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@dawriter

बंद होना करो संवेदनाओं के नाम पर अपना फायदा निकालने का ये खेल

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हम सब की ज़िन्दगी में कभी न कभी कोई न कोई बड़ा हादसा हुआ होता है । जो हमें जब भी याद आये तो हम भावुक हो जाते हैं, कई बार क्रोध आता है तो कई बार अनसु निकल आते हैं । हम उसे भुलाना चाहते हैं मगर वो किसी न किसी बहाने से हमें याद आही जाता है । हमारे आस पास कुछ ऐसे लोग होते हैं जिन्हें जब भी हमसे किसी मदद की ज़रूरत हो तो वो हमारे पास आकर उन्हीं हादसों को याद करवाते हैं और हमें दिलासा देने का झूठा नाटक करते हैं । सब जानते हुए भी हमें लगता है कि नहीं यार ये बंदा हमारा हिमायती है कितना ख्याल रखता है इसकी मदद करनी चाहिए । हम गलत नहीं होते बस हम अपनी भावुकता में बह कर सही गलत को पहचान नहीं पाते ।
 
पंजाब के लिए ऐसा ही बड़ा और कभी न भुलाया जा सकने वाला हादसा है 1984 के दंगे । हजारों जानें गईं, किसी का बीटा किसी का भाई तो किसी का पति चला गया । लोगों ने दर के साये में एक एक पल बिताया उन दिनों । पापा अक्सर बताते थे उन दिनों के किस्से, वो उस वक़्त पंजाब में नए नए गए थे । माहौल इतना भयावह था कि सभी जान पहचान वाले इक्कठा हो कर सोते थे । शहर में शाम ढलते ही वीराना छ जाता था । याद है जब पापा ने बताया था कि शहर के एक दुकानदार को दिन में गोलियों से छलनी कर दिया गया था । सिक्ख भाइयों को पकड़ पकड़ कर झूठा आतंकवादी बता कर हत्या कर दी जाती थी और नाम लगता था हिन्दुओं का । जबकि ये सब राजनैतिक दांवपेंच का रचाया हुआ खेल था जिसने हजारों जानें ले लीं कईयों के के घर बर्बाद कर दिए । कितनों को मुल्क छोड़ कर भागना पड़ा ।
 
वक्त बीता और वक्त ने मरहम लगा कर घावों को भरना शुरू किया मगर टीस तो हमेशा बनी रहेगी । हाँ मगर लोगों ने सबर कर लिया पंजाब अपने रास्ते पर बढ़ता रहा फलता रहा फूलता रहा । बहुत कुछ बदल गया तब से अब तक नहीं बदली तो गन्दी राजनीति जो समय समय पर अपने फायदे के लिए आकर इन घावों को कुरेदती है और फिर मरहम लगा कर झूठी सहानुभूति दिखाती है । इतने सैलून तक सब सोते रहे और जब जब चुनाव नजदीक आये धरने शुरू होगए आवाजें उठने लगीं अचानक से सब सिक्खों के हिमायती बन गए । क्यों ? क्योंकि इन्हें बस वोट चाहिए । सिर्फ पंजाब ही नहीं हर जगह पूरे देश का यही हाल है । आज की राजनीति सच में अब सोचने पर मजबूर कर देती है कि अगर इन्हीं हाथों में हमारे देश का भविष्य है तो वाकई हम एक बहुत ही बुरे दौर से गुजरने वाले हैं ।
 
आप सब अपनी ऑंखें खोलिए देखिए कौन है जिसका मन साफ़ है कौन है जो आपके बारे में सोच रहा है हमेशा से । उसे चुनिए और अगर ऐसा कोई नहीं मिलता तो मत दीजिए किसी ऐसे को वोट जो आपकी भावनाओं से खेल रहा है । बाकि समझदार तो आप खुद भी बहुत हैं….
 
धीरज झा


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