छाती से।
जाने कितने अंधड़
मायूस होकर गुजर गए
बरसातें रोकर बीत गई
भूडोल भी कुछ नहीं बिगाड़ पाया
फिर भी झुका है बरगद।

बरगद ने देख रखा है,
कई यूकेलिप्टस का बोया जाना
तनकर खड़ा हो जाना
और फिर गिर जाना
गिर कर कभी न उठना
बस मौसमों में इठलाना
और फिर बीत जाना।

फिर भी मौसम में तनकर
खड़ा हुआ हर यूकेलिप्टस
बरगद को बौना ही मानता रहा है
आज भी बरगद खड़ा है।

अमृतांशु



Vote Add to library

COMMENT