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@dawriter

नार्मल डिलीवरी ही होनी चाहिए।

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रमा बहुत खुश थी।आखिरकार शादी के पाँच साल बाद, समाज के,परिवार के अंसख्य, अनगिनत ताने सुनने के बाद आज उसे दो पिकं रेखाए दिखी थी।

वो पिकं रेखाएं माँ बनने की परीक्षा में पास होने के संकेत थे। आंनद ,रमा का पति भी संपूर्णता की परीक्षा में सफल होकर गर्व महसूस कर रहा था। रमा की सास खुश तो थी पर अब दादी बनने की चिंता की जगह, डिलीवरी नार्मल होगी या नहीं। पोता होगा या नहीं। जैसे विचारों ने ले ली थी। कानपुर का वह अस्पताल चुना गया जो नार्मल डिलिवरी के लिए प्रसिद्ध था।

रमा के मायेके में केवल उसके पिता थे। और संकोची स्वभाव के कारण उसकी कोई प्रिय परम सहेली भी नहीं थी जिसके साथ वो डिलीवरी के बारे में बात कर सके। अपने अनजाने डर को बता सके । शुरू के तीन महीनों की उल्टी और morning sickness ने रमा को डरा दिया। बेड रेस्ट की वजह से जाँब से भी छुट्टी लेनी पड़ी। उसे लग रहा था की इतनी तकलीफ में वो नौ महीने कैसे काटेगी।

सास को कुछ तकलीफ कहती तो सास का जवाब हमेशा एक ही होता है। सब को होती है तुम अनोखी नहीं हो। आस पास में भी किसी से बात हो तो भी यही कहते कि तकलीफ होती है घबराओ मत, बस खुश रहो। डाँक्टर भी यही कहती है हिम्मत रखो, एक जीव है तुम्हारी कोख में कुछ तकलीफ तो होगी,बस अच्छा खाओ,अच्छा सोचो और खुश रहो। पर रमा को समझ नहीं आ रहा था की इतनी तकलीफ में वो कैसे खुश रह सकती है। पर धीरे धीरे बच्चे की कल्पना ने उसकी तकलीफ को कम किया। आंनद भी हमेशा कहता "मै तुम्हारी तकलीफ ले सकता रमा तो ले लेता। बस कुछ महीने। हमारे बच्चे के लिए।"

रमा के लिए कुछ महीने क्या, एक एक दिन के साथ जीवन मुश्किल होता जा रहा था। उस पर सास का दबाव, डिलीवरी नार्मल ही होनी चाहिये। रामायण ,गीता पढ़ो, नरियल मिश्री खाओ बच्चा सुंदर होना चाहिए। वजन रमा का पहले से ज्यादा था, और बढ़ गया जिस से उठने बैठने में भी परेशानी होने लगी , सोनोग्राफी में अपनी कोख में पलते बच्चे को देखकर उसे ताकत मिलती थी, कि अपने बच्चे के लिए वो पीड़ा सह लेगी। जैसे तैसे भगवान का नाम लेकर समय कटा और वो निणार्यक दिन आया।

पेपर्स तैयार हुए , एन एस टी.. ऎनीमा..क्लीनिंग.. रमा को डर लग रहा था बहुत डर.. उसे लग रहा था फाल्स पेन हैं...डाँक्टर ने कहा नहीं परफेक्ट पेन है. अब ऐडमिट करना होगा बच्चा आने वाला है। उसकी सास पूछती है 'अरी बता तो दर्द कमर से उठ रहा है या पेट से ..कमर से उठता है तो लड़का होता है ..'

नहीं मुझे तो कुछ पता ही नहीं कमर भी दर्द कर रही है पेट भी सास की आवाज़ ओर कर्कश हो जाती है "तू दूसरे दुनिया से नहीं है पहली औरत भी नहीं है जो बच्चा जनने जा रही है दुनिया की हर औरत जनती है लड़का हो या लड़की डिलीवरी नार्मल होनी चाहिए ". पास से गुज़रती सिस्टर, इंसान थी कहती है नहीं दुनिया का हर डिलेवरी केस अलग होता है आप चेयर पर बैठो.

कुछ नयी उम्र के डाक्टरो में एक नीचे के हिस्से में जाँचं पड़ताल में लगी थी दूसरी केस को पढ़ रही थी " सुनो दर्द बढ़ाने की दवाई डालो जितने तेज दर्द होगें उतने ज्यादा नार्मल डिलीवरी होने के चासंस बढेंगे। " रमा लेटी है मुहं से बीच बीच में आवाज निकलती है देखती है आसपास पेट फुलाए पड़ी, चिल्लाती, रोती औरतें और केवल औरतें ! दर्द के तेज होने की मिन्नत करती, साँस नीचे की ओर लेती, दाँत भींचती औरतें ही औरतें !

नार्मल डिलीवरी के लिए दर्द बहुत जरूरी है ! दर्द के बिना पेट काट्ना पड़ेगा तो ज्यादा तकलीफ होगी ! ..मुझे जाने दो मुझे छोड़ दो यहां की आवाज से कुछ अजीब सा होता है इन औरतों के दर्द में अजीब होते चेहरों को देखने से बहुत डर लग रहा है। प्लीज हेल्प करो आंनद तुम कहाँ हो मुझे बचा लो................ ये साउंड फूफ लेबर रुम है यहां की चीखे बाहर नहीं जाती, तुम्हारा पति कोई मदद नहीं कर सकता। बढ़ता दर्द ही आज तुम्हारी मदद करेगा।....कोई और बोला वाँक करो दर्द बढ़ेगा! उठो।.... खड़ी नहीं हो पा रही चल कैैसेे पाऊगी।....टांगे कांप रही हैं मेरे पति को बुलाओ...यहां किसी की एंट्री एलाउड नहीं है !

पानी पानी चाहिए.. दर्द उसे अजगर की तरह जकड़ रहा है पता नहीं कौन पानी दे जाता है........अब कितनी देर और, हे भगवान मेरी मदद करो..माँ आप कहाँ हो.....दर्द बेकाबू ....हो रहा है ... डाक्टर कहाँ है... मुझे पेनलेस डिलीवरी चाहिए ...आपरेट कर दो नहीं चाहिए नार्मल डिलीवरी सास की आवाज सुनाई देती है थोड़ा और सह ले नार्मल डिलिवरी ही होनी चाहिए।.........."सांस फूल रही थी रमा की मुट्ठियाँ भिंच रही थीं! आंनद पर बहुत गुस्सा आ रहा था ! मेरा हाथ थाम ले एक बार वह ..देखे मेरा हाल कमर से ऊपर उठे डिलीवरी गाउन में टांगे फैलाए पलंग के किनारों से भिड़ते मुंह सूख रहा है.... सिस्टर सिस्टर......! डाक्टर आती हैं बहुत सामान्य भाव लिए आवाज में गुस्सा लिए कह रही हैं "क्यों तुम्हें चाहिए पेनलेस डिलीवरी ...तुम्हारी मां ने तुम्हें आपरेट करके पैदा किया था..तुम्हारा पति आपरेट होकर आया था। ..वैसे भी सेफ कहां पेनलेस डिलीवरी का टीका सुन्न हो जाएगा रास्ता तो बच्चा अंदर रह सकता है और ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है मेरा अस्पताल फेमस है नार्मल डिलीवरी के लिए ..फिर बच्चे को खतरा हो सकता है ..." पता नहीं मुझे मैं इस समय तो मैं मर रही हुँ मुझे नहीं मरना डाक्टर " रमा के होंठ चिपकने लगते हैं आंखें आंसुओं का लगातार बहना बढ़ जाता है पेन का इंटरवेल अभी बढ़ रहा है ! सब कहते थे तो बस बच्चे के बारे में सोचना ! सास कहती थी लड़का होगा सोचना तो दर्द महसूस नहीं होगा ! सब झूठ था मैं यहाँ फस गई... ..बेड पर खून ही खून कोई कहता है अरे यार ! जूनियर डाक्टर देखती है डाइलेशन थी इंचिज हुआ है इस हिसाब से अभी सिक्स ऑवर्स लगेंगे नर्स सुबह छ्ह के आसपास ! डाक्टर चली जाती हैं ...." इससे ज्यादा दर्द कैसे हो सकता है ..कोई बच ही कैसे सकता है इस दर्द के बाद ......बताओ बताओ प्लीज हेल्प मी " पर शायदहां कोई नहीं था सुनने वाला ....कोई तो हो जो कहे रमा मैं समझ सकता हुँ तुम्हारी पीड़ा

अचानक आवाज आती है ... " देखो सिर दिखने लगा है डाइलेशन इंप्रूवड है साँसे लंबी लो नीचे की ओर, चिल्लाओ मत इतना ..करते वक्त नहीं पता था कि जनते वक्त इतना दर्द होगा ? !" रमा बीच में जाने बेहोश हो रही थी या सो रही थी। पता नहीं पर आँखे बंद हो रही थी। शरीर शिथिल हो रहा था। दिमाग में जैसे कोई पिक्चर चल रही थी, एक में वह बच्ची है माँ की गोद में, दूसरे सीन में माँ की फोटो पे माला है और वो प्यारी से फ्राक पहने पापा के साथ, एक में वह आंनद के साथ है वो कहते है तुम सबसे ज्यादा खूबसूरत हो, दूसरे में वो बाँझ जैसे ताने सुन कर रो रही है एक में वह ग़िड़्गिड़ा रही है आंनद मुझे भी समझो जरा, दूसरे सीन में सास का कहना नार्मल डिलीवरी होनी चाहिए। ...वो हाँफ रही है बाल नोंच रही है हाथ पटक रही है ! पैरो में जो हो रहा है वो दर्द नहीं है। बहुत भयंकर और भयानक

उसकी चीखें बढ़ती जा रही हैं ! डाक्टर अफरा तफरी मच जाती है रेस्ट रूम से डाक्टर भागती आती हैं स्ट्रेचर यहाँ है "जल्दी जल्दी डिलीवरी टेबल पर शिफ्ट करो ...रोको अभी जोर नहीं लगाओ साँस अंदर खींचो ..." रमा की टाँगें खोलकर लटका दी जाती हैं ....सुनो हाथ टाँगों पर लपेटकर सीने से टाँगें चिपकाकर जोर लगाओ ....रोको जब दर्द की लहर उठेगी तब लगाना खाली नहीं ...." रमा गला फाडकर चिल्लाती है मम्मी ! सीनियर डाक्टर डाँट रही है चिल्लाओ मत मुँह बंद करो, बच्चा नीचे से निकलेगा मुंह से नहीं ! मुंह बंद ...' अचानक दर्द की तेज लहर उठती है रमाा का चेहरा और भी भयानक हो जाता है, वहां खड़ी सब औरतें समवेत स्वर में गाती हैं हाँ हाँ लगाओ लगाओ लगाओ लगाओ थोड़ा ओर नीचे की और ताकत लगाओ... बस ....हां लगाओ लगाओ लगओ लगाओ लगाओ. और थोड़ा ताकत लगाओ नीचे की और.........लो यह आ गया सिर बाहर, एक ओर नार्मल डिलीवरी की हमने ...... देख लो क्या है फिर काटेंगे ...लो यह काट दी नाल वह पड़ी है ट्रे में देखो .....वे रूई ठूंस रहे हैं रमा में ! अब कुछ बाहर नहीं आना चाहिए

सास की कम होती आवाज सुनाई दे रही है लड़का हुआ है, नार्मल डिलीवरी हुई है बधाई हो।

पर रमा की आँखे................

खुल ही नहीं रही थी। ऐसा लग रहा था वो एक गहरे समुध्द में डूबते जा रही है।

...........

मनीषा गौतम



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