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@dawriter

नारी का मन

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धू धू कर धधकता
नारी का.......
नहीं ...ये तन नहीं
मन धधक रहा
हर दिन हर पल
कभी समाज के
नियमों से
कभी प्रतिकार से
कभी क्षोभ से
कभी अपमान से
धधकता
कभी स्नेह को
कभी विश्वास को
कभी आत्मसम्मान को
ये नारी का मन
ये सदा से ही
धधकता .........
जान ना पाया कोई
जानना ना चाहा किसी ने
क्यूँ इस जननी ने
हर पल धधकना सीखा ।



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