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@dawriter

देखा एक ख्वाब !!

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कमरे की अधखुली खिड़की में पैर टिकाये ..... सांची, अपने दुपट्टे के किनारे को अपनी उंगली पर लपेटते हुए जोर से खिल खिला कर हंस पड़ी, जब उसी के सर से सर टिकाये कल्पना ने उसे अपने किस्से सुनाए । जी .......!!! आज कल दोनों का सारा दिन बस यही काम था दोनों की जल्द ही शादी जो होने वाली थी, दोनों ही ख्वाबों की दुनिया में जी रही थी। हालांकि दोनों ही के स्वभाव में जमीन आसमान का अंतर था। जहां सांची, सीधी और साफ बात करती। वहीं कल्पना, हर बात को बढ़ा चढ़ा कर उसमें अपनी तारीफों के कसीदे पढ़ कर बताया करती थी।

सांची की शादी 2 महीने बाद और कल्पना की शादी अब से ढ़ाई महीने बाद तय हुई थी। तकरीबन 15 दिन का अंतर था दोनों में, पर दोनों को एक ही डर था कि कही सांची, शादी के बाद कल्पना की शादी में आ भी पाएगी या नहीं। उसकी खुद की नई नई शादी हुई होगी, तो दोनों बैठ कर उसी के बहाने बनाया करती थी, कि जब वो (सांची) पग फेरे की रस्म के लिए एक दो दिन को आएगी न तभी कुछ बहाना बना कर शादी तक किसी तरह रुक जाएगी, नहीं तो ...... ऐसा न हो कि सासु माँ कहे अभी तो आयी हो, अभी फिर से जाना है, मायके से इतना ही प्यार था तो वही क्यों न रह ली हमेशा के लिए। और दोनों फिर से खिल खिला पड़ी !! सांची की मम्मी ने कमरे में घुसते हुए कहा लड़कियों कुछ ही समय में तुम्हारी शादी होने वाली है थोड़ी तो गंभीर बनो, कही ऐसा न हो विदाई में भी ऐसी ही खी खी करती हुई जाओ और हम यहां बेवजह आँसूं बहाते रहे और दोनों फिर से हंस दी ।

3 महीने बाद सांची और कल्पना दोनों की शादी हो चुकी थी और वही हुआ जिसका उन्हें डर था। सांची की सास ने उसे कल्पना की शादी में जाने से साफ इंकार कर दिया था। हंसी हंसी की ये बात वास्तव में सच हो गयी थी पर अब कल्पना अपने घर आई हुई थी। सांची भी दो दिन के लिए अपने घर आई, इस बात से बिल्कुल अनजान की कल्पना भी मायके में है उसने कल्पना के फ़ोन पर कई बार ट्राई भी किया लेकिन वो लगता ही नहीं था। शायद उसने नया नम्बर ले लिया हो सांची यही सोच कर रह जाती। इस बार उसने सोचा एक बार कल्पना के घर जाकर उसकी मम्मी से मिल आये और उनसे शादी में न आ पाने के लिए माफी भी मांग ले।

इसीलिए आज उसने उनके घर फ़ोन किया तो उन्होंने बताया कि कल्पना भी आने ही वाली है। शाम को दोनो मिल लेना, पर सांची कल्पना से उसके घर नहीं मिलना चाहती थी। इसलिए उसने आंटी से कहा जब कल्पना आये उसे कहना मुझे फ़ोन कर ले बहुत जरूरी है, हालांकि उसकी मम्मी ने उसे उसका नया नम्बर भी दे दिया पर शायद रास्ते मे सिग्नल नहीं मिलने की वजह से बात नही हो पाई।

कल्पना के घर पहुंचने के बाद उसकी मम्मी ने उसे सांची को फ़ोन कर बताने को कहा, सांची ने जैसे ही फ़ोन उठाया उसकी रुलाई आ गयी वो अपनी बचपन की सहेली की सबसे बड़ी खुशी में उसके साथ शामिल भी न हो पाई, पहले उसने कल्पना से माफी मांगी। जिसे कल्पना ने हंस कर टाल दिया और शाम 6 बजे रेस्टोरेन्ट में मिलने का वादा किया।

सांची 6 बजे से पहले ही वहां पहुंच गई कल्पना अभी तक नहीं आई थी, पीछे से किसी ने आवाज़ दी, क्या मैडम ?? इतनी जल्दी, अरे ! आ गयी कल्पना, बहुत सुंदर लग रही है और तू भी !! कहते हुए कल्पना बैठ गयी ।

हमेशा हँसने खिलखिलाने वाली दोनो सहेलियां इतनी चुप थी जैसे अनजान हो, बहुत देर की गहरी खामोशी के बाद सांची ने ही बोलना शुरू किया। मैं बहुत शर्मिंदा हूँ कल्पना ! तेरी शादी में आने की बहुत कोशिश की लेकिन घर में ..... ,बस इतना ही कह पायी थी कल्पना बोल पड़ी सब ख्वाब झूठे थे न, तेरे भी । सुनते ही सांची की आंखों से आंसू बहने लगे, तेरे भी कह कर वो फफक पड़ी।

और दोनों बहुत देर तक आंसुओ की धारा को रोक ही नहीं पायी। कल्पना ने कहा सांची तू जानती है ..... वहां अब सब काम मैं ही करती हूँ सुबह 5 बजे उठती हूँ और रात 10 बजे के बाद कही जाकर मैं फ्री होती हूँ , पर मुझे ऐसा लगता है कि इन सब की दोषी भी मैं खुद ही हूँ, क्योंकि मैंने ही शादी से पहले सब बढ़ा चढ़ा कर कहा था कि मैं घर का सब काम करती हूँ। सुबह 8 बजे के भी बाद उठती थी और 6 बजे बताती थी और खाना तो मैंने शादी से पहले गिनती के 6-7 बार बनाया होगा, और मैं उन्हें कहती कि मैं सब बना सकती हूं। मेरे बेवजह की तारीफों का ही फल मैं आज भुगत रही हूं। लेकिन तू, तू तो बिल्कुल सीधी और साफ बात करती थी न तो तुझे क्या परेशानी है ......??? सांची !! सांची बोली जो परेशानी तेरी है ना बस वही मेरे ससुराल वालों की है, मैंने समझा जैसी साफ और सीधी बात मैं करती हूँ ऐसी ही वे लोग भी करते होंगे पर मैं कहाँ जानती थी कि ये सब मेरी गलतफहमी है ।

और उन्होंने जो अपनी तारीफों के पुल बांधे थे न, वे सब झूठे निकले, एक दम झूठे ! तुझे पता है न ऋषि मुझसे हमेशा कहते थे कि हम शादी के बाद केरल चलेंगे। अरे ! केरल तो छोड़ हम साथ एक ग्लास जूस पीने भी कहीं नहीं गए, कभी अगर वे कहते भी हैं कहीं बाहर जाने के लिए तो पूरे परिवार के साथ। अब तू ही बता अभी तो शादी हुई है कहीं आसपास तो हम अकेले जा ही सकते है न। सब कुछ झूठ है, शादी बस एक कल्पना है और एक ख्वाब जब तक पूरा न हो। उसके बाद एक कड़वी सच्चाई और कुछ नहीं।

© नेहा भारद्वाज



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