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@dawriter

बचपन कहाँ खो गया??

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बचपन याद है दोस्तों। मेरा तुम्हारा इसका उसका हम सब का बचपन। बेफिक्री की धूल उड़ता और मौज मस्ती के नित नए झंडे गाड़ता। बचपन मासूम होता है। चिंता परेशानी भेद भाव से दूर अपनी धुन में मगन बस उड़ते रहना अपने मन के साथ। कांच की गोलियां रंग बिरंगी पतंगे कांटो में छुपे बेर बगीचे के झूले खट्टी मीठी अमियां रेत में मिले शंख मनोरंजक कॉमिक्स लुभावनी परी कथाएं और दादी नानी के गांव की मस्ती। अरे हाँ नानी दादी से याद आया गर्मी की छुटियाँ शुरू हो गई हैं मगर आज के नन्हे फरिश्तो को फुरसत कहा है। अब तो गर्मी की छुटियाँ भी नई चुनौतियां लेकर आती हैं। School bag की जगह उनके कंधों पर activity bag होता है। साथ ही new class के प्रोजेक्ट वर्क दे दिया जाता है। समर कैंप के अलग अलग कोर्सेज उनकी प्रतिभा को निखारने के लिए तत्पर रहते हैं। आज हम आप सब अपने बच्चों को multi talented बनाना चाहते हैं।

खास बात तो यह है कि छुटियों में बच्चा दस पांच दिनों के लिए कहीं जाता है तो हम उसे पूरे डिसिप्लिन में रहने को कहते। हम अभिभावक कुछ ज्यादा ही परेशान रहने लगे हैं और इससे बच्चों में तनाव साफ़ नज़र आता है। बाकी की कमी टीवी मोबाइल और सोशल साइट्स पूरी कर दे रहे हैं। आपको नहीं लगता कि हम अपने बच्चो का बाहरी विकास तो खूब कर रहे हैं लेकिन एक अंधी दौड़ में शामिल होकर हम उसके आंतरिक सुंदरता का विकास नहीं कर पा रहे हैं। कहीं न कहीं हमारे बच्चे हमसे दूर होते जा रहे हैं। क्या हम अपने बच्चो की दुनिया में फूल, तितलियां, रंग, परी कथाये  सब कुछ वापस नहीं ला सकते ताकि उनकी मासूमियत बनी रहे और वह पूरे उत्साह के साथ भावी जीवन के लिए तैयार हो सकें।।

आज का बचपन चहक महक नहीं रहा। वह तो थका हारा सोता है और सुबह होते ही भाग ने लगता है अपने माँ बाप की future planning के अनुसार। आपको भी क्या ऐसा लगता है??



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