24
Share




@dawriter

नारी की गूंज

0 18       
rashmi by  
rashmi

 

कहीं भूखे सोए बच्चों के पास...

आँसु बहाती बैठी माँ,

उसकी वो धीमी-सी सिसकियाँ 

एक डर के साथ निकलती है..

कि कहीं...

बच्चें उठकर कुछ माँग ना ले........

 

कहीं बुखार में तड़पती 

दर्द से कराहती 

वो औरत.....

जिसके दवाई के पैसे भी 

शराब की भेंट चढ़ चुके थे..........

 

कहीं अत्याचार की कड़कती

बिजली से जली,

आँसुओं को मरहम बनाती

वो स्त्री....

जिसकी चीखने की हिम्मत

बची ही नहीं...........

 

कहीं अय्याशी़ के लिए

हवस का शिकार बनाकर,

गिरफ्त़ की गई

वो मासूम.....

जिसे हर रात अब

मरना ही होता है........

 

उफ्फ़,

 

रात के सन्नाटों में 

नारी की कितनी कहानियों की गूंज 

होती है जो........अक्सर अनसुनी रह जाती है.....!

 

#रश्मि



Vote Add to library

COMMENT